पाकिस्तान को आईना, सेना में भर्ती हुए जम्मू-कश्मीर के 575 युवक

पासिंग आउट परेड के बाद अपनी मां के सीने पर बैज टांगता कश्‍मीरी युवक
पासिंग आउट परेड के बाद अपनी मां के सीने पर बैज टांगता कश्‍मीरी युवक

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। घाटी के मुसलमानों को उकसाने में लगा पड़ोसी मुल्क अब यह तस्वीर देखकर और भी बेचैन हो उठेगा। उसके सभी पैंतरों, फर्जी खबरों और सीमा पर किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए जम्मू-कश्मीर से 575 युवा सेना में भर्ती हुए हैं। ऐसे समय में जब पाक पीएम इमरान खान घाटी के मुसलमानों की बात कर दुनिया को भरमा रहे हैं, यह खबर पाकिस्तान को आईना दिखाती है।
आर्टिकल 370 हटने के बाद धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं। पिछले कई दिनों में लोग राज्य में लगी पाबंदियों से परेशान रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे पाबंदियों में ढील दी जाने लगी है, जिंदगियां पटरी पर दौड़ने लगी हैं।
इसी बीच घाटी के जवानों का देश के लिए अपना फर्ज निभाने को सेना में शामिल होना जारी है। इसकी बानगी जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट सेंटर की पासिंग आउट परेड में देखने को मिली।
श्रीनगर में शुक्रवार को रेजिमेंट सेंटर की पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। इसमें 575 युवा शामिल रहे, जिन्होंने सेंटर जॉइन किया है। इन्हीं में से एक हैं श्रीनगर के वसीम अहमद मीर। मीर के पिता भी सेना में थे और उनकी यूनिफॉर्म से प्रेरित होकर मीर ने सेना में शामिल होने का फैसला किया।
पासिंग आउट परेड के बाद सेना का हिस्सा बने मीर ने बताया कि वह बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि उनके पैरंट्स को भी उन पर गर्व है। मीर ने कहा, ‘हमें सेना में शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मेरे पिता भी सेना में थे, उनकी वर्दी ने मुझे सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।’
बता दें कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने पर बौखलाया पाकिस्तान अब संयुक्त राष्ट्र पर अपनी खीज उतार रहा है। हाल ही में पाक पीएम इमरान खान ने कश्मीर मसले पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि मुसलमानों पर जब भी अत्याचार होता है तो संयुक्त राष्ट्र शांत रहता है। वैश्विक समुदाय पर अपनी खीज उतारते हुए इमरान ने कहा, ‘ यदि कश्मीर में मुसलमान न होते तो पूरी दुनिया में शोर मच जाता। जिसे हम इंटरनैशनल कम्युनिटी कहते हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र कहते हैं, वे मुसलमानों पर अत्याचार की बात पर शांत रहते हैं।’
-एजेंसियां

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