मन पर नियंत्रण ही शांत जीवन का मूल मंत्र और शांति है मानवाधिकार

हर वर्ष की भांत‍ि कल 21 सितंबर को विश्व शांति दिवस मनाया जा रहा है। विश्व का कोई भी धर्म हो सभी धर्म यही सिखाते हैं की भौतिक सुख और इच्छा हो पर मन पर नियंत्रण ही शांत जीवन का मूल मंत्र है| दुनिया के किसी भी ग्रंथ में लड़ना नहीं सिखाया है| आपसी प्यार और शांति का संदेश देता है चाहे वह भगवत गीता हो बाइबल हो या कुरान हो परंतु आज आदमी की इच्छाएं अनंत है| प्रभुत्व दिखाने या पाने की लालसा जो मैं कह रहा हूं वह सही है जो मैं कर रहा हूं वही सही है। इसीलिए विश्व में ना केवल मानव बल्कि राजा तो राजा ,देश के देश एक दूसरे पर युद्ध करके अपने आप को शक्तिशाली साबित करने लगे हैं| ऐसे में धर्मों द्वारा बताई गई शांति मार्ग कहीं पीछे छूट गया है ।

सभी देशों और नागरिकों के बीच में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए 21 सितंबर को प्रत्येक वर्ष विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों झगड़ों पर विराम लगे| शांति का संदेश दुनिया भर में पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1981 में विश्व शांति दिवस मनाने की घोषणा की है पहली बार सन 1982 में विश्व शांति दिवस मनाया गया ।जिसकी थीम थी शांति मानव का अधिकार| हर तीसरे मंगलवार को विश्व विश्व शांति दिवस मनाया जाने लगा पर सन 2002 में इसको 21 सितंबर की तारीख निर्धारित कर दी गई जब से लगातार सितंबर की 21 तारीख को मनाया जाने लगा है| शांति का संदेश दुनिया भर में पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कला ,साहित्य, सिनेमा ,संगीत, खेल जगत ,समाजसेवी ,आदि विश्वविख्यात हस्तियों को शांतिदूत नियुक्त कर रखा है।

भारत भी विश्व शांति के लिए हमेशा अग्रणी पंक्ति की भूमिका निभाता रहा है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व जवाहरलाल नेहरू ने भी शांति का प्रतीक सफेद कबूतर उड़ाकर विश्व शांति बनाए रखने की अपील समय-समय पर जारी की ।आपका आगरा भी शांति संदेश देने के लिए समय-समय पर आगे आता रहा है। इसमें सभी धर्मों के धर्माचार्य अनेक विषम परिस्थितियों में सुलह कुल नगरी में शान्ति स्थापित करते रहे हैं ।अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा शांति के प्रतीक सफेद कबूतर को उड़ा कर स्कूल कॉलेजों में खेल के मैदानों में शांति संदेश दिया जाता है ।

सफेद कबूतर शांति का प्रतीक चिन्ह क्यों कहा जाता है इसकी एक बहुत मार्मिक कहानी हे 2 देशों में जब युद्ध हो रहा था तो एक देश की राजा ने अपनी मां के पास गया कि वह सर पर सुरक्षा टोपा पहना दे परंतु मां ने राजा से कहा की टोपी में कबूतरों ने अपने बच्चे दिए हैं वह बिना टोपी के युद्ध में चला जाए राम राजा ने मां की आज्ञा का पालन किया और बिना टोपे के युद्ध में चला गया जब दूसरे राजा ने देखा कि राजा बिना टोपी के आया है तो सारी बात जानने के बाद उसका दिल पिघल गया और सोचा ये राजा इतना दयालु है और इसके साथ में युद्ध करने चला हूं और उस राजा के साथ ना केवल मित्रता की और शांति का संदेश देने का भी एक दूसरे ने वचन दिया जब से सफेद कबूतर को शांति दूत माना जाता है |

लोकस्वर की श्रीमती सन्ध्या शर्मा बताती हैं शांति स्थापित करने के लिए कुछ सिद्धांत होते हैं एक दूसरे की अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करें तथा एक दूसरे के विरुद्ध युद्ध की कार्यवाही ना करें |किसी भी देश द्वारा किसी भी अन्य देश की आंतरिक कार्यक्रम में जबरदस्ती हस्तक्षेप करना भी अशांति पैदा करने जैसा होता है |समानता और परस्पर लाभ की नीतियों का पालन करना चाहिए अगर हम शांति से खुद रहेंगे तो निश्चित मानिए दूसरा कोई भी आपकी शांति भंग नहीं करेगा ।
लोकस्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता कहते हैं आज दुनिया में शांति के लिए अनेक प्रकार के विश्व में आंतरिक हो या बाहरी सेमिनार किए जा रहे हैं, शांति प्रस्ताव किये जाते है वही अनेक प्रकार की योगा ,ध्यान, सोशल मीडिया पर तमाम देश के राष्ट्रीय अध्यक्षों के विचार आते है ।आपको यह भी जानकर आश्चर्य होगा कि आगरा के वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना काफी समय तक यह प्रयास करते रहे की शहीद स्मारक पर एक जगह मिल जाये जहां पर वह शांति के प्रतीक सफेद कबूतरों को को रख सकें ताकि हमेशा आगरा में अमन चैन बनाये रखने का ध्यान दिलाते रहे ।देखिए प्रेम का प्रतीक ताज महल आज विश्व शान्ति दिवस के दिन सिक्स महीने बाद खुलेगा वो भी प्रेम और मन की सुंदरता का संगमहै

लोकस्वर संस्था के सभी सदस्यों का तरफ से मैं सभी पाठकों से निवेदन करूंगा भागवत गीता के नियम के अनुसार अगर हमारी इच्छाएँ कम होंगी और अभिलाषा कम होगी तो कभी भी ना कुंठा होगी और ना ही मन अशांत नहीं रहेगा प्रभुत्ता केवल ईश्वर की होती किसी भी मानव की नही, यही एक सिद्धांत हे जो विश्व में भी शांति स्थापित करने में कामयाब रहेंगे ।

– राजीव गुप्ता जनस्नेही
परिवहन संपदा

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