घुटनों पर आया मलेशिया: बोला, हम भारत से नहीं टकरा सकते

नई दिल्‍ली। जम्मू-कश्मीर और नागरिकता संशोधन कानून पर टिप्पणी के बाद भारत के एक्शन से घबराकर मलेशिया ने यह कहकर समझौते के संकेत दिए हैं कि हम छोटे देश हैं और भारत के खिलाफ बदले की कार्यवाही नहीं कर सकते।
भारत की ओर से पाम ऑइल के आयात पर रोक लगाए जाने के बाद से मलेशिया को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्यों बैकफुट पर आया मलेशिया
पाम ऑइल से आगे बढ़ती लड़ाई तो होता बड़ा नुकसानभारत ने अब तक मलेशिया से पाम ऑइल के आयात को ही टारगेट किया है। भारत ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कहा था कि उसने अपनी घरेलू इंडस्ट्री के हित में यह कदम उठाया है। लेकिन मलेशिया को इससे करारा झटका लगा क्योंकि उसके कुल पाम ऑइल निर्यात का एक चौथाई हिस्सा भारत ही आयात करता रहा है। हालांकि मलेशिया से होने वाले आयात में पाम ऑइल की हिस्सेदारी महज 13.38% ही थी लेकिन यदि यह विवाद बढ़ता तो फिर लड़ाई मिनिरल फ्यूल और मिनिरल ऑइल्स तक जा सकती थी। इसके चलते मताहिर मोहम्मद ने पीछे हटने में ही भलाई समझी।
मलेशिया पर दी इंडोनेशिया को तरजीह
भारत ने बीते 5 सालों में मलेशिया से पाम ऑइल के आयात में लगातार कमी की है और उसके मुकाबले इंडोनेशिया को तरजीह दी है। इंडोनेशिया न सिर्फ पाम ऑइल का सबसे बड़ा उत्पादक है बल्कि कम लगात में भी उत्पादन करता है। शायद यही वजह है कि भारत ने बीते एक साल में इंडोनेशिया से पाम ऑइल के इंपोर्ट को लगभग दोगुना कर दिया है। जनवरी 2019 में भारत 3 लाख टन पाम ऑइल का आयात इंडोनेशिया से करता था, जो दिसंबर 2019 तक बढ़कर 6 लाख टन के करीब हो गया। दूसरी तरफ 2014-15 से 2018-19 तक मलेशिया से इंपोर्ट में 42.5% की कमी आ गई।
मलेशिया के लिए 7वां सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है भारत
मलेशिया के लिए भारत 7वां सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, जबकि भारत के लिए मलयेशिया 17वां सबसे बड़ा मार्केट है। ऐसे में यदि कारोबार के मामले में भारत कोई और एक्शन लेता है तो सीधे तौर पर मलेशिया को ही खामियाजा उठाना पड़ेगा। पिछले साल सितंबर में ही भारत सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल के आयात पर 5 पर्सेंट ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया था। तब से ही मलेशिया में पाम ऑइल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही थी।
-एजेंसियां

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