Bollywood फिल्‍में रिलीज न होने से पाकिस्‍तान को ज्‍यादा नुकसान

मुंबई। Bollywood के कई नामी फिल्‍म निर्माताओं द्वारा पाकिस्‍तान में अपनी फिल्में रिलीज न करने का ज्यादा घाटा पाकिस्तान को झेलना पड़ेगा। दरअसल, पाकिस्तान में Bollywood फिल्मों की पॉप्युलैरिटी बहुत ज्यादा है। यहां तक कि वहां के बिजनेस में लगभग 70-80 प्रतिशत तक का योगदान Bollywood फिल्मों का ही होता है।
एक आंकड़े के अनुसार, जब 2016 में पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी, तब वहां पर थिएटर जाने वालों की संख्या में 60 प्रतिशत तक की कमी आ गई थी। पाकिस्तान में प्रति वर्ष बेहद कम फिल्में बनती हैं और ऐसे में वहां के थिएटर मालिकों को कई बार Bollywood फिल्मों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
गौरतलब है कि पुलवामा अटैक के विरोध में कई भारतीय फिल्म निर्माताओं ने अपनी फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज करने से मना कर दिया है। सबसे पहले ‘टोटल धमाल’ की टीम ने यह फैसला लिया था। इसके बाद ‘लुका छुपी’, ‘अर्जुन पटियाला’, ‘मेड इन चाइना’ और ‘सैटेलाइट शंकर’ की टीम ने भी यह फैसला लिया। अब शाहिद कपूर स्टारर ‘कबीर सिंह’ और सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस तले बनने वाली फिल्म ‘नोटबुक’ की टीम ने भी फिल्म को वहां पर रिलीज न करने का फैसला लिया है।
फिल्म एक देश में नहीं रिलीज करने का नुकसान फिल्ममेकर्स को तो होगा ही, लेकिन वह इसके लिए तैयार हैं। इस बारे में ‘टोटल धमाल’ में काम कर रहे अजय देवगन कहते हैं, ‘फाइनैंशल लॉस तो होता है, लेकिन इस समय हम फाइनैंशल लॉस के बारे में नहीं सोच रहे। हम बॉर्डर पर जाकर लड़ तो नहीं सकते लेकिन जो सीमा पर हमारी रक्षा कर रहे हैं, उन्हें सपोर्ट करने का यह एक तरीका होता है कि हम आपके साथ हैं।’
Bollywood फिल्मों को पाकिस्तान में न रिलीज करने से पाकिस्तान को कितना नुकसान हो सकता है? इसके जवाब में मशहूर फिल्म ऐंड ट्रेड बिजनेस ऐनालिस्ट गिरीश जौहर कहते हैं, ‘पाकिस्तानी सिनेमा में भारतीय फिल्मों का योगदान लगभग 60 से 65 प्रतिशत तक का है। अगर इंडियन फिल्में वहां दिखानी बंद कर दी जाएंगी तो शॉर्ट टाइम के लिए वहां की फिल्मों को कुछ फायदा हो सकता है लेकिन इसके नुकसान ज्यादा रहेंगे। वहां की फिल्मों को कम समय के लिए एक यह फायदा होगा कि उनकी अपनी फिल्मों को स्पेस मिल जाएगा रिलीज होने के लिए लेकिन फिल्म इंडस्ट्री को तो नुकसान होगा। मेरा अनुमान है कि यह नुकसान कम से कम 75 से 100 करोड़ रुपये तक का होगा। यह नुकसान बढ़ भी सकता है क्योंकि हमें यह नहीं पता है कि कब तक हम लोग फिल्म वहां नहीं रिलीज करेंगे लेकिन सामने कम से कम इतना आंकड़ा तो दिख रहा है।’
पायरेसी बढ़ने का खतरा
लेकिन फिल्मों को न रिलीज करने पर कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि वहां की फिल्म इंडस्ट्री इंडिपेंडेट हो जाए और फिर वहां के सिनेमा मालिक हमारी फिल्में रिलीज ही न करना चाहें? इसके जवाब में गिरीश जौहर कहते हैं, ‘ऐसा नहीं होगा क्योंकि जिस तरह हमारे लिए हॉलिवुड फिल्में हैं, उसी तरह हम उनके लिए हमारी फिल्मों की क्वॉलिटी मायने रखती है। तो वहां पर हमारी फिल्मों की पॉप्युलैरिटी इतनी ज्यादा है कि उससे हमें लंबे समय के लिए कोई फर्क पड़ेगा। आगे अगर हमारे रिश्ते बहाल हो जाएंगे तो हमारी फिल्मों के लिए यह अच्छा ही रहेगा।’ क्या इस बैन से पायरेसी को बढ़ावा नहीं मिलेगा? बकौल गिरीश, ‘हां, यह जरूर है अगर हम वहां पर सीधे तौर पर फिल्म नहीं दिखा रहे हैं, तो उसकी पायरेसी हो सकती है। उसे रोकने के लिए हमें सख्त कदम उठाने होंगे।’
म्यूजिक इंडस्ट्री को भी होगा नुकसान
सलमान खान ने फिल्म ‘नोटबुक’ से सिंगर आतिफ असलम का गाना हटा दिया है क्योंकि वह पाकिस्तानी हैं। यह भी कहा जा रहा है कि सलमान की आने वाली फिल्म ‘भारत’ में भी एक पाकिस्तानी गायक की आवाज में गाना था, जिसे हटाने का फैसला लिया गया है। ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने भी सभी पाकिस्तानी कलाकारों को बैन कर दिया है। खबरों के अनुसार एक म्यूजिक कंपनी ने भी अपने यू-ट्यूब चैनल से पाकिस्तानी सिंगर का गाना हटा लिया है। पाकिस्तान के ज्यादातर बड़े सिंगर्स को भारत में ढेर सारा काम मिलता है। चूंकि पाकिस्तान की म्यूजिक इंडस्ट्री इतनी ज्यादा विकसित नहीं है, ऐसे में दुनियाभर में उन्हें बॉलिवुड के गानों के दम पर ही पहचान मिलती है। बॉलिवुड में गाने वाले बड़े पाकिस्तानी सिंगर्स की बात करें तो आतिफ असलम एक कॉन्सर्ट में लगभग 50-70 लाख रुपये की फीस लेते हैं तो वहीं राहत फतेह अली खान को एक कॉन्सर्ट के 30-40 लाख रुपये तक मिल जाते हैं। अली जफर भी एक कॉन्सर्ट के 20-25 लाख रुपये तक लेते हैं। इन सभी कलाकारों के कई शोज भारत में होते हैं। ऐसे में जब यह शोज बंद हो जाएंगे, तो उन्हें नुकसान होना तय है।
-एजेंसियां

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