RuPay से पिछड़ रहा MasterCard, ट्रंप सरकार ने की पीएम मोदी से बात

RuPay कार्ड को राष्ट्रीयता से जोड़ कर प्रमोट करने से मास्टरकार्ड जैसी पेमेंट सर्विस वाली विदेशी कंपनियां परेशान

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी पेमेंट नेटवर्क RuPay की बढ़ती लोकप्रियता और बढ़ते इस्तेमाल से घबराकर ट्रंप सरकार ने मोदी सरकार से अपनी चिंता व्‍यक्त की है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उसने वह शिकायती दस्तावेज देखा है जिसमें अमेरिकी कंपनी मास्टरकार्ड ने मौजूदा अमेरिकी सरकार से कहा है कि मोदी सरकार अपने पेमेंट नेवटर्क RuPay को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रही है। अब पेमेंट नेटवर्क सेक्टर में काम करने वाली कुछ विदेशी कंपनियों को खतरा महसूस होने लगा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से मोदी सरकार RuPay कार्ड को राष्ट्रीयता से जोड़ कर प्रमोट कर रही है जिस वजह से मास्टरकार्ड जैसी पेमेंट सर्विस वाली विदेशी कंपनियों की समस्या बढ़ती जा रही है।
इस बाबत अमेरिकी कंपनी मास्टरकार्ड ने मौजूदा अमेरिकी सरकार से कहा है कि मोदी सरकार अपने पेमेंट नेवटर्क को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रही है।

रॉयटर्स की खबर में दावा किया गया है कि भारतीय पेमेंट नेटवर्क रुपे का असर यह हुआ है कि अमेरिका की दिग्गज पेमेंट कंपनियां जैसे मास्टरकार्ड और वीजा का दबदबा कम हुआ है। भारत के 1 बिलियन डेबिट और क्रेडिट कार्ड में से आधे से अधिक अब रुपे पेमेंट सिस्टम के तहत काम कर रहे हैं। इससे मास्टर कार्ड को काफी परेशानी हो रही है. पीएम मोदी ने स्वदेशी कार्ड पेमेंट नेटवर्क को लागू करते हुए कहा था कि रुपे कार्ड देश की सेवा कर रहा है। इसके ट्रांजेक्शन से मिलने वाले शुल्क से देश में सड़क, स्कूल और अस्पताल के निर्माण में सहायता मिलती है।

यूएसटीआर में की मोदी सरकार की शिकायत
पीएम मोदी के द्वारा रुपे कार्ड को बढ़ावा देने वाली बात को कोड करते हुए मास्टरकार्ड ने 21 जून को संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) को लिखा, “प्रधानमंत्री राष्ट्रवाद के साथ रुपे कार्ड के इस्तेमाल को जोड़ रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि इस कार्ड का उपयोग एक प्रकार से राष्ट्र सेवा जैसा है।”

मास्टरकार्ड में ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी के वाइस-प्रसिडेंट साहरा इंग्लिश ने अपने नोट में लिखा है, “पीएम मोदी द्वारा डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का किया गया प्रयास सराहनीय था, लेकिन भारत सरकार ने वैश्विक कंपनियों के नुकसान के लिए संरक्षणवादी उपायों की एक सीरीज बनाई।

अमेरिकी कंपनियां मोदी सरकार की संरक्षणवादी नीतियों की वजह से जूझ रही हैं।” रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में एक अन्य नोट के हवाले से लिखा है कि पीएम मोदी के रुपे को बढ़ावा दिए जाने की वजह से न्यूयॉर्क में स्थित कंपनी (मास्टरकार्ड), जो पूरी दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी पेमेंट प्रोसेसर है, को काफी निराशा हुई है।

मास्टरकार्ड ने अमेरिकी सरकार से यह प्रस्ताव रखने को कहा कि भारत सरकार रुपे से होने वाली आमदनी को लेकर भ्रम फैलाने के साथ-साथ इसे विशेष प्रयास के तहत बढ़ावा दे रही है, जिसे रोका जाना चाहिए।
रॉयटर्स द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मास्टरकार्ड ने कहा है कि वह भारत सरकार के कदम का पूर्ण समर्थन करती है और देश में काफी ज्यादा निवेश कर रही है लेकिन कंपनी ने यूएसटीआर को लिखे गए अपने नोट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।

कंपनी में वाइस-प्रेसिडेंट साहरा इंग्लिश ने भी रॉयटर्स के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यूएसटीआर ने भी इस मामले में किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके साथ ही यह भी साफ नहीं हो पाया है कि अमेरिकी एजेंसी ने मास्टरकार्ड की चिंता को लेकर भारत सरकार से कोई बात की है या नहीं। इस बारे में वीजा ने भी रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया है। यही नहीं पीएमओ से भी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
-एजेंसी

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