ऑनलाइन Pharmacy कंपनियों पर रोक से कारोबार को 1500 करोड़ से ज्यादा की चपत

नई दिल्‍ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑनलाइन Pharmacy कंपनियों पर रोक के आदेश से जहां नेटमेड्स और 1 एमजी जैसी Pharmacy कंपनियों को झटका लगा है, वहीं लाखों खुदरा दुकानदारों को राहत मिली है।

देश भर में पांच बड़ी कंपनियां है जो कि ऑनलाइन दवा का कारोबार करती हैं। हालांकि इन सभी कंपनियों ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से किसी तरह का लाइसेंस नहीं ले रखा है। अब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इन कंपनियों के कारोबार करने से रोक लगा देने पर 1500 करोड़ से ज्यादा की चपत लगने की संभावना है।
इन कंपनियों में हो रहा था बड़ा निवेश

पिछले पांच सालों में इन कंपनियों का कारोबार काफी तेजी से बढ़ा था। इससे इन सभी कंपनियों में काफी निवेश हो रहा था। मेडलाइफ, 1 एमजी, फॉर्मईजी, नेटमेड्स, मिरा और अपोलो फॉर्मेसी देश की पांच बड़ी ऑनलाइन दवा कंपनियां हैं।

नेटमेड्स के सीईओ प्रदीप दाड़ा के अनुसार 2016-17 और 2017-18 में कंपनी की बिक्री में तीन गुणा से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला। कंपनी के पास फिलहाल 2 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जिसमें से एक करोड़ लोग हर महीने दवाइयों का ऑर्डर करते हैं।

वहीं बंगलूरू की कंपनी मिरा के फाउंडर व सीईओ फैजान अजीज के मुताबिक उनकी वेबसाइट और ऐप पर रोजाना 7 हजार से अधिक ऑर्डर होते हैं। फार्मईजी की बिक्री में 300 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है

इसलिए हैं लोगों की पसंद

ऑनलाइन फॉर्मेसी कंपनियों का कारोबार इसलिए बढ़ गया, क्योंकि यहां पर लोगों 30 फीसदी से अधिक का डिस्काउंट मिलता है। इतना डिस्काउंट दवा की दुकानों पर नहीं मिलता है। दवा की दुकान पर लोगों को जीएसटी लागू होने से पहले अच्छा डिस्काउंट मिलता था, लेकिन जीएसटी में आने के बाद वो केवल 5 से 10 फीसदी का डिस्काउंट देते हैं।

हालांकि छूट का पैमाना भी अलग-अलग दवाइयों के लिए है। जबकि ऑनलाइन कंपनियों पर कुल बिल पर 30 फीसदी की छूट दी जाती है। लेकिन यहां पर ग्राहकों को कुछ तय राशि तक की दवा खरीदनी पड़ती हैं।

कंपनियों को हुआ है नुकसान

हालांकि इन सभी कंपनियों को पिछले दो सालों में करीब 40 से लेकर के 70 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन कंपनियों को दवाइयों की घर तक डिलिवरी करने के लिए अच्छा खासा पैसा सप्लाई चेन को मजबूत करने में खर्च करना पड़ा है।

25 फीसदी नकली दवाइयों की बिक्री

फिक्की की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 25 फीसदी से ज्यादा दवाइयां नकली बिकती हैं। इस पर फिलहाल किसी तरह की रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से काफी कड़े कानून नकली दवा की बिक्री पर रोक लगाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इनका असर न के बराबर है।

स्वास्थ्य मंत्रालय लेकर आया था ड्रॉफ्ट नियम

ऑनलाइन दवा कारोबार को नियमित करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सितंबर में नियमों को लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया था। इन नियमों के मुताबिक कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 50 हजार रुपये देने होंगे और आईटी एक्ट 2000 के कानून का पालन भी करना होगा।

साथ ही मरीज की सभी जानकारी को गोपनीय रखना होगा। केवल राज्य अथवा केंद्र सरकार को इसकी जानकारी मांगने पर साझा की जा सकती है। साथ ही इन कंपनियों को सभी बिल का भी रिकॉर्ड रखना होगा। हालांकि इन नियमों को कानूनी अमली जामा अभी तक नहीं पहनाया गया है।

 

-एजेंसी

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