महाराष्‍ट्र पुलिस ने कहा, पकड़े गए लोगों के माओवादियों से गहरे संबंधों के हैं पुख्‍ता सबूत

मुंबई। माओवादियों के ‘शुभचिंतकों’ के खिलाफ छापेमारी की कार्यवाही पर देशभर में छिड़ी बहस के बीच महाराष्‍ट्र पुलिस ने अपनी कार्यवाही को जायज ठहराया है। महाराष्‍ट्र के एडीजी (कानून और व्‍यवस्‍था) परमवीर सिंह ने शुक्रवार को कहा कि माओवादियों के खिलाफ कार्यवाही सबूतों के आधार पर की गई है। यही नहीं, छापे के दौरान कई महत्‍वपूर्ण सबूत मिले हैं। पुलिस ने आरोप लगाया कि माओवादियों की साजिश कानून-व्यवस्था को बिगाड़कर सरकार गिराने की थी। एक आतंकवादी संगठन भी माओवादियों के साथ इसमें शामिल था।
सिंह ने कहा कि रेड के दौरान बहुत सा साहित्य सीज किया गया है। उन्‍होंने कहा कि सबूतों के मुताबिक सीपीआई माओवादी की साजिश थी कि कानून-व्‍यवस्‍था को बिगाड़ा जाए और उसके बाद सरकार को पलटा जाए। एडीजी ने बताया कि छापेमारी की वीडियोग्राफी की गई है। सीज के बाद कॉपी आरोपियों को भी दी गई। पंचनामा सही तरीके से किया गया। परमवीर सिंह ने सुधा भारद्वाज की एक चिट्ठी भी पढ़ी जिसे उन्होंने कॉमरेड प्रकाश को लिखा था। कॉमरेड प्रकाश सेंट्रल कमेटी की तरफ से बात करते हैं।
परमवीर सिंह ने कहा, ‘8 जनवरी को जांच शुरू हुई। 6 मार्च को इस केस में दो नाम और जोड़े गए। ये नाम थे सुरेंद्र गाडलिन और रोना विल्सन के। जांच के बाद पुलिस जब इस नतीजे पर पहुंची की आगे की कार्यवाही हो सकती है तो 17 अप्रैल को 6 जगह पर छापे मारे गए। दिल्ली में रोना विल्सन, नागपुर में सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर ढवले के यहां मुंबई में और दूसरी जगह छापे मारे गए।’
उन्‍होंने कहा कि सबूतों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने कहा कि जांच में ऐसी जानकारी प्राप्त हुई थी कि बहुत बड़ी साजिश की जा रही थी जिसमें माओवादी संगठन शामिल रहे थे। इन आरोपियों के जरिए अपने गोल अचीव करने की कोशिश कर रहे थे। एक आतंकवादी संगठन भी माओवादियों के साथ इसमें शामिल था। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच 8 जनवरी से शुरू की गई थी। इसके बाद 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
एडीजी ने बताया कि अरेस्‍ट किए गए कवि वरवरा राव, अरुण पेरेरा, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और सुधा भारद्वाज के संबंध माओवादियों से साबित हुए हैं। इसके पर्याप्‍त सबूत मिले हैं। इसी सबूत के आधार पर कार्यवाही की गई है। सिंह ने संवाददाताओं के समक्ष वरवरा राव और रोना विल्‍सन के कई पत्र पेश कर दावा किया कि इन लोगों के माओवादियों के गहरे संबंध थे और वे माओवादियों को धन मुहैया कराते थे।
सिंह ने कहा, ‘माओवादियों की सेंट्रल कमेटी सीधा अपने जमीनी काडर से संपर्क नहीं करती है। उसके पासवर्ड प्रटेक्‍टेड संदेश कूरियर के माध्‍यम से जमीनी कार्यकर्ताओं को भेजे जाते थे। यह संदेश रोना विल्‍सल और गाडलिन के जरिए भेजा जाता था। पुणे पुलिस ने इन आरोपियों के हार्ड डिस्‍क से इस साक्ष्‍य को बरामद किया है। इस साक्ष्‍य के द्वारा यह स्‍पष्‍ट हुआ है कि जिन सात आरोपियों के नाम बाद में जोड़े गए, वे पूरे सबूतों के आधार पर जोड़े गए। इन सबूतों से यह पूरी तरह से साबित हो गया है कि सभी आरोपियों के माओवादियों से संबंध थे। पुलिस को हजारों दस्‍तावेज मिले हैं।’
-एजेंसी

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