पंजशीर में पाकिस्‍तान के “पाप” को युद्ध अपराध मान रहे हैं अधिकांश लोग, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने तक की मांग उठी

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ मोर्चा लेने वाले ‘पंजशीर के शेरों’ को कुचलने के लिए अब पाकिस्तान सामने आ गया है। एक तरफ उसकी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के प्रमुख फैज हामिद काबुल दौरे पर हैं तो दूसरी तरफ उसकी स्पेशल बटालियन, तालिबान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) के योद्धाओं पर कहर बरपा रही है। इससे दुनियाभर में पाकिस्तान के खिलाफ रोष पैदा हो गया है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने तक की मांग उठ रही है। ‘पंजशीर में पाकिस्तान के पाप’ को लोग युद्ध अपराध मान रहे हैं।
पाकिस्तान ने पंजशीर में मचाई तबाही!
खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तानी स्पेशल फोर्स ने पंजशीर में जबर्दस्त बमबारी की है। कुछ हजार योद्धाओं के दम पर चल रहा तालिबान विरोधी अभियान आखिर भारी बमबारी के आगे कितना टिक सकता है?
कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह कहीं छिप गए हैं। उन्होंने अपने अंगरक्षकों से कहा है कि अगर तालिबान या पाकिस्तानी फौज उन तक पहुंच जाए तो अंतिम क्षणों में उन्हें दो गोलियां दाग दें। कहा जा रहा है कि तालिबान और पाकिस्तानी सेना ने रविवार रात को पंजशीर घाटी में जमकर खूनी खेल खेला है। इन हमलों में एनआरएफ के अगुआ अहमद मसूद को बड़ा झटका लगा है। उनके प्रवक्‍ता फहीम दश्‍ती और शीर्ष कमांडर जनरल साहिब अब्‍दुल वदूद झोर मारे गए।
हैरतअंगेज है दुनिया की चुप्पी
पाकिस्तान-तालिबान के गठजोड़ को भले ही विरोध की आवाज दबाने में तात्कालिक सफलता मिल गई हो लेकिन यह सवाल बना रहेगा कि पंजशीर के जिन ‘शेरों’ को सोवियत यूनियन भी नहीं झुका पाया था, उन्हें पाकिस्तान भला कितनी देर तक चुप रख पाएगा। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एनआरएफ पर पाकिस्तान की बमबारी संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं और पूरी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के सामने गंभीर सवाल है। अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह की गुहार के बावजूद किसी ने पाकिस्तान को चेतावनी तक नहीं दी, यह गंभीर चिंता का विषय है। एनआरएफ के खिलाफ तालिबान की कार्रवाई तो समझ में आती है लेकिन जिस तरह पाकिस्तान ने दूसरे देश की जमीं पर अपनी सेना भेजी है, वो अंतर्राष्ट्रीय नियमों का घोर उल्लंघन है।
पाकिस्तान पर बरस अहमद मसूद
बहरहाल, पाकिस्तानी फौज और तालिबानी आतंकियों की बर्रबरता ने एनआरएफ को फिलहाल अपनी रणनीति बदलने को मजबूर जरूर कर दिया है लेकिन उसके अगुवा अहमद मसूद अब भी खम ठोंक रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘हमारे साथ तालिबान नहीं बल्कि पाकिस्तान आर्मी लड़ रही है और आईएसआई उन्हें लीड कर रही है। तालिबान में इतनी कुव्वत नहीं कि हमसे मुकाबला कर सके लेकिन पाकिस्तान आर्मी उनकी मदद कर रही है।’ उन्होंने #SanctionPakistan के साथ यह बात कही है।
विश्व बिरादरी से साथ देने की अपील
अफगान एयर फोर्स के पूर्व पायलट रहमान रहमानी का दावा है कि पंजशीर में जिन युवाओं ने हथियार उठाए हैं, उनमें 75% कॉलेज ग्रेजुएट हैं, 30% के पास मास्टर डिग्री है, 15% महिलाएं इस लड़ाई में भाग ले रही हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘हमें पता है कि हम किसके लिए लड़ रहे हैं। हम अफगानिस्तान और दुनिया के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं जहां किसी आतंकवादी का नामो-निशान न रहे।’ उन्होंने भी दुनियाभर से समर्थन की अपील की है।
तालिबान के समर्थन में पश्चिमी मीडिया?
हैरत की बात यह है कि पश्चिमी देशों के ज्यादातर मीडिया संस्थान तालिबान-पाकिस्तान के गठजोड़ का ही पक्ष लेते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई उदाहरण देखे जा सकते हैं जहां तालिबान समर्थकों को अपना प्रॉपेगैंडा फैलाने के लिए मीडिया का मंच मुहैया कराया जा रहा है। महिला अधिकारों को लेकर हमेशा मुखर रहने वाला पश्चिमी मीडिया आज उन लोगों को मंच दे रहा है जो कहते हैं कि अफगानिस्तान में महिलाओं का अधिकार सबसे बड़ा मुद्दा नहीं है।
पाकिस्तान को चेतावनी
अफगानिस्तान के पत्रकार हबीब खान ने लिखा, ‘करीब-करीब तीन दशक बाद पाकिस्तान ने फिर वही इतिहास दुहराया है लेकिन याद रहे अफगानिस्तान आक्रमणकारियों के अनुकूल कभी नहीं रहा। पाकिस्तान और उसके प्रॉक्सी ने हमारे देश में जो किया है, उसके लिए उन्हें पछताना पड़ेगा। अफगानिस्तान फिर आजाद होगा और तब उनका खात्मा हो जाएगा।’
तालिबान का दावा, एनआरएफ का जवाब
बहरहाल, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद्दीन ने एक बयान जारी करके कहा है कि अपने पंजशीर में अपने आखिरी दुश्मनों पर हमने जीत दर्ज कर ली है। अल्लाह की मदद और अपने देश के लोगों के समर्थन से हमने पंजशीर घाटी पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है और अब वह इस्लामिक अमीरात के अधीन हो गया है। हालांकि, नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ने पंजशीर पर तालिबानी कब्जे के दावे को खारिज किया। उसने कहा कि हर रणनीतिक जगह पर उसकी मौजूदगी है। एनआरएफ ने कहा, ‘न्याय और आजादी मिलने तक जंग जारी रहेगी।’
क्यों चुप है पूरी दुनिया?
दरअसल, अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार को हथियारों के दम पर बेदखल करके वहां की सत्ता पर कठमुल्लों और आतंकवादियों को स्थापित करने के पीछे पाकिस्तान की मंशा से पूरी दुनिया वाकिफ है। पाकिस्तान पूरी दुनिया में आतंकवाद का निर्यात करता है। दुनियाभर में होने वाली आतंकी घटनाओं का संबंध किसी-न-किसी रूप में पाकिस्तान से जुड़ता ही जुड़ता है। फिर भी दुनिया चुप है, यह किसी अजूबे से कम नहीं।
-एजेंसियां

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