Movie Review: मनोरंजक तरीके से संदेश देती है ‘लल्लूराम’

मुंबई। इस हफ्ते लेखक-निर्देशक अमोल द्विवेदी की Movie ‘लल्लूराम’ मुम्बई महाराष्ट्र सौराष्ट्र और गुजरात में रिलीज हुई है। इस Movie को यूपी, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में रिलीज़ किया जा चुका है जिसका अच्छा रेस्पोंस मिला था। एंडी एन सैंडी फिल्म इंटरनेशनल एंड एकेडमी और एल पी जी इन्टरटेनमेन्ट के बैनर तले बनी फिल्म ‘लल्लूराम’ में अदाकारी की बात करें तो मुख्य खलनायक के रूप में मोहन जोशी और विधायक के किरदार में अदाकार दीपक शिर्के ने इसमें बेहतरीन अभिनय किया है। इस मूवी में न्यूटन लुक्का ने लल्लूराम के टाइटल रोल में अच्छी अदाकारी की है। रूचि तिवारी और भाग्यश्री चौबीसा की अदाकारी भी याद रह जाती है।

फ़िल्म के लेखक/निर्देशक अमोल द्विवेदी का काम सराहनीय है, उन्होंने तमाम कलाकरों से अच्छी अदाकारी करवा ली है और बड़े मनोरंजक ढंग से ही फ़िल्म के ज़रिए कई सन्देश देने की भी कोशिश की है। खास बात ये है कि पूरी फ़िल्म में वूमैन पॉवर दिखाने की कोशिश की गई है। इस फिल्म के जहाँ कई प्लस पॉइंट्स हैं वहीँ इसके कई माइनस पॉइंट्स भी हैं। फिल्म की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी, कई दृश्य बहुत लम्बे हो जाते हैं जहाँ एडिटर को अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए थी। फिल्म की अवधि काफी ज्यादा है ऐसा लगता है कि इसको कुछ और कम किया जा सकता था।

फिल्म में आइटम सांग भी अचानक आ जाता है, हालाँकि उससे ठीक पहले एक सेड और इमोशनल सीन हुआ था और उसके तुरंत बाद इस तरह का आइटम गीत फिल्म में लाने का तुक समझ में नहीं आता? फिल्म के एक्शन दृश्यों पर भी और काम करने की ज़रूरत थी, कई एक्शन सीन रीयलिस्टिक नहीं लगते उनमे बहुत ज्यादा बनावटीपन साफ़ दिखता है। न्यूटन लुक्का के लुक और मेकअप पर जैसे ध्यान से काम नहीं हुआ है, उनका मेकअप और विग साफ़ तौर पर पता चल जाती है। देवर भाभी के रिश्ते पर शक करना और दहेज प्रथा जैसे कई मामलों को छूती यह फ़िल्म एक बार देखने लायक है।

-अनिल बेदाग

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