2050 तक मुंबई के कई इलाकों का 70 प्रतिशत भाग डूब सकता है पानी में

नई दिल्‍ली। क्लाइमेट में तेजी से हो रहे बदलाव का सबसे बुरा प्रभाव मुंबई पर पड़ सकता है। यदि समय रहते हम सतर्क नहीं हुए, तो 2050 तक मुंबई के कोलाबा, सैंडहर्स्ट रोड, कालबादेवी व ग्रांट रोड एरिया का 70 प्रतिशत भाग पानी में डूब सकता है। वहीं सबसे पॉश कफ परेड का 80 प्रतिशत भाग पानी में समा सकता है।
यह चेतावनी बीएमसी कमिश्नर आईएस चहल ने दी है। चहल ने कहा कि पिछले 15 महीने में मुंबई में तीन बार साइक्लोन आ चुका है। वर्ष 1891 के बाद 3 जून 2020 को पहली बार मुंबई में निसर्ग तूफान आया था जिससे काफी नुकसान हुआ था। उसके बाद से दो और साइक्लोन का सामना मुंबई कर चुकी है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्लाइमेट चेंज का मुंबई पर कितना बुरा असर पड़ रहा है।
20 सितंबर तक मांगे गए सुझाव
शुक्रवार को बीएमसी मुख्यालय में राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने मुंबई क्लाइमेट चेंज प्लान का शुभारंभ किया। साथ ही वेबसाइट भी लॉन्च की। जिस पर लोग 20 सितंबर तक अपने सुझाव दे सकते हैं। उसके बाद नवंबर तक मुंबई क्लाइमेट चेंज प्लान की घोषणा की जाएगी।
मुंबई बचाने के लिए आगे आएं संस्थाएं
इस दौरान कमिश्नर चहल ने कहा कि पिछले कुछ समय में मुंबई के क्लाइमेट में काफी बदलाव देखने को मिला है। दो घंटे में सौ मिमी से अधिक बारिश, समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें, महानगर में जलजमाव, तापमान में वृद्धि, वायु प्रदूषण व अन्य प्रदूषण काफी तेजी से बढ़े हैं इसलिए मुंबई को बचाने के लिए राज्य सरकार, बीएमसी, एमएमआरडीए व अन्य संस्थाओं को आगे आना होगा।
बेमौसम बरसात ने बढ़ाई परेशानी
चहल ने कहा कि बेमौसम बरसात, साइक्लोन, तापमान में वृद्धि से मुंबई का भविष्य खतरे में है। यहां हवा, पानी,प्रदूषण, जमीन व अन्य विषयों पर सजगता जरूरी है। क्लाइमेट चेंज का असर यह है कि यहां साधारणतया जून, जुलाई व अगस्त में अधिकतर बारिश होती है लेकिन इस बार 17 मई को ही 214 मिमी बारिश हो गई। बरसात बढ़ने के साथ ही प्रतिदिन 100 से 200 मिमी से अधिक बारिश होने लगी है जबकि आमतौर पर 70 से 80 मिमी बारिश अपेक्षित होती है।
एक दशक में बढ़ा तापमान
महानगर में एक दशक में तापमान में वृद्धि हुई है। अब अक्टूबर व नवंबर में तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। यहां तक कि रात में भी तापमान बढ़ रहा है। एक दशक पहले 35 डिग्री सेल्सियस तक रहने वाला तापमान, अब 35 से 40 डिग्री के बीच पहुंचने लगा है। 45 डिग्री सेल्सियस को खतरनाक माना जाता है। चहल ने कहा कि इसका सबसे बड़ा उदाहरण साकीनाका मेट्रो स्टेशन के पास बढ़ा तापमान है। यहां वर्ष 2005 से 2010 के बीच तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहता था, जो अब बढ़कर 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
गाड़ियों से सबसे ज्यादा प्रदूषण
मुंबई में सर्वाधिक प्रदूषण गाड़ियों से फैल रहा है। यहां 24 प्रतिशत प्रदूषण सड़क पर चलने वाली गाड़ियों से फैल रहा है। पर्यावारण मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मुंबई में जगह-जगह इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग लगाई जा रही है। वहीं चहल ने कहा कि पर्यावरण को संतुलित करने के लिए मुंबई में जगह-जगह मियावाकी वन लगाए जा रहे हैं। इस प्रॉजेक्ट के तहत अब तक 2 लाख वृक्ष लगाए जा चुके हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि यहां जंगल व ग्रीन जोन कम हो रहे हैं। जिससे पर्यावरण का खतरा बढ़ रहा है।
-एजेंसियां

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