अनसुनी कहानियों की संघर्ष गाथा सुन खास हो गईं ममता और वंदना

आगरा। अनसुनी कहानियों की संघर्ष गाथा सुन, शहर की एक दर्जन ऐसी महिलाएं आम से खास हो गईं, जो सब्जी, दूध बेचने से लेकर साइकिल ठीक करने का काम कर रही हैं। इन महिलाओं की मेहनत से ही परिवार में दिन और रात का चूल्हा जल रहा है। महिलाओं के हाथ जब सम्मान के रूप में स्मृति चिह्न दिए गए, तो आंखें खुशी से नम हो गईं। सम्मानित होने वाली महिलाओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघर्ष के बाद ही जीवन की सफलता का रास्ता खुलता है। मंगलवार को एक पहल संस्था की ओर से अनसंग क्वीन सम्मान समारोह के तहत उन महिलाओं को सम्मानित किया गया, जो पिछले कई सालों से परचून की दुकान, बुटिक की दुकान, आर्टिफिशयल ज्वेलरी बनाने की मजदूरी कर रही हैं।

जीवन में पहली बार सम्मान पाने वाली वंदना चुनेजा यह कहते हुए भावुक हो गईं कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा सम्मान होगा। मेरी मेहनत ने ही मुझे इस लायक बनाया कि आज मुझे सम्मानित किया गया है। इससे पहले समारोह का शुभारंभ समाजसेवी पूनम सचदेवा, प्रियंका बंसल, एक पहल संस्था की अध्यक्ष ईभा गर्ग, सचिव मनीष राय और चंचल गुप्ता ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान धीरज अरोड़ा, अंकित खंडेलवाल, शिवांगी बंसल, बरखा राय आदि मौजूद रहे।

इनका हुआ सम्मान
समारोह में साइकिल मिस्त्री राजकुमारी, बुटीक संचालिका वंदना चुनेजा, दूध विक्रेता शीला देवी और पान देवी, आर्टिफिशयल ज्वेलरी की मजदूर संगीता राठौर, स्क्रीन प्रिंटिंग करने वाली सलमा, परचून की दुकान चलाने वाली शीला देवी, जूता सिलाई का काम करने वाली गुड़िया देवी, सब्जी बेचने वाली ममता देवी, कपड़े सिलाई का काम करने वाली रीना देवी दिव्यांग रमा देवी और मसाला पीसने का काम करने वाली कमलेश को अनसंग क्वीन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

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