भगोड़े NRI husbands पर कसेगा विदेश मंत्रालय का शिकंजा

जब्त होगी NRI husbands की संपत्ति, समन भेजे जाने के लिए तैयार कर रहा है एक पोर्टल

नई दिल्‍ली। विदेश मंत्रालय भगोड़े NRI husbands के खिलाफ वारंट जारी करने और उन्हें समन भेजे जाने के लिए एक पोर्टल तैयार कर रहा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को कहा कि यदि आरोपी ने इसका जवाब नहीं दिया तो उसे उद्घोषित अपराधी करार दिया जाएगा और उसकी संपत्ति को अटैच किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा इस तरह के पोर्टल के आने के साथ ही सीआरपीसी में भी संशोधन करने की जरूरत है। जिससे कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को इस तरह के समन को स्वीकार करने की अनुमति मिल सकेगी। वहीं पोर्टल पर डाले गए वारंट को ‘तामिल के रूप में’ माना जाएगा।

स्वराज ने कहा कि विधि मंत्रालय, विधानसभा, गृहमंत्रालय और महिला और बाल विकास मंत्रालय इस प्रस्ताव पर सहमति जता चुका है। विदेश मंत्रालय के अनुसार एनआरआई पति की तरफ से छोड़ी गई महिलाओं की तरफ से पिछले तीन साल में (जनवरी 2015 से नवंबर 2017 तक) 3328 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं।

इस तरह की फर्जी शादियों से बचाने के लिए NRI husbands  के खिलाफ  विदेश मंत्रालय एक पोर्टल विकसित कर रहा है।

देशभर में ऐसे मामलों के निपटारे के लिए विदेश मंत्रालय में सिंगल विंडो सिस्टम भी शुरू कराया जा रहा है। इसके साथ देश के सभी राज्य महिला आयोग इस सिस्टम से जुड़ जाएंगे। उनकी जांच रिपोर्ट पर ही यह मंत्रालय केस को दूसरे मुल्क में वहां की न्यायिक व्यवस्था के मुताबिक आगे बढ़ाएगा। पिछले दो-तीन साल में ऐसे तीन-चार हजार मामले पंजीकृत हुए हैं।

महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की चेयरमैन एवं भाजपा महिला मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस विषय पर अमर उजाला डॉट काम के साथ विशेष बातचीत की है। उनका कहना है कि हमारे देश में एनआरआई विवाह से संबंधित झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। जब विवाह की बात होती है तो लड़की पक्ष सभी बातों पर ध्यान नहीं देता। उनके लिए बड़ी बात केवल यही होती है कि हमारी लड़की विदेश जाएगी।

कई केसों में देखने को मिला है कि विवाह के बाद लड़का यह कह कर विदेश चला जाता है कि वह दो-तीन माह में लड़की को वहां पर बुला लेगा। कुछ मामलों में यह होता है कि लड़की साथ तो चली जाती है, लेकिन विदेश में उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। यह स्थिति सबसे ज्यादा कष्टदायक होती है, क्योंकि दूसरे मुल्क में उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होता। वहां के कानून की जटिलतायें भी पीड़िता को बेबस होने के लिए मजबूर कर देती है। अगर साथ में बच्चा भी है तो महिला के लिए दिक्कतें और अधिक बढ़ जाती हैं। -एजेंसी

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