ISRO के पिटारे में मंगल से शनि तक के लिए कई प्रोजेक्‍ट, तेजी से काम चालू

बेंगलुरु। चंद्रयान-2 की आंशिक असफलता के बाद भी ISRO (भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी) के हौसले बुलंद हैं। आगामी एक दशक में ISRO के पिटारे में मंगल ग्रह से लेकर शनि ग्रह तक के लिए कई महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट हैं जिन पर तेजी से काम चल रहा है। आलम यह है कि ISRO के पास अभी विक्रम लैंडर की असफलता का गम भुलाने का भी समय नहीं है। अंतरिक्ष एजेंसी अगले कुछ वर्षों में सूर्य, मंगल, शुक्र ग्रह के लिए अपने उपग्रह भेजने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा इसरो वर्ष 2024 में एक बार‍ फिर से चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा की सतह को छूने का प्रयास करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसरो सेंटर से दिए संदेश में इसी की तरफ इशारा किया था। पीएम ने कहा था, ‘जब ISRO के पास सक्सेस की इनसाइक्लोपीडिया हो तो 1-2 रुकावट हमें नहीं रोक सकती है। साथियो हम अमृत की संतान हैं। अमृत की संतान के लिए न कोई रुकावट है न ही कोई निराशा है। हमें पीछे मुड़कर निराश नहीं होना है। हमें सबक लेना है, सीखना और आगे ही बढ़ते जाना है। हमें रुकना नहीं है। हम निश्चत रूप से सफल होंगे।’ पीएम मोदी ने कहा कि हम अगले हर प्रयास में कामयाबी साथ लाएंगे। हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। आइए जानते हैं कि ISRO के पिटारे में अभी कौन-कौन से बड़े प्रेाजेक्‍ट हैं….
गगनयान की तैयारी जोरों पर
ISRO ने 6 सितंबर को अपने विक्रम लैंडर से संपर्क खो दिया लेकिन उसी दिन भारतीय वायुसेना ने घोषणा की कि उसने अंतरिक्ष में जाने के लिए 25 टेस्‍ट पायलटों के पहले बैच का चयन कर लिया है। इनमें से 3 चुने गए पायलटों को रूस भेजा जाएगा ताकि वे ISRO के गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के रूप में ट्रेनिंग हासिल कर सकें। ISRO गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्षयात्रियों को दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में भेजेगा। रूस इस मिशन में भारत की मदद कर रहा है। इसके तहत रूस स्‍पेस सूट मुहैया कराएगा और अंतरिक्ष यात्रियों को स्‍पेस कैप्‍सूल के अंदर एक सप्‍ताह तक रहने का तरीका बताएगा।
सूरज के रहस्‍य से पर्दा उठाएगा ISRO
वर्ष 2020 तक ISRO आदित्‍य एल-1 प्रोब लॉन्‍च करेगा। सूर्य की बाहरी परत का अध्‍ययन करने के लिए यह पहला पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध मिशन होगा। इसके बाद ISRO शुक्रयान-1 भी लॉन्‍च करेगा। वर्ष 2023 तक लॉन्‍च किया जाने वाला शुक्रयान शुक्र ग्रह के करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई से उसका अध्‍ययन करेगा। इसरो वर्ष 2022 से 2023 के बीच मंगलयान-2 लॉन्‍च करेगा जो ‘लाल ग्रह’ का अध्‍ययन करेगा।
अंतरिक्ष में ISRO की वेधशाला, स्‍पेस स्‍टेशन
ISRO वर्ष 2020 के आसपास एस्‍ट्रोसैट-2 अंतरिक्ष वेधशाला लॉन्‍च करना चाहता है जो एस्‍ट्रोसैट-1 की जगह लेगा। यह वेधशाला अंतरिक्ष में रहकर ब्रह्मांड के उत्‍पत्ति के रहस्‍यों का पता लगाएगा। ISRO का फोकस नए ग्रहों की खोज करने पर रहेगा। भारत वर्ष 2030 के आसपास अंतरिक्ष में अपना एक स्‍पेस स्‍टेशन बनाना चाहता है जहां पर रहकर अंतरिक्ष यात्री कुछ दिनों तक प्रयोग करेंगे। यह अंतरिक्ष स्‍टेशन भविष्‍य में मंगल या शुक्र ग्रह भेजे जाने वाले मिशनों के लिए लॉन्‍च पैड का काम करेगा।
चंद्रयान-3, भारत-जापान मिलकर करेंगे काम
चंद्रयान-2 की आंशिक असफलता से ISRO निराश नहीं है और वर्ष 2024 में वह चंद्रयान-3 की मदद से दोबारा चांद पर उतरने का प्रयास करेगा। ISRO के साथ इस बार जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्‍सा भी होगी। हाल ही में जापान का एक उपग्रह हयाबुसा-2 सफलतापूर्वक एक क्षुद्रग्रह पर उतरा है जो यह दर्शाता है कि जापानी एजेंसी तकनीकी रूप से इस काम में महारत रखती है। माना जा रहा है कि चंद्रयान-3 के लिए जापान रॉकेट और लूनर रोवर मुहैया कराएगा जबकि लैंडर ISRO का होगा। लूनर रोवर चद्रमा की सतह में खुदाई करेगा और वैज्ञानिक परीक्षण करेगा। इस मिशन का लक्ष्‍य चांद पर बस्‍ती बसाने के लिए एक सही स्‍थान का चुनाव करना है।
-एजेंसियां

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