पापों को धोने वाली जीवनदायिनी है मां गंगा: मृदुलकांत शास्त्री

आगरा। गंगा जैसे ही स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने लगीं तो गंगा का गर्व दूर करते हुए भगवान शिव ने उन्हें जटाओं में कैद कर लिया था, वह छटपटाने लगी और शिव से माफी मांगी। तब शिव ने उन्हें अपनी जटा से एक छोटे से पोखर पर छोड़ दिया। जहां से गंगा सात धाराओं में प्रवाहित हुईं। पापों को धोने वाली जीवनदायिनी मां गंगा का ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन धरती पर अवतरण हुआ था ये कहना था कमला नगर स्थित महाराजा अग्रसेन सेवा सदन पर एक दिवसीय माँ गंगा अवतरण कथा में कथावाचक आचार्य मृदुलकांत शास्त्री का। स्थापना दिवस की शुरुआत चेयरमैन हरिओम अग्रवाल, अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल, महासचिव अनुरंजन सिंघल और कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने अग्रसेन जी की मूर्ति के समक्ष माल्यार्पण व दीप प्रवज्जलित कर किया। महाराजा अग्रसेन सेवा सदन कमला नगर के 31वें स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह सुन्दरकाण्ड पाठ, हवन के साथ ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया।

व्यासपीठ से कथावाचक पं० मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति दिलाने के लिए गंगा को धरती पर लाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने मां गंगा की घोर तपस्या शुरू की। गंगा ने प्रकट होकर कहा कि यदि वे सीधे धरती पर अवतरित होंगी तो इससे समस्त भूलोक पर तबाही मच जाएगी। राजा ने भगवान शंकर की तपस्या करके उनसे मदद मांगी। तब महादेव ने मां गंगा से कहा कि वे उनकी जटाओं से होकर गुजरें, इससे धरती को नुकसान नहीं होगा। इसके बाद भागीरथ मां गंगा को गंगोत्री से गंगासागर तक लेकर गए और इस तरह पूर्वजो को आत्मा को शांति मिली।

कथा स्थल पर वही केसी गंगा लहर धीरे-धीरे, हरिद्वार में केसी शोभा माता लहर आयी धीरे-धीरे… शिव शंकर तेरी जटा से बहती है गंगा धारा…, हर हर गंगे की अवतरण कथा है ये भक्तों… आदि भजनों पर श्रोताओ को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर संजय बंसल, अनूप गोयल, अतुल बंसल, राजेश अग्रवाल, कौशल किशोर सिंघल, रवि अग्रवाल, निखिल गर्ग आदि मौजूद रहे।

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