जन्मपत्री मिलान से पहले Thalassemia जांच जरूरी

मथुरा। विवाह से पहले युवक-युवती की जन्मपत्री मिलाई जाती है, लेकिन उससे पहले Thalassemia की जांच कराके उसका मिलान होने पर ही विवाह कराये जाने चाहिए।
यह कहना है सिन्धी जागरूक मंच और रक्तदान अभियान मंच (राम) के संस्थापक किशोर स्वर्ण इसरानी का, उन्होंने Thalassemia दिवस पर सबको जागरूक करते हुए कहा है कि Thalassemia एक अनुवांशिक दोष है, जिससे कोई भी पीड़ित हो सकता हैं, यह माता पिता से बच्चों में ट्रांसफर होता हैं। यदि माता-पिता दोनों में से एक भी थैलीसीमिया माइनर या कैरियर है, तो उनके बच्चों में से कुछ बच्चे माइनर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि थैलीसीमिया माइनर व्यक्ति पूर्णतय स्वस्थ होता है। यह चिंता का विषय नहीं, लेकिन समस्या तब बनती है, जब माता-पिता दोनों ही थैलीसीमिया माइनर या कैरियर हों, ऐसे में उनके जीवाणु थैलीसीमिया मेजर बच्चे को जन्म देते हैं, ऐसे बच्चे शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी पीड़ित हो जाते है, बच्चे में खून की कमी होने लगती है, बच्चा पीला होने लगता है, बच्चा सुस्त रहने लगता है। ऐसे बच्चों की आयु बहुत कम होती है, वह जितना समय जिंदा रहेगा, उसे हर माह खून की जरूरत पड़ती रहेगी। चिकित्सा विज्ञान अभी तक थैलीसीमिया का उचित इलाज नहीं दे पाया है।
उन्होंने बताया कि थैलीसीमिया से बचाव का केवल एक ही उपाय है, ऐसे पुरूष और महिला जिन्हें थैलीसीमिया माइनर है, उनका विवाह न हो, इसके लिए विवाह से पूर्व पुरूष और महिला की कुण्डलियां मिलाने के साथ ही थैलीसीमिया माइनर रक्त परिक्षण की रिपोर्ट का मिलान करना जरूरी है। अतः अविवाहित युवक-युवती का रक्त परिक्षण नितांत आवश्यक है। एक विशिष्ट प्रकार के खून जाँच के द्वारा थैलीसीमिया माइनर की जाँच जिंदगी में सिर्फ एक बार करानी पड़ती है, जो कभी भी बदलती नहीं है।
थैलीसीमिया दिवस पर थैलीसीमिया मेजर से पीड़ित मथुरा के सिन्धी बालक 14 वर्षिय हेमंत लालवानी के पिता चंद्रकांत लालवानी ने थैलीसीमिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि थैलीसीमिया माइनर व्यक्ति पूर्णतय स्वस्थ होता है। यह चिंता का विषय नहीं, लेकिन समस्या तब बनती है, जब माता-पिता दोनों ही थैलीसीमिया माइनर या कैरियर हों, ऐसे में उनके जीवाणु थैलीसीमिया मेजर बच्चे को जन्म देते हैं, ऐसे बच्चे शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी पीड़ित हो जाते है, बच्चे में खून की कमी होने लगती है, बच्चा पीला होने लगता है, बच्चा सुस्त रहने लगता है। ऐसे बच्चों की आयु बहुत कम होती है, वह जितना समय जिंदा रहेगा, उसे हर माह खून की जरूरत पड़ती रहेगी। चिकित्सा विज्ञान अभी तक थैलीसीमिया का उचित इलाज नहीं दे पाया है। मेडिकल साइंस में थैलीसीमिया जाँच और इलाज हैं, किन्तु वह महंगा है, ऐसे में थैलीसीमिया के बारे में जागरूकता और जाँच ही बचाव का जरिया है।
गौरतलब है कि किशोर स्वर्ण इसरानी ने ही आज तक जो किसी ने नहीं किया, वह पहल मथुरा में सर्वप्रथम रक्तदान जागरूकता रैली निकाल कर लोगों को प्रेरित किया और अब मथुरा में पहली बार थैलीसीमिया जागरूकता रैली निकाल कर एक बार फिर प्रेरक के रूप में अपना नाम दर्ज कराया हैं।
गतवर्ष रक्तदान अभियान मंच (राम) के संस्थापक किशोर स्वर्ण इसरानी ने कदम्ब विहार में थैलीसीमिया जागरूकता रैली निकाली, वहीं सिन्धी जनरल पंचायत ने शिविर लगाकर 200 अविवाहित युवाओं का निशुल्क थैलीसीमिया का चेकअप कराया।

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