माल्‍या ने पीएम को पत्र लिखकर कहा, मुझे धोखेबाजों का ‘पोस्टर बॉय’ बना दिया है

नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपना पक्ष सामने रखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह बैंकों का बकाया देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें बैंक के साथ फ्रॉड करने वाले ‘पोस्टर बॉय’ के तौर पर पेश किया जा रहा है। यूके में एक बयान जारी कर माल्या ने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री दोनों को 15 अप्रैल 2016 को पत्र लिखा था और अब मैं चीजों को सही संदर्भ में पेश करने के लिए इन पत्रों को सार्वजनिक कर रहा हूं।’ माल्या ने कहा कि पीएम या वित्त मंत्री दोनों में से किसी ने भी इसका जवाब नहीं दिया।
आपको बता दें कि शराब कारोबारी 2016 में यूके भाग गया था और अब वह मामले का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किए जाने से बचने की पूरी कोशिश कर रहा है। भारी भरकम लोन और मनी लॉड्रिंग केस में 62 वर्षीय माल्या भारत में वांछित है। जब बैंकों के एक समूह ने उससे 9,000 करोड़ वापस लेने के लिए प्रयास शुरू किए तभी वह भारत से बाहर चला गया।
माल्या ने कहा, ‘मैं सम्मानपूर्वक कहता हूं कि मैंने सरकारी बैंकों के साथ अपने बकाए को देने के पूरे प्रयास किए हैं। अगर राजनीति से प्रेरित कोई फैक्टर इसमें शामिल होता है मैं कुछ भी नहीं कह सकता हूं।’ विजय माल्या ने कनार्टक उच्च न्यायालय से उसे (माल्या) व उसकी स्वामित्व वाली कंपनी यूबीएचएल को न्यायिक देखरेख में उनकी संपत्तियों को बेचने देने व सरकारी बैंकों सहित लेनदारों का भुगतान करने की अनुमति मांगी है। माल्या ने मंगलवार को जारी पत्र में कहा है, ‘यूबीएचएल (यूनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग लिमिटेड) और मैंने 22 जून को कनार्टक उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर किया है, जिसमें करीब 13,9०० करोड़ रुपये की उपलब्ध संपत्ति बेचने की अनुमति देने का जिक्र है।’
माल्या ने अदालत से न्यायिक देखरेख में उसकी संपत्तियों को बेचने की अनुमति देने और लेनदारों व सरकारी बैंकों का कर्ज भुगतान करने देने का आग्रह किया है। शराब कारोबारी माल्या (62) देश से मार्च 2०16 से फरार है। वह भारतीय अदालतों व कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा विभिन्न मामलों के मुकदमे में पेश होने के सम्मन के बावजूद लंदन में है। कर्ज की वसूली को दीवानी मामला बताते हुए माल्या ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंकों के बकाए को निपटाने की उनकी मंशा के बावजूद उन्होंने उनके मामले में आक्रामक कार्यवाही कर इसे आपराधिक बना दिया है।

-एजेंसी

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