इनसे मिलिए… ये हैं मथुरा की ‘लॉकडाउन’ सांसद ‘हेमा जी’, परेशान हैं मदद कीजिए प्‍लीज!

इनसे मिलिए…. ये हैं फिल्‍मी दुनिया में ‘स्‍वप्‍न सुंदरी’ का खिताब प्राप्‍त ‘अभिनेत्री’ हेमा मालिनी। अपने ‘सौभाग्‍य’ और जनता के ‘दुर्भाग्‍यवश’ ये कृष्‍ण की नगरी मथुरा से ‘सांसद भी’ हैं। इनके सामने बैठे हैं महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल महामहिम भगत सिंह कोश्‍यारी जी।
लगातार दूसरी बार मोदी जी की मेहरबानी और कृष्‍ण की नगरी के लोगों की कृपा से लोकसभा पहुंचीं हेमा जी इन दिनों मुंबई स्‍थित अपने ‘घर’ में ‘लॉकडाउन’ हैं।
वैसे उनका एक घर वृंदावन (मथुरा) की ‘ओमेक्‍स सिटी’ में भी है लेकिन रहती वो जुहू (मुंबई) में ही हैं। यूं भी ओमेक्‍स सिटी का घर ‘दान की बछिया’ सरीखा है, इसलिए उसे जाने दीजिए।
यूं भी हेमा जी ने दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही कह दिया था कि ये उनका मथुरा से आखिरी चुनाव है इसलिए कोई ये नहीं कह सकता कि उन्‍होंने किसी को धोखे में रखा। अथवा मथुरा की जनता को गुमराह किया। अब जनता ही गुमराह हो जाए तो इसके लिए हेमा जी कहां कसूरवार हैं।
बात की धनी हेमा जी ने मथुरा जिले की सीमा में घर बनाने का वादा किया था, वो निभा दिया। सुख-दुख में “साथ रहने” का आश्‍वासन तो शायद उन्‍होंने कभी दिया नहीं था लिहाजा उसकी चर्चा अब क्‍यों।
दरअसल, लॉकडाउन में निठल्ले बैठे कुछ ‘विपक्षी दल’ टाइप के लोग ऐसी शिकायत कर रहे थे कि लॉकडाउन के दो टर्म पूरे हो गए और तीसरा भी पूरा होने को आया किंतु हमारी सांसद कहीं दिखाई नहीं दे रहीं।
विपक्षी टाइप के लोगों (चाहे वो अपनी पार्टी के ही क्‍यों न हों) का तो काम ही है मीन-मेख निकालना इसलिए निकालने लगे। लेकिन हेमा जी ठहरी दया की मूर्ति और करुणावतार, लिहाजा सहन नहीं हुए बेबुनियाद आरोप। जा बैठीं तुरंत महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल महोदय के सामने और कहने लगीं, मेरे मथुरा की जनता बहुत परेशान है। उनकी परेशानी मैंने ‘देखी तो नहीं है’ लेकिन ‘सुनी’ अवश्‍य है।
महामहिम जरा विचार कीजिए कि जिसे मात्र सुनकर ही मैं ”मुंबई से मुंबई तक” दौड़ी चली आई, उसे देख रहे और भोग रहे लोगों का क्‍या हाल होगा। कुछ कीजिए न।
खुद हेमा जी के शब्‍दों में बहुत से लोगों ने उन्‍हें फोन करके अपनी परेशानी बताई और पूछा कि उन्‍हें अगर मथुरा जाना है तो कैसे जाएं ?
माफ कीजिए, हेमा जी को कोई सपना नहीं आया था कि उनके संसदीय क्षेत्र से भी कुछ लोग महाराष्‍ट्र में रहते हैं और घर जाने के लिए परेशान हैं। वो भाजपा के वीआईपी कोटे से सांसद हुई हैं, कोई ऐरी-गैरी सांसद नहीं हैं जो खुद पता कर लें कि क्षेत्र के लोग किसी परेशानी में तो नहीं हैं।
पता करें भी क्‍यों, आज के जमाने में तो कोई वार्ड मेंबर या पार्षद नहीं पूछता क्षेत्र की जनता का हाल, फिर वो तो विशिष्‍ट सांसद हैं।
बहरहाल, अपने संसदीय क्षेत्र की जनता का दुख सुनकर हेमा जी इतनी द्रवित हो उठीं कि ‘लॉकडाउन की परवाह किए बिना और ‘मुंह पर मास्‍क’ भी लगाने की सुध-बुध न रखते हुए सीधे गवर्नर हाउस जा पहुंची। मास्‍क लगा लेतीं तो उनकी मुस्‍कुराहट का क्‍या होता। कैसे पता लगता कि आमलोगों का खास दुख भी वो कैसे हंसते-हंसते कटवा देती हैं।
राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी से मुस्‍कुराते हुए उन्‍होंने न सिर्फ महाराष्‍ट्र में रह रहे मथुरा के लोगों का दुख व्‍यक्‍त किया बल्‍कि मथुरा के अस्‍पतालों में एक गर्भवती महिला के साथ हुए दुर्व्‍यवहार का भी जिक्र किया। यकीन न हो तो नीचे स्‍वयं सुन लें अपने कानों से और हेमा जी के मुखारबिंद से

 

आपने सुन लिया होगा कि हेमा जी ने इस दौरान महाराष्‍ट्र के गवर्नर से महाराष्‍ट्र की भी बात की और देश से लेकर विदेशों तक में फैले मथुरा के लोगों को वापस भेजने का इंतजाम करने की बात कही।
हेमा जी को लगा कि उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ इसके लिए उपयुक्‍त नहीं रहेंगे क्‍योंकि उनसे फिलहाल मुलाकात कर पाना संभव नहीं होता। मुलाकात नहीं होती तो फोटो नहीं खिंचता, फोटो नहीं खिंचता तो न्‍यूज़ नहीं बनती। फोन पर वार्तालाप करने की बात कहकर न्‍यूज़ छपवाने में से वो वजन नहीं पड़ता जो सीधे गवर्नर साहब के साथ फोटो खिंचवाकर स्‍टेटमेंट जारी करने से पड़ा।
अब योगी जी को भी पता लग गया कि वो अकेले अपनी यूपी के मजदूरों को लेकर हलकान नहीं हुए जा रहे, मुंबई में लॉकडाउन हेमा जी भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लगी हुई हैं। योगी जी अगर हेमा जी की एक आवाज पर मथुरा में होली खेलने आ सकते हैं तो क्‍या हेमा जी उनके लिए जुहू से गवर्नर हाउस नहीं जा सकतीं।
वो ये जानते हुए भी गईं कि अब उन्‍हें मथुरा से तीसरा चुनाव नहीं लड़ना। जुहू से गवर्नर हाउस कितने किलोमीटर दूर है, इसका अंदाज यदि विपक्षी टाइप के पार्टीजनों को होता तो वो ऐसी-वैसी बे-सिरपैर की बातें न करते। लॉकडाउन तोड़कर उतने किलोमीटर निकलना इतना आसान समझते तो निकलके दिखाओ न। हेमा जी पर उंगली मत उठाओ।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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