जमात-ए-इस्लामी पर बैन के खिलाफ उतरी महबूबा मुफ्ती

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती राज्य के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी संगठन पर लगाए गए बैन के खिलाफ सड़क पर उतर आई है। वह पीडीपी वर्कर के साथ मिलकर केंद्र सरकार द्वारा संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने इससे पहले ट्वीट किया था, ‘लोकतंत्र विचारों का संघर्ष होता है, ऐसे में जमात-ए-इस्लामी (जेके) पर पाबंदी लगाने की दमनात्मक कार्यवाही निंदनीय है और यह जम्मू कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे से अक्खड़ और धौंस से निपटने की भारत सरकार की पहल का एक अन्य उदाहरण है।’
उसने कहा, ‘जमात-ए-इस्लामी से भारत की सरकार इतनी असुविधाजनक नहीं है। कश्मीरियों के लिए अथक परिश्रम करने वाले एक संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। क्या अब बीजेपी विरोधी राष्ट्र विरोधी हो रहा है?’
बता दें कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को इस आधार पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत जमात-ए-इस्लामी (जम्मू कश्मीर) पर पांच साल के लिए पाबंदी लगाई थी कि उसकी आतंकवादी संगठनों के साथ साठगांठ है और राज्य में अलगाववादी आंदोलन बहुत तेज होने की आशंका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत इस संगठन पर पाबंदी लगाते हुए अधिसूचना जारी की।
जमात-ए-इस्लामी और उसके धड़े
जमात-ए-इस्लामी हिंद की स्थापना साल 1948 में अप्रैल में हुई थी। 240 सदस्यों ने इस पार्टी की एक मीटिंग में भाग लिया और मौलाना अबुलैस नदवी को अपना नेता चुना। लखनऊ के मलीहाबाद में इस पार्टी का हेडक्वॉर्टर बनाया गया। 1949 में इसे रामपुर शिफ्ट किया गया और 1960 में नई दिल्ली को जमात-ए-इस्लामी हिंद का हेडक्वॉर्टर बना दिया गया। पार्टी ने साल 1956 में अपनी लिखित नीति के साथ-साथ अपने संविधान में बदलाव किया।
हालांकि बाद में इस पार्टी को दो बार बैन किया गया। पहला बैन इमर्जेंसी के दौर (1975-1977) में लगा और दूसरा बैन 1992 में। इमर्जेंसी हटाए जाने के बाद जहां पार्टी पर लगे पहले बैन को निरस्त कर दिया गया था वहीं दूसरी बार लगे बैन को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। इमर्जेंसी के दौरान जमात-ए-इस्लामी हिंद पर जो बैन लगा था, उससे इसकी विचारधारा पर गहरा असर हुआ था। उस दौरान उसके कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पकड़कर जेल में डाल दिया गया था। जो पार्टी शुरुआत में भारत को मजहबी मुल्क बनाना चाहती थी, बाद में वह समझ गई कि भारत के मामले में धर्मनिरपेक्षता का मतलब नास्तिकता नहीं बल्कि यह तो भारतीय संविधान का अभिन्न अंग और उसकी विशेषता है।
जमात-ए-इस्लामी कश्मीर
जमात-ए-इस्लामी का एक अन्य धड़ा ‘जमात-ए-इस्लामी कश्मीर’ के नाम से कश्मीर की घाटी में सक्रिय था, जोकि वहां अलगावादियों और कट्टरपंथियों के प्रचार-प्रसार के लिए जिम्मेदार मुख्य संगठन है और वह हिजबुल मुजाहिदीन को रंगरूटों की भर्ती, उसके लिए धन की व्यवस्था, आश्रय और साजो-सामान के संबंध में सभी प्रकार का सहयोग देता आ रहा है। इस संगठन को सरकार ने हाल ही में बैन कर दिया। इस संगठन पर कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों की सक्रिय अगुआई करने का आरोप है।
-एजेंसियां

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