क्या है शॉपिंग डिसऑर्डर, और कैसे हैं इसके साइड इफेक्ट…

दिल्‍ली एनसीआर और एमएनसी में काम करने वाले बहुत से लोगों में शॉपिंग के क्रेज को देखकर आप परेशान हो सकते हैं। इसी क्षेत्र में कार्यरत एक पति अपनी पत्‍नी के शॉपिंग क्रेज को देखकर इस कदर परेशान हुए कि दोनों 7 महीने से अलग रह रहे हैं। विकास बताते हैं कि पहले वे साथ में हफ्ते में एक बार मॉल जाते थे। जब उन्होंने इसके लिए मना कर दिया तो वाइफ ने ऑनलाइन खरीददारी शुरू कर दी। इसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि घर में वो सामान भी आने लगा जिसकी जरुरत नहीं थी। इसके चलते उन दोनों में बहस होने लगी। इसके बाद लड़ाई। आखिरकार उनकी पत्नी अपने मायके चली गई। विकास कहते हैं कि वह पत्नी से अलग नहीं रहना चाहते, लेकिन उसे भी समझदार बनने की जरुरत है।
मानसिक बीमारी बन रही है शॉपिंग की लत
विकास की पत्नी तरह ही ऐसी कई महिलाएं हैं जो इस शॉपिंग डिसऑर्डर का शिकार हैं। इसी के चलते रिश्ते कई बार टूटने के कगार तक आ जाते हैं। डॉक्टर मानते हैं कि अकेलेपन और रिश्तों में बढ़ रहे कम्युनिकेशन गैप की वजह से इस तरह की आदत महिलाओं में डिसऑर्डर यानी बीमारी का रूप ले रही है। ऑनलाइन शॉपिंग ने इसे और बढ़ावा दिया है। धीरे-धीरे इसकी लत इतनी बढ़ जाती है कि यह एक मानसिक बीमारी का भी रूप ले लेती है। ऐसे में परिवार और पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को समझें और उन्हें तनाव में न आने दें।
पति के साथ होने लगी है लड़ाई
नायरा बताती हैं कि वह एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। जब भी ऑफिस में टाइम मिलता है तो वो खुद के लिए शॉपिंग कर लेती हैं। ज्यादातर सामान वह ऑफिस में ही मंगवाती हैं, लेकिन इस वजह से कई बार पति के साथ लड़ाई होने लगी है।
खुद को खुश रखने के लिए हर हफ्ते करती हूं शॉपिंग
32 साल की ज्योति शर्मा बताती हैं कि वो तब शॉपिंग करती हैं, जब वह उदास होती हैं। इससे खुद को खुश रखने की कोशिश करती हैं। पति बिजनेस में व्यस्त रहते हैं, उनके पास टाइम नहीं कि वे उन्हें वक्त दे सकें। दोस्त भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में हफ्ते में 3 से 4 आइटम तो ऑनलाइन शॉपिंग से मंगवा ही लेती हैं। उनका भी ज्यादातर समय मोबाइल पर ही बीतता है।
सैलरी का 60 पर्सेंट खरीदारी पर कर देती हैं खर्च
28 साल की संजना बताती हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग से 2 दिन में कुछ न कुछ खरीद ही लेती हैं। कुछ छोटे प्रोडक्ट तो कुछ महंगे खरीदकर वह अपनी सैलरी का 60 पर्सेंट हिस्सा खर्च कर देती हैं। वह अभी सिंगल हैं और पैरंट्स के पास रहती हैं। ऐसे में कई बार पैरंट्स भी उन्हें डांटते हैं लेकिन उन्हें लगता है कि जब तक वह कुछ खरीद न ले तो सबकुछ अधूरा सा लगाता है।
10 में से 6 मामले ऑनलाइन शॉपिंग डिसऑर्डर के
साइकॉलजिस्ट श्वेता शर्मा कहती हैं कि 10 में 6 मामले ऑनलाइन शॉपिंग डिसऑर्डर के आने लगे हैं जो कि इस बीमारी का शिकार हो गए हैं। उन्हें नहीं पता कि यह बीमारी है लेकिन उनका अकेलापन उन्हें इस ओर खींच रहा है। एक अन्‍य साइकॉलजिस्ट प्रीति सिंह कहती हैं, पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ऑनलाइन शॉपिंग की ओर खींची चली जाती हैं। यह उनके लिए एक खुशी का जरिया है। उन्हें लगता है कि वे खुद के लिए कुछ नया कर रही हैं। घर-ऑफिस समेत किसी भी तरह की समस्या से वह दूर भागने के लिए इसका सहारा ले रही हैं।
यह है वजह
– काम और रिश्तों से मिलने वाला डिप्रेशन
– रिश्तों से न मिलने वाली खुशियां
– सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दोस्तों को शॉपिंग दिखाना
– सीरियल में दिखाए जाने वाले प्रोडक्ट्स की चाह/कम्पैरिजन
– एक क्लिक में ढेरों ब्रैंड्स दिख जाना
डॉक्टरों की सलाह
– फोन में ऑनलाइन शॉपिंग ऐप न रखें
– ऐप की जरुरत पड़े तो उसी समय डाउनलोड कर फिर डिलीट कर दें
– जिस अकाउंट में पैसा है, उसे ऑनलॉइन शॉपिंग से न जोड़ें
– शॉपिंग ऑडिट करें कि कितनी काम की खरीददारी की
– अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय ज्यादा बिताएं
– रिलेशनशिप में अगर कोई अनबन हो रही है तो उसे सॉल्व करें
-एजेंसियां

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