प्रकाशन संस्‍थान में कमीशनिंग एडिटर बने मनोज व धर्मेंद्र

नई दिल्ली। हिंदी के दो अत्यंत प्रतिष्ठित प्रकाशनों–लोकभारती प्रकाशन (इलाहाबाद) और राधाकृष्ण प्रकाशन (नई दिल्ली) ने बदले समय के अनुरूप अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में इन दोनों विशिष्ट प्रकाशनों ने पेशेवराना रूख अपनाते हुए महत्त्वपूर्ण नियुक्तियाँ की हैं जो कि हिंदी में एक नई शुरुआत भी है और व्यस्थित बदलाव का इशारा भी। ज्ञात हो कि ये दोनों प्रकाशन एक अरसे से राजकमल प्रकाशन समूह में शामिल हैं, लेकिन इनका अपना अस्तित्व और अपनी ख़ासियत है।

60 वर्ष पहले स्थापित लोकभारती प्रकाशन ने कथाकार-सम्पादक मनोज कुमार पांडेय को, और 55 वर्ष पहले स्थापित राधाकृष्ण प्रकाशन ने पत्रकार-सम्पादक धर्मेंद्र सुशांत को कमीशनिंग एडिटर नियुक्त किया है।

मनोज कुमार पांडेय समकालीन पीढ़ी के चर्चित कथाकार हैं। वे लंबे अरसे से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की वेबसाइट ‘हिंदी समय’ की सम्पादकीय टीम से जुड़े हुए थे। वे हाल ही में प्रकाशित अपने नवीनतम कहानी संग्रह ‘बदलता हुआ देश’ से चर्चा में हैं। उनकी कई कहानियों के नाट्य-मंचन हुए हैं। कुछ पर फिल्में भी बनी हैं। उन्होंने कुछ महत्त्वपूर्ण किताबों का संपादन भी किया है। कथा-साहित्य, कविता, आलोचना के साथ-साथ अन्य ज्ञानानुशासनों की किताबों में दिलचस्पी वाले मनोज जी अब लोकभारती की नई पीढ़ी तैयार करेंगे।

धर्मेन्द्र सुशांत काफ़ी समय से साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। वे कई प्रकाशनों में अंशकालिक संपादक तो रहे ही, कुछ समय ‘समकालीन जनमत’ पत्रिका से भी जुड़े रहे। ‘प्रभात ख़बर’ से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री सुशांत ‘हिंदुस्तान’ अख़बार की सम्पादकीय टीम में लम्बी पारी के बाद अब राधाकृष्ण से जुड़ रहे हैं। वे अपनी पुस्तक-समीक्षाओं के लिए चर्चित हैं। पुस्तक-सम्पादन और दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह उनका विशेष शौक है। वे भारतीय भाषाओं के साहित्य के साथ विभिन्न कलाओं, ख़ासकर चित्रकला, में गहरी दिलचस्पी रखते हैं।

लोकभारती प्रकाशन क्लासिक लेखकों की कृतियों, अकादमिक ग्रंथों, अपने कोशों और विभिन्न भाषाओं–ख़ासकर बांग्ला–से अनूदित स्तरीय कथा साहित्य के लिए विश्वसनीय प्रकाशन रहा है।

राधाकृष्ण प्रकाशन क्लासिक भारतीय कृतियों के अनुवाद के साथ-साथ, दलित और आदिवासी साहित्य को, ज्ञानानुशासनों की विभिन्न आवश्यकताओं से जुड़ी किताबों के प्रकाशन के साथ-साथ श्रेष्ठ हिंदी लेखन को भी बराबर महत्व दिया है।
– Legend News

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