मानसून सत्र शुरू: कांग्रेस के अधीर रंजन ने चीन का मुद्दा उठाने की कोशिश की

नई दिल्‍ली। मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही सुबह 9 बजे शुरू हुई। इस साल 15 सांसदों के निधन पर शोक प्रकट करने के बाद लोकसभा स्‍पीकर ओम बिड़ला ने सदन के कामकाज के नियम बताए। उन्‍होंने सांसदों को समझाया कि कोविड के चलते कार्यवाही में क्‍या बदलाव हुए हैं। विपक्षी दलों ने प्रश्नकाल के निलंबन का विरोध किया और सरकार पर सवालों से बचने का आरोप लगाया। सरकार ने कहा कि यह असाधारण परिस्थिति है जिसमें राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए। सरकार ने प्रश्नकाल एवं गैर सरकारी कामकाज के निलंबन से जुड़ा प्रस्ताव सोमवार को लोकसभा में रखा जिसे मंजूरी प्रदान कर दी गई।
संसद शुरू होने से पहले क्‍या बोले पीएम मोदी?
मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय सेना के जवानों के पीछे पूरा देश खड़ा है, यह सदन और सदन के सभी सदस्य एक मजबूत संदेश देंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज जब हमारी सेना के वीर जवान सीमा पर डटे हुए हैं, जिस विश्वास के साथ खड़े हुए हैं, मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। यह सदन भी, सदन के सभी सदस्य एक स्वर से, एक भाव से, एक भावना से, एक संदेश देंगे कि सेना के जवानों के पीछे देश खड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय होंगे, अनेक विषयों पर चर्चा होगी और हम सबका अनुभव है कि लोकसभा में जितनी ज्यादा चर्चा होती है उतना सदन को, विषय वस्तु को और देश को भी लाभ होता है। इस बार भी उस महान परम्परा में हम सब सांसद भी वैल्यू एडिशन करेंगे ये हम सबका विश्वास है।
‘अटेंडेंस रजिस्‍टर’ के जरिए लगी हाजिरी
कोरोना काल में सांसदों के हाजिरी लगाने का तरीका बदल गया है। अब सांसदों को ‘अटेंडेंस रजिस्‍टर’ ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होगी। सोमवार को कई सांसदों ने बड़ी दिलचस्‍पी से इसका प्रोसेस समझा।
शील्‍ड के पीछे बैठे हैं सांसद
लोकसभा में सांसदों की डेस्‍क के आगे कांच की शील्‍ड लगाई गई है। इससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। अधिकतर सांसद बैठकर ही अपनी बात कख रहे हैं।
स्‍पीकर ने मांगा सांसदों का सहयोग
लोकसभा स्‍पीकर ओम बिड़ला ने सांसदों से कार्यवाही के संचालन में पूरा सहयोग मांगा। उन्‍होंने कहा, असाधारण परिस्थितियों के बीच संसद का मानसून सत्र आज से प्रारंभ हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा में डिजिटलाइजेशन बढ़ाया गया है। कई व्यवस्थाएं-प्रबंध पहली बार किए गए हैं।
अधीर ने उठाया चीन का मुद्दा तो स्‍पीकर ने रोका
लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने अचानक चीन सीमा विवाद का मुद्दा उठा दिया। उन्‍होंने चेयर के जरिए रक्षा मंत्री को संबोधित कर कहा, “कई महीनों से हिंदुस्‍तान के लोग भारी तनाव में हैं क्‍योंकि हमारे सीमा में चीन….” इतना बोलते ही स्‍पीकर ने उन्‍हें रोक दिया और कहा कि ‘इस पर बिजनेस एडवायजरी कमेटी में मीटिंग हो गई। अब चर्चा नहीं।’ इसके बाद उन्‍होंने अगले सांसद को बोलने के लिए आमंत्रित किया। अधीर ने फिर आज अखबार में छपी एक रिपोर्ट का जिक्र किया लेकिन स्‍पीकर ने कहा कि ‘संवेदनशील मुद्दे पर संवेदनशील तरीके से अपनी बात को कहना चाहिए।’
प्रश्‍नकाल खत्‍म करने पर विपक्ष का बवाल
विपक्षी सांसदों ने सरकार की तरफ से प्रश्‍नकाल खत्‍म करने की आलोचना की। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “प्रश्‍नकाल सुनहरा काल है लेकिन आप कहते हैं कि परिस्थितियों के पहले यह नहीं हो सकता। आप कार्यवाही चलाते हैं लेकिन प्रश्‍नकाल को हटा देते हैं। आप लोकतंत्र का गला घोटने की कोशिश कर रहे हैं।” सदन में केवल लिखित प्रश्‍न लिए जाएंगे। एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के मनीष तिवारी और तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्माद जोशी ने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है। वहीं रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार को घेरने के लिए शून्‍यकाल का प्रयोग किया जा सकता है।
एनसीपी ने उठाया बेरोजगारी का मुद्दा
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि देश के सबसे सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्‍यवस्‍था की स्थिति और बेरोजगारी है। उन्‍होंने कहा कि पहले दिन संसद में हमें अर्थव्‍यवस्‍था, महामारी और बेरोजगारी की चुनौतियों पर बात करनी चाहिए। उन्‍होंने कहा क‍ि केंद्र सरकार इस मोर्च पर विस्‍तार से बात नहीं कर रही है।
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने गिनाए कोरोना के आंकड़े
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कोरोना पर सदन को ताजा आंकड़े बताए। उन्‍होंने क‍हा कि कोरोना के मामले मुख्‍य रूप से महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्‍तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, असम, केरल और गुजरात में हैं। इन सभी में एक-एक लाख से ज्‍यादा मामले सामने आए हैं। हर्षवर्धन ने कहा कि भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर 3,328 मामले हैं जबकि 55 लोगों की मौत हुई है।
-एजेंसियां

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