Netflix पर आई फिल्म मोगली, रुडयार्ड किपलिंग के लेखन का एक और अवतार

नई दिल्‍ली। Netflix पर रिलीज हुई फिल्म मोगली- लीजेंड ऑफ द जंगल की रेटिंग 13+ है यानी ये ऐसा मोगली है जो बड़ों को ज्यादा समझ आता है। मानसिक स्थितियों के भीतर ही भीतर चलती इस लड़ाई को एंडी सरकिस ने बहुत ही दमदार तरीके से बतौर डायरेक्टर अपनी इस दूसरी फिल्म में पेश किया है। Netflix पर मोगली शुक्रवार को रिलीज हुई।

मोगली दशकों से बच्चों का पसंदीदा किरदार रहा है। बच्चों से लेकर बड़े तक उसके कई अवतार देख चुके हैं, पर ये वाला बिल्कुल अलग है।

मुंबई में पैदा हुए जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग ताउम्र इस बात से जूझते रहे कि आखिर वह किस समाज का हिस्सा हैं। भारत में रहे तो लगता रहा कि वह तो अंग्रेज है और यहां की मिट्टी से नहीं जुड़ सकते। लंदन जाकर बसे तो महसूस करते रहे कि भारत उनकी रग-रग में बस चुका है। एक लेखक के भीतर का ये अंतर्द्वंद मोगली में साफ देखा जा सकता है। ये मोगली बस जंगल में अपने मां-बाप से बिछड़ा ऐसा बच्चा नहीं है जिसे भेडियों की एक टोली पाल लेती है। ये मोगली इस बात से परेशान है कि आखिर वह है क्या? वह भेडियों के साथ रहता है पर भेड़िया नहीं है। वह इंसानों के बीच रहकर भी देखता है लेकिन उसे लगता है कि ये उसका संसार नहीं है।

फिल्म को हिंदी के अलावा दक्षिण की भाषाओं में भी डब किया गया है। हिंदी में शेर खान की आवाज जैकी श्रॉफ की है। माधुरी दीक्षित ने भेड़ियों की मां निशा को आवाज दी है। बल्लू को अनिल कपूर और बघीरा को अभिषेक बच्चन की आवाज का साथ मिला है। करीना कपूर ने मादा अजगर का के किरदार को आवाज दी है, जिसकी कमेंट्री से फिल्म शुरू होती है और खत्म होती है।

डिजनी की जंगल बुक से ये मोगली बिल्कुल अलग है। ये क्यूट नहीं है। ये जीवन का संघर्ष करना जानता है। अपने ही गुरु बघीरा पर शक करता है और शेर खान से भिड़ने के लिए नए दोस्त भी तलाश लेता है। फिल्म में डिजनी की फिल्मों से अलग एक नया किरदार दिखता है- भूत। यह एक सफेद पिल्ला है और एक तरह से मोगली की आत्मा को आवाज देता है। वह संघर्ष का साथी है और मोगली के किरदार का टर्निंग प्वाइंट भी। इंसान और जानवर के संघर्ष को मोगली लीजेंड ऑफ द जंगल आज के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करती है। फिल्म में बस्ती की गायों को मारे जाने का जिक्र है। गाय को खान मारता है। ये स्टेटमेंट भी बहुत कुछ कहता है। फिल्म लाइव एक्शन एनीमेशन फिल्म है। ऐसी फिल्म जिसमें जानवरों के किरदारों के चेहरों के भाव पकड़ने के लिए इंसानों पर मोशन कैप्चर का इस्तेमाल होता है और बाद में असली अभिनेताओं को इस मोशन पिक्चर से बने ग्राफिक्स के साथ जोड़ दिया जाता है।

फिल्म के कुछ दृश्य बहुत ही प्रभावशाली बन पड़े हैं। मोगली और भूत के दृश्य तो बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करते ही हैं। डर का सामना करने वाले दृश्यों में तालाब के पानी के नीचे सांस रोककर छिपे मोगली का ऊपर पानी पीते शेर खान को देख सांसें रोके रहना वाला दृश्य भी बहुत प्रभावशाली बन पड़ा है। फिल्म को भारतीय भूगोल के करीब रखने के लिए इसकी शूटिंग दक्षिण अफ्रीका के जंगलों में की गई है। मोगली बने रोहन चांद का अभिनय फिल्म का सबसे बड़ा विनिंग प्वाइंट है। कैली क्लोव्स की पटकथा लिखने का अंदाज निराला है जबकि नितिन साहनी का संगीत औसत है।
-एजेंसी

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