लखनऊ में मैंगो फेस्टिवल की शुरुआत, 24 जून तक चलेगा

यूं तो लखनऊ अपने कबाब के लिए प्रसिद्ध है लेकिन कबाब के साथ आपको आम का स्वाद चखने का भी मौका मिल रहा है। 17 जून से लखनऊ में मैंगो फेस्टिवल की शुरुआत हो चुकी है यहां आपको 700 तरह के अलग-अलग किस्म के आम चखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि इस मैंगो फेस्टिवल का आयोजन आम के बाग में ही किया जा रहा है। आम चखने के बाद आप लखनऊ के दूसरे जायके चखने के लिए भी जा सकते हैं। यहां हम आपको बताएंगे लखनऊ के उन शाही व्यंजनों के बारे में जिन्हे चखने के लिए लोग खास तौर पर लखनऊ जाते हैं।
लखनऊ में छठा मैंगो फेस्टिवल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में छठे मैंगो फेस्टिवल का आयोजन हो चुका है। यह 23-24 जून तक चलेगा। इसमें आप 700 तरह के आम चखने के साथ आम के बगीचे की सैर भी कर सकते हैं जिसका यहां खास तौर पर प्रबंध किया गया है। इसके अलावा यहां कव्वाली और तरह-तरह की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है। इसमें म्यूजिकल चेयर, तांगा और बैलगाड़ी और घुड़दौड़ के अलावा स्पून रेस का भी आयोजन किया गया। आम का स्वाद चखने के बाद आप लखनऊ के दूसरे जायके चखने के लिए निकल सकते हैं।
गलौटी कबाब
लखनऊ अपने कबाब के लिए प्रसिद्ध है ये गलौटी कबाब लखनऊ की पहचान है। इन्हें चखने के लिए लोग दूर-दूर से लखनऊ आते हैं। गलौटी का मतलब होता है आपके मुंह में घुलने वाला। ये कबाब मुंह में डालते ही घुल जाते हैं। लखनऊ में अगर आप जा रहे हैं तो गलौटी कबाब का स्वाद जरूर चखें।
बोटी कबाब
तंदूर में सिके मीट के पीस आपके मुंह में पानी भर लाएंगे। इन्हे बनाने में खास तरह की मुगलई रेसिपी का इस्तेमाल किया जाता है। यह लखनऊ के सबसे प्रसिद्ध कबाबों में से एक है।
लखनवी बिरयानी
लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता है और नवाबों के भोजन में बिरयानी का खास स्थान रहा है। इस बिरयानी को ताजा मसालों में पकाया जाता है फिर इसमें मेरिनेटिड मीट डाला जाता है। इसे बनाने का तरीका बेहद खास होता है और बनकर तैयार होने के बाद इसका स्वाद और खुशबू आपको मदहोश कर देगी। पुराने लखनऊ में ऐसी बिरयानी कई जगह मिल जाएंगी लेकिन किसी अच्छे रेस्तरां में ही इसका स्वाद चखें।
टोकरी चाट
चाट खाना अधिकतर भारतीयों को पसंद आता है लेकिन टोकरी चाट लखनऊ की विशेषता है। इसे बास्केट चाट भी कहा जाता है। टोकरी जितनी ज्यादा कुरकुरी होती है चाट उतनी ही अच्छी मानी जाती है। यह लखनऊ का प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड है।
पाया की निहारी
पाया की निहारी बकरे के पाए से बनाए जाते हैं यह बहुत आराम से और समय लेकर बनाई जाती हैं। इसमें खास लखनवी मसाले डाले जाते हैं। नाहर एक उर्दू का शब्द है जिसका मतलब होता है सुबह, इसलिए लखनऊ में इसे अधिकतर सुबह के समय नाश्ते में खाया जाता है।
-एजेंसी

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