महाश्‍वेता देवी- जिनके कलम से जन्‍मी ‘हजार चौरासी की मां’

नई दिल्ली। आज महाश्‍वेता देवी के जन्‍मदिन पर हम उन्‍हें हजार चौरासी की मां के रूप में याद करते हैं तो ऐसे साहित्‍यकार के रूप में भी जो साहित्‍य के साथ साथ अपनी रचनाओं की धमक फिल्‍म जगत में बराबर रखे रहे।

Google ने भी अपना डूडल इसी बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी को समर्पित किया है. गूगल ने Mahasweta Devi’s 92nd Birthday शीर्षक से डूडल बनाया है. महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ. उनके पिता मनीष घटक जाने माने कवि और उपन्यासकार थे. वे कल्लोल आंदोलन से भी जुड़े हुए थे. वे फिल्ममेकर रित्विक घट के भाई थे.

महाश्वेता देवी ने 1936 से 1938 तक शांतिनिकेतन में शिक्षा हासिल की थी. उन्होंने बीए और एमए इंग्लिश में कर रखा था. वे न सिर्फ बेहतरीन लेखिका थीं बल्कि उन्होंने आदिवासियों अधिकारों के लिए भी काम किया. उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और रेमन मेगसायसायर पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है.

जितना नाम उनका साहित्य के क्षेत्र में है, उतना ही फिल्मी दुनिया में भी है क्योंकि उनकी कई कहानियों पर फिल्में बन चुकी हैं. आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसी फिल्मों के बारे मेः

संघर्ष (1968):

दिलीप कुमार और वैजयंती माला की ये फिल्म महाश्वेता देवी की कहानी ‘लायली असमानेर आयना’पर आधारित है. फिल्म को जबरदस्त कामयाबी मिली. फिल्म का “मेरे पैरों में घुंघरू पहना दो…” खूब लोकप्रिय हुआ था. इस फिल्म का डायरेक्शन हरनाम सिंह रवेल ने किया है.

रूदाली (1993):

डिंपल कपाड़िया ने इस फिल्म में लीड रोल किया था और उन्हें इसके लिए नेशनल फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया था. उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला था. ये कहानी राजस्थान की रोने वाली महिलाओं की जिंदगी पर आधारित थी, इस फिल्म को खूब पसंद किया गया था. फिल्म को कल्पना लाजिमी ने डायरेक्ट किया है. ये भी महाश्वेता देवी की कहानी पर आधारित थी.

हजार चौरासी की मां (1998):

ये फिल्म महाश्वेता देवी के इसी नाम से उपन्यास पर आधारित है. फिल्म की कहानी 1970 के नक्सली आंदोलन पर आधारित है. फिल्म में जया बच्चन लीड रोल में थीं, और फिल्म गोविंद निहलानी ने डायरेक्ट किया था. फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुई थी.

-एजेंसी