Maldives: इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे मोदी, सर्वोच्च रैंकिंग वाले अतिथि का दर्जा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Maldives के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए नेशनल स्टेडियम पहुंच गए हैं। सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च रैंकिंग वाला अतिथि बनाया गया है। वहीं इस अवसर पर चीन की ओर से वहां के सांस्कृतिक और पर्यटन मंत्री ही हिस्सा ले रहे हैं। बता दें कि Maldives में चीन समर्थक नेता अब्दुल्ला यामीन को हराने के बाद सोलिह ने स्पष्ट कहा था कि वह इंडिया फर्स्ट पॉलिसी अपनाएंगे, जिसका असर इस अतिथि सूची पर भी नजर आ रहा है।
Maldives हमारा सबसे निकट का हिंद महासागरीय क्षेत्र का देश है और भारत की सामुद्रिक क्षेत्र से सुरक्षा को देखते हुए काफी अहम स्थान रखता है इसलिए प्रधानमंत्री के मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद के शपथ ग्रहण में पहुंचने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोदी की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पिछले वर्षों में भारत और Maldives के बीच बिगड़े संबंध अब सुधर रहे हैं। चीन की तरफ मालदीव का झुकाव भारत की कुछ प्रमुख चिंताओं में से एक रहा है। सोलिह की टीम चीन के लाखों डॉलर के निवेश की भी समीक्षा कर रही है। ऐसे में अब भारत को मालदीव में अपने लिए एक मौका दिख रहा है। भारत ने सोलिह को आश्वस्त किया है कि वह किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है।
भारत ने कुछ साल पहले मालदीव को 75 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन दी थी। अधिकारियों के मुताबिक संबंध खराब होने तक इसका केवल एक तिहाई ही इस्तेमाल हो पाया था। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और मालदीव मॉनिटरी अथॉरिटी के बीच करंसी बदलने को लेकर भी समझौता है, जो वित्तीय स्थिरता में मदद कर सकती है।
भारत और मालदीव
मालदीव द्वीपों का देश है। केरल के समुद्र तट से इसकी दूरी 250-300 मील की दूरी पर इसकी सीमाएं शुरू हो जाती हैं। यह 26 द्वीपों का समूह है और दो-ढाई घंटे की हवाई यात्रा से यहां पहुंचा जा सकता है। सामरिक दृष्टिकोण से मालदीव का काफी महत्व है। यहां से हिन्द महासागर क्षेत्र में भारतीय समुद्र तटों तक सीधी निगरानी रखी जा सकती है इसलिए भारत और मालदीव का रिश्ता रणनीतिक दृष्टि से हमेशा से महत्व का रहा है। भारत हमेशा मालदीव को सहायता भी देता आया। युद्धपोत, हेलीकाप्टर, रेडार आदि। मालदीव की शांति और स्थिरता भारत के लिए मायने रखती है। पिछले कुछ साल से मालदीव में शुरू हुए अनिश्चितता के वातावरण ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी थी।
प्रधानमंत्री दे सकते हैं सौगात
राष्ट्रपति सालेह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री मालदीव को सौगात दे सकते हैं। वह भारत द्वारा मालदीव की शांति, स्थिरता तथा उसके विकास में भारत के योगदान की पहल कर सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी मालदीव को लेकर काफी संवेदनशील हैं। भारत का हमेशा से मानना है कि शांतिपूर्ण और स्थिर मालदीव क्षेत्र के लिए आवश्यक है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी मालदीव को कुछ आर्थिक सहायता देने का भी प्रस्ताव कर सकते हैं।
-एजेंसियां

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