रिजर्व बैंक की MPC ने नीतिगत दरों में नहीं किया कोई बदलाव

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति MPC ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने जीडीपी ग्रोथ की अनुमानित दर का अपना पिछला अनुमान 6.7% ही कायम रखा। रिजर्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2018 में देश की जीडीपी 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। रिजर्व बैंक ने दूसरी छमाही में में महंगाई दर 4.3 से 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
बहरहाल, नई क्रेडिट पॉलिसी आने के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट आई है। निफ्टी बैंक 200 से ज्यादा पॉइंट्स टूट गए। वहीं, सेंसेक्स में भी 196 पॉइंट्स की गिरावट आ गई।
रेपो रेट 6 प्रतिशत पर बरकरार
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने ताजा द्वीमासिक समीक्षा में मुख्य नीतिगत दर रेपो 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा। वहीं, रिवर्स रेपो रेट 5.75 प्रतिशत जबकि सीआरआर 4 प्रतिशत और एसएलआर 19.5% पर कायम रखा गया है। समिति में शामिल प्रोफेसर रवींद्र ढोलकिया ने इस बार भी 0.25 प्रतिशत की कटौती की वकालत की लेकिन बाकी 5 सदस्यों ने उनकी राय पर सहमति व्यक्ति नहीं की।
महंगाई को काबू में रखने पर नजर: RBI
रिजर्व बैंक की ओर से जारी मॉनीटरी पॉलिसी स्टेटमेंट मे कहा गया है कि महंगाई को 4 प्रतिशत के आसपास में रखने और विकास को बढ़ावा देने के लक्ष्य के मद्देनजर नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया गया है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने क्या कहा?
पांच तिमाहियों के बाद पहली बार अनुमानित विकास दर में सुधार।
दूसरी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन बढ़ने से अनुमानित विकास दर सुधरा।
फूड और क्रूड की कीमतें बढ़ने पर आरबीआई की नजर।
निकट भविष्य में खुदरा बाजार में दाम घटने की उम्मीद नहीं है।
ग्लोबल मार्केट्स से अच्छे संकेत मिल रहे हैं।
बैंक रीकैपिटलाइजेशन प्लान एक सुधार के साथ-साथ रीकैपिटलाइजेशन पैकेज भी है।
रीकैपिटलाइजेशन से सरकारी बैंकों की स्थिति सुधरेगी।
कौन हैं मौद्रिक नीति समिति में?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल
डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य
आरबीआई के ऑफिसर माइकल पात्रा
भारतीय सांख्यिकी संस्थान के चेतन घाटे
दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की प्रफेसर पम्मी दुआ
आईआईएम अहमदाबाद के डॉ. रवींद्र एच. ढोलकिया
गौरतलब है कि पिछली बार अगस्त महीने की मौद्रिक नीति की समीक्षा में रिजर्व बैंक ने रीपो रेट और रिवर्स रीपो रेट में 0.25% कटौती का ऐलान किया था। उसके बाद 4 अक्टूबर की नीतिगत समीक्षा में कोई बदलाव नहीं किए गए थे।
-एजेंसी