डिलीट होने के बाद Mitro App की प्ले-स्टोर पर वापसी

नई द‍िल्ली। Mitron App को 2 महीने पहले गूगल प्ले पर लॉन्च किया गया था। इसी दौरान देश में चीन विरोधी और टिकटॉक विरोधी भावना ने जन्म लेना शुरू कर दिया था, जिसका सीधा फायदा इस ऐप को हुआ।

मित्रों एप को कंटेंट पॉलिसी उल्लंघन के कारण प्ले-स्टोर से हटाया गया था। जिस समय मित्रों एप को प्ले-स्टोर से हटाया गया था उस वक्त एप की कोई प्राइवेसी पॉलिसी भी नहीं थी लेकिन अब प्राइवेसी पॉलिसी को भी अपडेट कर दिया गया है।

Mitron App अब एक बार फिर Google Play पर उपलब्ध है। हूबहू TikTok जैसा अनुभव देने वाली इस शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म को गूगल प्ले से रीमूव कर दिया गया था। वजह थी ऐप द्वारा गूगल प्ले पॉलिसी का उल्लंघन करना। Google ने कहा था कि यह ऐप ‘spam and minimum functionality’ पॉलिसी का उल्लंघन करता है, लेकिन ऐप रीमूव करने के बाद ही खबर आई कि गूगल, इस ऐप डेवलपर्स के साथ मिलकर ऐप की समस्याओं को फिक्स करने का काम कर रही है। खबर आने के अगले ही दिन ऐप ने गूगल प्ले पर वापसी कर ली है। आपको बता दें, गूगल द्वारा हटाए जाने से पहले इस ऐप को अच्छी-खासी लोकप्रियता हासिल हुई थी, 50 लाख से भी ज्यादा लोगों ने इस ऐप को अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड किया था।

Mitron App एक बार फिर Google Play पर लिस्ट हो गया है। यह ऐप खुद को एक शॉर्ट वीडियो ऐप बताता है, जो कि बैंगलोर स्थित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। इस ऐप का यूज़र इंटरफेस काफी हद तक TikTok की तरह है।

चीन के शॉर्ट वीडियो एप टिकटॉक को कड़ी देने वाले Mitron App को अब गूगल प्ले-स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। प्ले-स्टोर पर दी गई जानकारी के मुताबिक मित्रों एप बंगलूरू का है।

इसे उनलोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने टैलेंट को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं। मित्रों एप को गूगल प्ले-स्टोर से अभी तक 50 लाख से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है। इस एप को दो जून को प्ले-स्टोर से हटा दिया गया था।

बता दें कि मित्रों एप को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यह एप मूल रूप से पाकिस्तान का है। मित्रों एप को एक पाकिस्तानी डेवलपर्स से करीब 2,500 रुपये में खरीदा गया है। मित्रों एप का असली नाम TicTic बताया गया और कहा गया कि इसे पाकिस्तान के इरफान शेख की कंपनी Qboxus ने तैयार किया था।

इरफान शेख ने इस एप के सोर्स कोड को 34 डॉलर्स यानी करीब 2,500 रुपये में किसी को बेच दिया। अब यहां समस्या को डेवलपर और पाकिस्तान से नहीं है, समस्या है प्राइवेसी और मेड इन इंडिया के नाम पर प्रचार करने की। सच तो यह है कि पाकिस्तानी टिकटिक एप में कोई बदलाव ही नहीं किया गया है। सिर्फ टिकटिक का नाम मित्रों रख दिया गया है।

– एजेंसी

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