स्‍मृति शेष: आज के ही दिन हुआ था अनवर जलालपुरी का इंतकाल

उर्दू के मशहूर शायर अनवर जलालपुरी का पिछले साल आज के दिन ही देहांत हुआ था. वह करीब 70 वर्ष के थे.
2015 में उन्हें उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ यश भारती सम्मान से नवाजा गया था.
मुशायरों की जान माने जाने वाले जलालपुरी ने राहरौ से रहनुमा तक उर्दू शायरी में गीतांजलि तथा भगवद्गीता के उर्दू संस्करण उर्दू शायरी में गीता पुस्तकें लिखीं जिन्हें बेहद सराहा गया था. उन्होंने अकबर द ग्रेट धारावाहिक के संवाद भी लिखे थे.
अनवर जलालपुरी ने राम की अयोध्या से प्रवाहित सरयू की गोद में पावन तमसा के उसी तट पर 6 जुलाई 1947 को जन्म लिया था, जिस तमसा के इसी तट पर आदिकवि बाल्मीकि ने रामायण रचा था। अनवर जलालपुरी इसी तट पर जलालपुर कसबे की माटी की उपज हैं। तुलसी, मीरा, कबीर और रसखान से लेकर ग़ालिब, फैज और मेरे तक की परंपरा को साँसों में समाहित कर मिसरे, शेर और अशआरों की गढन में मशगूल अनवर ने जब गीता को जनभाषा दी तो कमाल ही कर गए।
अनवर जलालपुरी अंग्रेजी के प्रवक्ता थे लेकिन भाषा को वह लोक माफिक ही बनाना चाहते थे। वह अपनी शायरी के माध्यम से समाज को हमेशा बड़े पैग़ाम देने की कोशिश करते रहते हैं। नयी पीढ़ी के लिए उनकी शायरी किसी टीचर की तरह राह दिखाती है। वह हर वक्त एक ऐसी दुनिया का ख्वाब देखते हैं, जिसमे ज़ुल्म, ज्यादती की कोई जगह नहीं है। वह खुद बताते थे – छात्र जीवन से उनके दिमाग में एक बात बैठी हुई थी कि कुरान तो पढ़ी ही है, फिर हिंदू परंपरा की किताबें भी क्यों न पढ़ ली जाएं।
अनवर जलालपुरी के कुछ मशहूर शेर…

मैं जा रहा हूं मेरा इन्तेज़ार मत करना
मेरे लिये कभी भी दिल सोगवार मत करना

मेरी जुदाई तेरे दिल की आज़माइश है
इस आइने को कभी शर्मसार मत करना

फ़क़ीर बन के मिले इस अहद के रावण
मेरे ख़याल की रेखा को पार मत करना

ज़माने वाले बज़ाहिर तो सबके हैं हमदर्द
ज़माने वालों का तुम ऐतबार मत करना

ख़रीद देना खिलौने तमाम बच्चों को
तुम उन पे मेरा आश्कार मत करना

मैं एक रोज़ बहरहाल लौट आऊंगा
तुम उंगुलियों पे मगर दिन शुमार मत करना
-Legend News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »