ट्रैक्‍टर रैली में हिंसा को लेकर भ्रामक ट्वीट करने पर कई अकाउंट्स सस्‍पेंड

नई दिल्‍ली। माइक्रो-ब्‍लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने दिल्‍ली में किसान परेड को लेकर कथित रूप से भ्रामक ट्वीट करने वाले कुछ हैंडल्‍स पर भारत में रोक लगा दी है। जांच एजेंसियों की मांग पर ऐसा किया गया है। इसमें ‘द कारवां’ नाम की मैगजीन समेत कुछ पॉलिटिकल एक्टिविस्‍ट्स के अकाउंट्स शामिल हैं। ट्विटर ने जिन हैंडल्‍स पर रोक लगाई है, उनमें ‘किसान एकता मोर्चा’ का अकाउंट भी शामिल है। इसी को किसान नेताओं ने ट्विटर पर अपना आधिकारिक अकाउंट बताया था। इन सभी के प्रोफाइल पर क्लिक करने पर लिखकर आ रहा है कि संबंधित अकाउंट पर ‘एक कानूनी मांग के जवाब में भारत में रोक लगा दी गई है।’ किसान रैली के हिंसक होने के बाद 27 जनवरी को ट्विटर ने कहा था कि उसने 300 से ज्‍यादा अकाउंट्स को सस्‍पेंड कर दिया था।
किनके अकाउंट्स पर लगी है रोक?
मोहम्‍मद सलीम, CPI (M) के पूर्व राज्‍यसभा सांसद
शशि शेखर, प्रसार भारत के सीईओ
सुशांत सिंह, एक्‍टर
आरती, आम आदमी पार्टी
हंसराज मीणा, पॉलिटिकल ऐक्टिविस्‍ट
संजुक्‍ता बासु, पॉलिटिकल ऐक्टिविस्‍ट
मोहम्‍मद आसिफ खान, पॉलिटिकल ऐक्टिविस्‍ट
द कारवां, मैगजीन
किसान एकता मोर्चा
इनके अलावा ट्विटर ने कुछ ट्रोल/अनोनिमस अकांउट्स पर भी रोक लगाई है। दूसरी तरफ, सरकारी ब्रॉडकास्‍टर प्रसार भारती ने अपने सीईओ का ट्विटर अकाउंट करने पर ट्विटर से सफाई मांगी है।
दिल्‍ली पुलिस ने भेजा ताजा नोटिस
किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं समेत 50 लोगों को ताजा नोटिस भेजा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 44 लोगों के विरुद्ध नोटिस जारी किया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने कई लोगों की पहचान की है और उन्हें नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। पुलिस के अनुसार हिंसा के दौरान इस्‍तेमाल हुए कुछ ट्रैक्टरों की पहचान की गई है और उनके मालिकों को नोटिस भेजा गया है। पुलिस ने कहा कि नोटिस भेजने में इसलिए समय लग रहा है क्योंकि कई लोग दिल्ली के निवासी नहीं हैं और उनके पते पर पत्र भेजे जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के टीमें पंजाब और हरियाणा समेत राष्ट्रीय राजधानी के बाहर कई जगहों पर जांच कर रही हैं। हिंसा में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस उन लोगों की तलाश भी कर रही है जिन्होंने लाल किले पर झंडा लगाया था। फोरेंसिक टीमें सबूत इकट्ठा करने के लिए गाजीपुर, लाल किला और आईटीओ भी गए थे। पुलिस ने कहा कि उन्होंने गांठ बंधी एक बड़ी सी रस्सी समेत कई साक्ष्य एकत्र किए हैं। उन्होंने कहा कि रस्सी का इस्तेमाल लाल किले पर चढ़ने के लिए किया गया था। शनिवार तक पुलिस को जनता से 1,700 वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज भी प्राप्त हुए जिनसे हिंसा से संबंधित जांच में सहायता मिल सकती है।
-एजेंसियां

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