मजबूरी में कौरवों के साथ खड़े हैं मुलायम: शिवपाल यादव

मेरठ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच तल्खी कम होने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के साथ निकले पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव अब कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं हैं। वह अब अपने भतीजे अखिलेश यादव पर किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतना चाहते हैं। शिवपाल यादव ने एक बातचीत में कई अहम सवालों के जवाब दिए।
सवाल: नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने आखिर बेटे का साथ दिया, भाई का नहीं। आगे की योजना क्या होगी?
जवाब: इस सवाल के जवाब में शिवपाल यादव ने कहा रिश्तों की मजबूरियों की बात छोड़िए। राजनीतिक में उतार-चढ़ाव वक्त के हिसाब से आते रहते हैं। नेताजी हमारे आदरणीय हैं और हमेशा रहेंगे। हम उनके आशीर्वाद से राजनीतिक नई पारी खेल रहे हैं। उनका स्नेह हमारे साथ था और हमेशा रहेगा।
सवाल: आपके इतने समर्पण के बाद भी नेताजी मोर्चे संग खड़े क्यों नहीं हो रहे हैं?
जवाब: महाभारत के भीष्म पितामाह का आशीर्वाद पांडवों के साथ था, लेकिन किसी के कारणवश कौरवों के साथ खड़े थे। इसी तरह नेताजी का आशीर्वाद हमारे यानी सेक्युलर मोर्चा (पांडवों) के साथ है, लेकिन वह किसी मजबूरी में समाजवादी पार्टी (कौरव) के साथ खड़े हैं। हम नेताजी (मुलायम सिंह यादव) को संसद में और देश के पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं।
सवाल: समाजवादी पार्टी तो पहले से ही नेताजी को मैनपुरी से चुनाव लड़ाने की बात कह चुकी हैं, फिर वह नए मोर्चे से क्यों लड़ें?
जवाब: ऐसा नहीं है। नेताजी को लेकर हमारा स्टैंड साफ हैं। यदि वह हमारे मोर्चे से लड़ते तो जिताकर भेजेंगे। समाजवादी पार्टी से भी उम्मीदवार होने पर मोर्चा उनका समर्थन करेगा। हमारा मकसद उनको राजनीति के शिखर पर पहुंचाना रहा है।
सवाल: गिले-शिकवे बुलाकर चाचा-भतीजे यानी एसपी और सेक्युलर मोर्चा एक होकर राजनीति करने में दिक्कत कहां आ रही है?
जवाब: अब बहुत देर हो चुकी है। मैंने दो साल इंतजार किया कि दिल में कोई मैल न रहे, एक होकर काम करें। पार्टी को मजबूत करें। अपमान भी सहा, लेकिन उन्हें (अखिलेश को) शायद मेरा साथ कबूल नहीं था। अब राहें जुदा हो गई हैं। एकता की गुंजाइश कतई नहीं बची। चुनावी रण में सबकी ताकत का पता चल जाएगा।
सवाल: एसपी पुरानी पार्टी है फिर सेक्युलर मोर्चा को आप किस तरह से आगे ले जाएंगे?
जवाब: सही बात है, समाजवादी पार्टी पुरानी है लेकिन हमारे खून पसीने के दम पर मजबूती हुई है। पार्टी से लिए लाठी गोली हमने खाई। फिर मेहनत करेंगे, सेक्युलर मोर्चे को मजबूत करेंगे। छोटे दलों का साथ लाएंगे। 40 छोटे दलों से फिलहाल बात हो चुकी है, जल्द राजनीति में बदलाव दिखेगा।
सवाल: सेक्युलर मोर्चे का जनाधार आखिरकार क्या है?
जवाब: दलित, मुस्लिम और पिछड़ों का जबरदस्त साथ मिल रहा है। उनको और मजबूती से एकजुट करेंगे। इसके लिए गांधीवादी, लोहियावादी और चौधरी चरण सिंह वादियों को एक मंच पर लाकर आगे बढ़ेंगे। एसपी समेत दूसरे दलों के उपेक्षित नेताओं और वर्करों को जोड़कर कारवां बढ़ाया जाएगा। सहारनपुर में मुझे मुख्य अतिथि बनाकर गुरुवार को दलित समाज की तरफ से की गई रैली इसी रणनीति का एक हिस्सा है।
सवाल: सेक्युलर मोर्चे का आगे और क्या प्लान है?
जवाब: संगठन खड़ा कर रहे हैं। प्रदेश इकाई तय है। मंडल प्रभारी घोषित कर दिए गए हैं। मैं खुद मंडलीय सम्मेलन जल्द शुरू करूंगा। जिला सम्मेलन भी होंगे। विधानसभा क्षेत्र सम्मेलन शुरू हो गए हैं। सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। बूथ कमेटियों का गठन कर वोटर बनवाने का काम कार्यकर्ता करेंगे।
-एजेंसियां

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