कारसेवकों पर फायरिंग के मामले में मुलायम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

नई दिल्‍ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग का आदेश देने के लिए मुलायम पर FIR दर्ज कराने की बात कही गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका रद्द कर दी।
यह मामला नवंबर 1990 से जुड़ा हुआ है, जब मुलायम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे। तब तक बीजेपी को अस्तित्व में आए 10 साल हो चुके थे और केंद्र की वीपी सिंह सरकार में उसकी हिस्सेदारी थी। सितंबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने की मांग के पक्ष में रथ यात्रा शुरू की। वीपी सिंह इसके पक्ष में नहीं थे।
आडवाणी की रथ यात्रा की वजह से अयोध्या में माहौल तनावभरा हो गया था। 30 अक्टूबर 1990 को कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के लिए तमाम श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हुए थे। बीजेपी और RSS के तमाम कार्यकर्ता उस जगह इकट्ठा थे, जिसे भगवान राम की जन्मभूमि माना जाता है। इस जमावड़े को देख मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने पुलिस को साफ निर्देश दिए थे कि बाबरी मस्ज़िद को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
जब मंदिर की मांग करने वाले लोग उग्र होकर मस्ज़िद की तरफ बढ़ने लगे, तो पुलिस ने आंसूगैस के गोलों से उन्हें खदेड़ने की कोशिश की। हालांकि, तब तक कई लोग बाबरी मस्ज़िद के गुंबद पर चढ़कर भगवा झंडा फहराने लगे थे। इसके बाद पुलिसवालों ने फायरिंग शुरू की। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फायरिंग में पांच कारसेवकों की मौत हुई थी। हालांकि, बताया यह भी जाता है कि असल आंकड़े इससे कहीं ज़्यादा के थे। इस घटना के बाद से मुलायम पर मुस्लिम-परस्ती का ठप्पा लगा दिया गया।
मुलायम के इस आदेश की वजह से उस दिन तो बाबरी मस्ज़िद बच गई, लेकिन ज़्यादा दिन तक टिकी नहीं रह सकी। 6 दिसंबर 1992 को यूपी में बीजेपी के कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते बाबरी मस्ज़िद गिरा दी गई। इस विध्वंस ने देशभर में दंगों को जन्म दिया।
उत्तर प्रदेश के पिछले यानी 2013 के चुनाव से लेकर अब तक मुलायम कई बार दोहरा चुके हैं कि उन्हें अपने इस फैसले का अफसोस ज़रूर है, लेकिन उन हालात को काबू करने के लिए यह आदेश देना ज़रूरी थी। मुलायम के इन्हीं बयानों का हवाला देते हुए राणा संग्राम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में FIR दर्ज कराने की याचिका दाखिल की थी।
संग्राम की याचिका में पूछा गया कि क्या कोई मुख्यमंत्री भीड़ पर गोली चलवाने का आदेश दे सकता है और यदि हां, तो किस कानूनी प्रावधान के तहत। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने में देरी की गई।
-एजेंसियां

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