माघी पूर्णिमा कल शन‍िवार को, लगायें पव‍ित्र नद‍ियों में डुबकी

नई द‍िल्ली। माघ मास के अंतिम दिन की तिथि को माघी पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बार माघी पूर्णिमा 27 फरवरी 2021 दिन शनिवार को पड़ रही है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का बहुत महत्व माना जाता है। माघी पूर्णिमा पर संयम से रहना, सुबह स्नान करना एवं व्रत, दान करना आदि नियमों का उल्लेख ग्रंथों में भी मिलता है।

माघी पूर्णिमा पर शनिवार को गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती के संगम में देश के कोने-कोने से आए संत-भक्त पुण्य की डुबकी लगाएंगे। इसी के साथ शिविरों में कीर्तन, कथाओं, यज्ञ, अनुष्ठानों की पूर्णाहुति हो जाएगी। साथ ही कामनाओं, संकल्पों की पूर्ति के लिए संगम की रेती पर मास पर्यंत कल्पवास पूरा हो जाएगा। इसी के साथ कर संत-भक्त विदा हो जाएंगे।

स्नान पर्व को देखते हुए मेला प्रशासन ने संगम समेत गंगा के आठ घाटों पर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। माघी पूर्णिमा स्नान का शास्त्रों और पुराणों में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान विष्णु स्वयं इस दिन गंगा में डुबकी लगाते हैं।

माघ में कल्पवास की परंपरा है। एक माह तक लोग संगम किनारे रहकर व्रत, संयम के साथ रहकर प्रतिदिन संगम में स्नान करते हैं और माघ पूर्णिमा के दिन कल्पवास पूर्ण करते हैं, इसलिए माघ पूर्णिमा को खास माना जाता है।

माघ पूर्णिमा के दिन दीपदान

माघ पूर्णिमा के दिन दीपदान का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सभी कलाओं के साथ खिलता है। इस दिन चंद्रमा की चांदनी का सीधा मन पर असर पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा और मन का सीधा संबंध होने के कारण इस दिन दीपदान करना मानसिक बीमारियों से मुक्ति दिलाता है। इसलिए अगर मन में कोई कमजोरी है तो माघ मास की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को दीपदान करना चाहिए।

दीपदान करते समय इस मंत्र का करें जाप-

यह श्लोक ऋग्वेद में वर्णित है। कहा जाता है कि दीपदान के वक्त इस मंत्र का जाप करने से मन मजबूत होता है और जातक में आत्मविश्वास आता है।

चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत.
श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत।
नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत.
पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकान् अकल्पयन्।।

– एजेंसी

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