Mr. ओबामा…This is not fair, यह आपने सही नहीं किया

Mr. ओबामा…This is not fair…क्‍या हमारे देश ने कभी आपके ‘भूरे काका’ पर पिछले चार सालों में कोई ऐसी टिप्‍पणी की है जैसी आपने हमारी ‘भूरी काकी’ के व्‍हाइट से Son के बारे में कर दी। वो भी किताब के अंदर, बाकायदा लिखा-पढ़ी में।
आपने इतना भी नहीं सोचा कि जिस तरह ‘भूरे काका’ के रहते आपकी पार्टी विपक्ष में थी, ठीक उसी तरह हमारे यहां भी ‘भूरी काकी’ की पार्टी विपक्ष में है।
विपक्षी पार्टी की एक गरिमा होती है, परंपरा होती है, कोई मर्यादा होती है परंतु आपने तो सब-कुछ ताक पर रखकर उनकी बुद्धिमत्ता का जनाजा निकाल दिया।
आपके यहां ‘भूरे काका’ भी तो चार साल लगातार अनाप-शनाप कुछ भी बकते रहे हैं, अनर्गल प्रलाप करते रहे हैं। आपके ही यहां लोगों ने उन्‍हें झूठों का सरताज तक बता डाला परंतु हमारे किसी नेता ने कभी उनकी शान में गुस्ताख़ी नहीं की।
आपने इतना तक नहीं सोचा कि किसी पचास साल के युवा नेता की बुद्धि पर सवाल खड़े करने का मतलब होता है, उसके करियर को मिट्टी में मिला देने की कोशिश करना।
चूंकि आपको सारी दुनिया बहुत सीरियसली लेती है इसलिए आपकी किताब ‘A Promised Land’ के उद्धरण भी उतनी की सीरियसली लिए गए लिहाजा एक अच्‍छा खासा ‘ग्‍लोबल’ नेता आपने ‘लोकल’ बनाकर रख दिया, वह भी बुद्धि के पैमाने पर।
आपको तो शायद इल्‍म भी नहीं होगा कि हमारे यहां चारण-भाट परंपरा के वो अनुयायी जो अब तक उन्‍हें विद्योत्तमा के शास्‍त्रार्थ से परिमार्जित कालिदास समझकर उनकी विरुदावली में लगे रहते थे, वो भी कन्‍फ्यूज हो गए हैं।
उन्‍हें शक हो गया है कि कहीं आपने कोई ऐसा कड़वा सच तो नहीं लिख दिया जिसे अब तक वो स्‍वीकार करने को तैयार नहीं थे।
हालांकि भारत का सत्ताधारी दल यदा-कदा उनकी कथित ‘तीक्ष्‍ण बुद्धि’ पर गहरे सवालिया निशान लगाता रहा है और भरपूर चुनावी चकल्‍लस के बावजूद नतीजों को देखकर यह बताता रहा है कि वो यथावत वहीं टिके हैं जहां से ‘मम्‍मा’ की उंगली पकड़कर खड़े हुए थे परंतु उनकी पार्टी के नेताओं ने कभी नहीं माना कि वो अब भी उतने ही कालिदास हैं जितने कुल्‍हाड़ी लेकर उसी पेड़ की डाली काटने वाला कालिदास था, जिस पर वह बैठा भी था।
बहरहाल, अब उनकी पार्टी के नेता इस असमंजस में हैं कि हो न हो आप भी ‘गोदी भक्‍त’ हों और आपने अपनी किताब उन्‍हीं के इशारे पर लिखी हो।
माना कि आपने अपनी किताब में भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री को भी टारगेट करते हुए उन्‍हें बिना जनाधार वाला नेता और ‘भूरी काकी’ का ‘पपेट’ बताया है लेकिन चारण-भाटों को उससे उतनी आपत्ति नहीं है जितनी भविष्‍य के सरताज को ‘नर्वस’ और ‘अयोग्‍य’ बताने पर है।
इसीलिए तो वो आपकी किताब के मार्केट में आने से पहले ही आपके ऊपर राशन-पानी लेकर चढ़ बैठे और पूछने लगे कि बमुश्‍किल एक-दो मुलाकातों में कोई किसी को उसकी अक्‍ल का सर्टिफिकेट कैसे पकड़ा सकता है।
चारण-भाटों की मानें तो Mr. ओबामा… चलते-फिरते एक-आध मुलाकातों से कोई किसी की बुद्धि का अनुमान कैसे लगा सकता है क्‍योंकि वह लोग तो ढाई दशक में यह काम नहीं कर पाए और आज तक यही समझ रहे हैं कि उनकी हर तकरीर में महाकवि कालिदास की रचनाओं रघुवंश, कुमारसंभव, मेघदूत और ऋतुसंहार सरीखा गूढ़ ज्ञान छिपा है जिसे समझने के लिए तीन पीढ़ियों की चाटुकारिता का अनुभव होना लाज़िमी है। ओबामा रहे होंगे अमेरिका जैसे सर्वशक्‍तिमान देश के दो बार राष्‍ट्रपति, लेकिन उन्‍हें क्‍या पता कि भारत वो देश है जहां के लोगों ने सुनियोजित तरीके से महामूर्ख कालिदास से विद्योत्तमा जैसी विदुषी को एक बार तो पराजित करवा ही दिया था।
यहां कुछ भी संभव है। आप कुछ भी लिख दें, दुनिया कुछ भी समझे परंतु चारण-भाटों की बिरादरी अपनी अक्‍ल पर कभी शक नहीं करती। वो आज भी अपनी परंपरा पर कायम है और टीवी पर होने वाली डिबेट्स में यह साबित करने पर तुली है कि दो बार का राष्‍ट्रपति दिग्‍भ्रमित हो सकता है, कन्‍फ्यूज भी हो सकता है परंतु हमारी ‘भूरी काकी’ की कोख से पैदा हुआ सफेद रक्‍त कोशिकाओं से परिपूर्ण सपूत ‘नर्वस’ और ‘अयोग्‍य’ नहीं हो सकता।
उनके गले नहीं उतर रही यह बात कि जिस ‘नस्‍ल’ ने देश को न सिर्फ कई-कई प्रधानमंत्री दिए, बल्‍कि अपनी कठपुतलियों तक को प्रधानमंत्री एवं चमचों को राष्‍ट्रपति बनवा दिया, उस नस्‍ल में कोई कैसे इतना ‘पप्‍पू’ हो सकता है कि सात समंदर पार से आया हुआ एक व्‍यक्‍ति भी एक झटके में उसे पहचान ले और अपनी किताब के जरिए उसे मूर्ख शिरोमणि का प्रमाण पत्र देकर इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए उसकी मूर्खता को दर्ज करवा दे।
नहीं मिस्‍टर ओबामा, यह आपने सही नहीं किया।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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