Mayawati द्वारा सपा के साथ गठबंधन तोड़ने का आधिकारिक ऐलान

लखनऊ। आखिरकार बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो Mayawati ने आधिकारिक रूप से समाजवादी पार्टी (एसपी) के साथ गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है। इस तरह यूपी के दो बड़े सियासी दलों का गठबंधन 6 महीने में ही टूट गया। दोनों के बीच गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा इसी साल जनवरी में हुई थी।
बीएसपी सुप्रीमो Mayawati ने ट्वीट कर लिखा, ‘बीएसपी की ऑल इंडिया बैठक कल (रविवार) लखनऊ में ढाई घंटे तक चली। इसके बाद राज्यवार बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा जिसमें भी मीडिया नहीं था। फिर भी बीएसपी प्रमुख के बारे में जो बातें मीडिया में फ्लैश हुई हैं, वे पूरी तरह से सही नहीं हैं जबकि इस बारे में प्रेसनोट भी जारी किया गया था।’
‘एसपी का बर्ताव सोचने पर मजबूर करता है’
अगले ट्वीट में Mayawati ने लिखा, ‘वैसे भी जगजाहिर है कि एसपी के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में एसपी सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरुद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून-व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में एसपी के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद एसपी का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है।’
Mayawati ने एसपी पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद एसपी का व्यवहार देखकर लगा कि ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव नहीं है। उन्होंने आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ने की घोषणा भी की। इसके साथ ही उन्होंने एसपी से किनारा करने को लेकर मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया।
अकेले चुनाव लड़ेगी बीएसपी
आखिर में Mayawati ने ऐलान किया कि पार्टी व मूवमेंट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी।
बता दें कि Mayawati ने रविवार को बीएसपी के विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ हुए गठबंधन और उसके परिणाम पर बात की।
सूत्रों के मुताबिक Mayawati ने साफ किया कि एसपी के साथ गठबंधन का फैसला जल्दबाजी में नहीं बल्कि सोच विचार कर लिया गया था लेकिन फैसले से जो परिणाम आने चाहिए थे, नहीं आए।
‘गठबंधन के लिए अखिलेश पूरी तरह अपरिपक्व’
इतना ही नहीं सूत्रों के मुताबिक Mayawati ने मीटिंग में कहा, ‘अखिलेश यादव गठबंधन के लिए पूरी तरह अपरिपक्व हैं। चुनाव के बाद कई दिनों तक मैं इंतजार करती रही कि वह आएंगे और बात करेंगे, लेकिन वह नहीं आए। ऐसी सूरत में एसपी के साथ गठबंधन बरकरार नहीं रखा जा सकता। एसपी की तरफ से जो सहयोग चाहिए था, वह नहीं मिला। मैंने अखिलेश यादव को कई बार इसके लिए आगाह भी किया पर वह समझ नहीं सके और भितरघात होता रहा। लोगों में यह फैलाया जा रहा है कि हमारे 10 सांसद एसपी के सहयोग से जीते लेकिन हकीकत यह नहीं है। अगर यह सच्चाई है तो यादव परिवार के लोग ही क्यों चुनाव हार गए? अखिलेश क्यों डिंपल को भी जितवा नहीं सके?’
‘मुलायम ने भी मुझे ताज कॉरिडोर में फंसाया’
सूत्रों के अनुसार, Mayawati ने मीटिंग में यह भी कहा, ‘मुझे ताज कॉरिडोर केस में फंसाने वालों में न केवल बीजेपी, बल्कि मुलायम सिंह यादव का भी रोल था। इसे भूलकर मैं मुलायम के लिए वोट मांगने गई थी, लेकिन अखिलेश ने इसकी कद्र नहीं की। अखिलेश ने चुनाव के बाद मुझे तब भी फोन नहीं किया। सतीश चंद्र मिश्र ने उनसे कहा था कि वह मुझसे फोन पर बात करें। मैंने तो नतीजों के बाद अखिलेश को फोन किया और परिवार के हारने पर अफसोस जताया था।’
अखिलेश पर लगाया मुसलमानों को टिकट न देने का आरोप
इसके अलावा मीटिंग में Mayawati ने अखिलेश पर आरोप लगााया था कि अखिलेश ने उनसे मुसलमानों को टिकट न देने के लिए कहा था। इसके अलावा मायावती ने एसपी पर आरोप लगाया था कि उनके वोट बैंक का फायदा बीएसपी को नहीं हुआ। एसपी का वोट बीजेपी में गया। इसका अंदाजा गठबंधन के पहले तक नहीं था।
Mayawati ने कहा कि बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को सलेमपुर सीट पर एसपी के विधायक दल के नेता राम गोविंद चौधरी ने हरवाया। उन्होंने एसपी के वोट बीजेपी को ट्रांसफर करवाए। अखिलेश सब जानते हुए चुप रहे। बीएसपी को उपचुनाव की ज्यादातर सीटें जीतनी हैं। इससे हम यह बता सकेंगे कि हमारे लोग जो लोकसभा पहुंचे हैं, उनके पीछे एसपी नहीं बल्कि बीएसपी के काडर की मजबूती थी।
-एजेंसियां

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