एक नई सफलता हासिल करने की ओर बढ़ रहा है मिशन चंद्रयान-2

बेंगलुरु। भारत का स्पेस मिशन (चंद्रयान-2) सोमवार देर रात या मंगलवार तड़के एक नई सफलता हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। चंद्रयान-2 का लैंडिंग मॉड्यूल (लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान) ऑर्बिटर से 2 सितंबर को अलग हो जाएंगे। मिशन से जुड़े एक वैज्ञानिक ने बताया है कि ऑपरेशन वाले दिन ही तय किया जा सकता है कि किस वक्त इसे अंजाम देना है।
आगे-पीछे हो सकता है समय
उन्होंने बताया है कि एक अनुमानित समय तय किया जाता है, लेकिन यह कुछ घंटे आगे-पीछे हो सकता है। फिलहाल चंद्रयान-2 एक इंटिग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट है जिसमें ऑर्बिटर पर लैंडर मॉड्यूल अटैच किया गया है। पिछले तीन से इसे अलग करने के ऑपरेशन पर काम चल रहा है। मिशन कंट्रोल प्रक्रिया को फाइनल करने की तैयारी में है। लैंडर मॉड्यूल के ऑर्बिटर से अलग होने में सिर्फ एक सेकंड का समय लगेगा।
एक सेकंड में अलग होंगे ऑर्बिटर और लैंडर मॉड्यूल
30 अगस्त और 1 सितंबर को सफलतापूर्वक ऑपरेशन्स पूरे करने के बाद इंटिग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट अलग होने के लिए जरूरी कक्षा में पहुंच गया है। एक सीनियर साइंटिस्ट ने बताया है कि एक बार चंद्रयान सही कक्षा में पहुंच गया फिर कमांड दिए जाएंगे और एक सेकंड से भी कम समय में विक्रम को ऑर्बिटर से अलग कर दिया जाएगा है। इसरो चेयरमैन के सिवन ने बताया कि यह बहुत तेज होगा जैसे कोई सैटलाइट लॉन्च वीइकल से अलग होती है।
ऐसे होंगे अलग
इंटिग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट को अलग-अलग करने के लिए जरूरी कक्षा में सोमवार को स्थिर करने के बाद इसरो कमांड देगा जो ऑनबोर्ड सिस्टम अपने आप एग्जक्यूट करेगा। ऑर्बिटर के ऊपर लगे फ्यूल के एक्सटेंशन में लैंडर और रोवर रखे गए हैं। ये क्लैंप और बोल्ट से लगाए गए हैं। बेंगलुरु के ट्रैकिंग ऐंड कमांड नेटवर्क सेंटर की इसरो टेलिमेट्री के एक वैज्ञानिक ने बताया है कि मेटल की एक स्प्रिंग के दो हिस्से ऑर्बिटर और लैंडर को जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं। जिन बोल्ट से ये स्प्रिंग लगे हुए हैं, उनको काटने के बाद लैंडर को रिलीज कर दिया जाएगा।
चांद पर पहुंचने से एक कदम दूर
एक बार ये ऑपरेशन पूरा हो जाएगा तो भारत चांद पर उतरने से सिर्फ एक हफ्ता दूर रह जाएगा। बता दें कि चांद पर चंद्रयान की लैंडिंग 7 सितंबर को होना तय है। ऐसा सफलता से करने पर भारत अमेरिका, रूस, चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश हो जाएगा। इससे पहले 3 सिंतबर को बेंगलुरु में पहले विक्रम का ‘हेल्थ चेकअप’ किया जाएगा और 4 सितंबर को इसरो विक्रम को लैंडिंग मोड में करेगा। सिवन ने बताया था कि 7 सितबंर सुबह 1:55 पर लैंडर चांद पर उतरेगा और चार घंटे के बाद रोवर बाहर निकलेगा।
-एजेंसियां

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