यौन शोषण के आरोपों पर एम. जे. अकबर ने आखिरकार दे दिया इस्‍तीफा

नई दिल्ली। अनुचित व्यवहार और यौन शोषण के आरोपों से घिरे केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एम. जे. अकबर ने आखिरकार बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अकबर पर 20 महिलाओं ने अनुचित व्यहार या यौनशोषण का आरोप लगाया था। इससे पहले रविवार को अपने आधिकारिक विदेश दौरे से वतन वापसी पर अकबर ने बयान जारी कर आरोपों पर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया था। अकबर ने आरोप लगाने वाली पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में मानहानि का केस भी किया है।
प्रिया रमानी ने सबसे पहले लगाया आरोप
पत्रकार प्रिया रमानी ने एक साल पहले एक लेख लिखा था और हाल ही में उन्होंने मीटू कैंपेन में अकबर का नाम लिया। 67 वर्षीय अकबर अंग्रेजी अखबार ‘एशियन एज’ के पूर्व संपादक हैं। रमानी के बाद धीरे-धीरे और 19 अन्य महिलाएं भी अकबर के खिलाफ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप लगा चुकी हैं। आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों ने उनके साथ काम किया था। अकबर के खिलाफ खुलकर सामने आने वाली पत्रकारों में फोर्स पत्रिका की कार्यकारी संपादक गजाला वहाब, अमेरिकी पत्रकार मजली डे पय कैंप और इंग्लैंड की पत्रकार रूथ डेविड शामिल हैं।
अकबर का पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
दैनिक अखबार ‘द टेलीग्राफ’ और पत्रिका ‘संडे’ के संस्थापक संपादक रहे अकबर 1989 में राजनीति में आने से पहले मीडिया में एक बड़ी हस्ती के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और सांसद बने थे। अकबर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य अकबर जुलाई 2016 से विदेश राज्य मंत्री थे।
-एजेंसियां

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