MSP यथावत रहेगा और इसे लगातार बढ़ाया जाएगा: राजनाथ सिंह

नई दिल्‍ली। कृषि विधेयकों के पारित होने के बाद जारी विवादों के बीच केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य MSP यथावत रहेगा और आने वाले वर्षों में इसे लगातार बढ़ाया जाएगा।
किसान बिल को आत्मनिर्भर कृषि का आधार बताया
किसान बिल के राज्यसभा में पास होने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर कृषि की नींव बताया था। राजनाथ सिंह ने कहा था कि संसद में दोनों विधेयकों का पारित होना वास्तव में भारतीय कृषि के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। भारत की कृषि की वास्तविक क्षमता को सामने लाने के लिए उनकी दृष्टि के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं। राजनाथ सिंह ने कहा कि कृषि विधेयकों के पारित होने के बाद भारत ने आत्मानिर्भर कृषि के लिए मजबूत नींव रखी है। यह पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार के अंतहीन समर्पण और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।
ज्ञात हो कि संसद से पारित कृषि विधेयकों का कुछ राज्यों में इसलिए विरोध हो रहा है क्योंकि उन्हें डर है कि एमएसपी प्रणाली खत्म हो जाएगी। दूसरी तरफ, सरकार ने भरोसा दिया है कि एमएसपी प्रणाली खत्म नहीं होने वाली है। विरोध करने वाले एमएसपी प्रणाली को कानूनी रूप देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी अब तक किसी कानून का हिस्सा रहा ही नहीं है।
विधेयक में प्रावधान नहीं
कृषि उत्पाद व्यापार व वाणिज्य विधेयक-2020 में एमएसपी का प्रावधान नहीं है। विरोध करने वाले किसान व राजनीतिक दल एमएसपी को विधेयक में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
जानें क्‍या है एमएसपी का आधार
केंद्र सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर फिलहाल 23 प्रकार की जिंसों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) तय करती है। इनमें सात अनाज, सात तिलहन, पांच दलहन व चार नकदी फसलें शामिल हैं। यह भी जान लें कि सीएसीपी संसद से मान्यता प्राप्त वैधानिक निकाय नहीं है। वर्ष 1965 में हरित क्रांति के समय किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए एमएसपी की घोषणा की गई थी। हालांकि, वर्ष 1966-67 में गेहूं की खरीद के साथ यह पहली बार प्रभाव में आया।
-एजेंसियां

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