एक मिनट में ‘मैगी’ भले ही न बने, लेकिन ‘हेमा जी’ सीएम बन सकती हैं…कोई शक !

मथुरा की सांसद और बॉलिवुड की स्‍वप्‍न सुंदरी हेमा मालिनी जी ने दो दिन पहले राजस्‍थान के बांसवाड़ा में दावा किया कि वह यदि चाहें तो एक मिनट के अंदर ‘मुख्‍यमंत्री’ बन सकती हैं।
सुन रहे हैं न योगी जी।
हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि एक मिनट में तो ‘मैगी’ भी नहीं बन सकती जी…फिर हेमा जी ‘सीएम’ कैसे बन सकती हैं।
मेरा मानना है कि ऐसा कहने वाले विरोधी (भाजपा के नहीं, हेमा जी के) रहे होंगे अन्‍यथा हेमा जी तो हेमा जी हैं, क्‍या नहीं कर सकतीं। गनीमत है उन्‍होंने यह नहीं कहा कि मैं चाहूं तो एक मिनट में ‘पीएम’ बन सकती हूं।
हेमा जी यहीं नहीं रुकीं। उन्‍होंने कहा, लेकिन मैं ऐसा चाहती नहीं हूं क्‍योंकि इससे मेरा “फ्री मूवमेंट” रुक जायेगा। मैं “बंध” जाऊंगी।
यू नो…”बंधन” उन्‍हें पसंद नहीं है। उससे ”आजादी” छिन जाती है।
हेमा जी की बात में तो दम है। उन्‍होंने शादी बेशक की, किंतु शादी के ”बंधन” में कभी नहीं बंधी। ”मूवमेंट” उनका शादी के बाद भी उतना ही ‘फ्री’ रहा, जितना कि शोले में ‘बसंती’ बनकर रहा था।
मथुरा की जनता को भी अब यह बात भली-भंति समझ में आ गई होगी कि उन्‍हें ‘बंधन’ नहीं ‘फ्री मूवमेंट’ पसंद है इसीलिए वह मथुरा की जनता के चाहने से नहीं, अपनी मर्जी से अपने संसदीय क्षेत्र में ‘मूव’ करती हैं।
बहरहाल, मुझे तो योगी जी की चिंता हो रही है। सोच रहा हूं कि ‘गोरखनाथ मठ’ के इंतजामात दुरुस्‍त करवा दूं क्‍योंकि पता नहीं कब हेमा जी चाह बैठें और कब योगी जी की ‘मठ’ वापसी तय हो जाए।
पीएम पद 2019 से पहले वेेकेंट नहीं है और मोदी जी का उसे फिलहाल छोड़ने का इरादा भी नजर नहीं आता क्‍योंकि वह मठ से नहीं हठ से आए थे, इसलिए हेमा जी ने यदि चाह लिया तो योगी जी के पास ‘मठ’ लौटने के अलावा कोई विकल्‍प बचेगा नहीं।
मेरी तो योगी जी को यही सलाह है कि प्रदेश को सुधारने का ख्‍वाब देखना छोड़ो और जैसे भी हो लोकसभा चुनावों तक का समय निकाल लो।
चूंकि 2019 का लोकसभा चुनाव हेमा जी मथुरा से ही दोबारा लड़ने का मन बना चुकी हैं इसलिए हो सकता है कि 2019 में उनकी निगाहें पीएम पद पर जा टिकें। भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार का पहला पीएम ‘बनारस’ से हो सकता है तो दूसरा ‘मथुरा’ से नहीं हो सकता है क्‍या। ऐसा हुआ तो योगी जी बाकी ढाई-तीन साल और यूपी के ‘मठाधीश’ बने रह सकते हैं।
हेमा जी ने बांसवाड़ा में यह भी बताया कि उन्‍होंने सांसद बनने से पहले भी पार्टी यानी भाजपा के लिए बहुत काम किया था।
जब सांसद बनने का मन किया तो एक मिनट में मथुरा की सांसद बन गईं। इसके बाद चार साल से अनवरत मथुरा का विकास करा रही हैं। मथुरा में यमुना तो वर्षों से बह रही थी किंतु ‘गंगा’…(विकास की) उन्‍होंने लाकर बहा दी।
मथुरा के लिए हेमा जी ‘भागीरथ’ बनकर आईं और भाजपा की जटाओं के माध्‍यम से विकास की गंगा उलझा कर मथुरा में बहा दी। दो दिन की बारिश में पूरे जिले ने देखी है वो विकास की गंगा।
यमुना पर याद आया। हेमा जी ने तो यमुना को प्रदूषण मुक्‍त कराने के भी बहुत प्रयास किए। अपने ‘फ्री मूवमेंट’ में से कुछ समय का ‘बंधन’ स्‍वीकार कर यमुना के किनारे अपने नृत्‍य का कार्यक्रम फिक्‍स किया लेकिन ‘यमुना पुत्रों’ ने एनजीटी से मिलकर उसमें रोड़ा अटका दिया।
‘यमुना पुत्र’ शायद तब नहीं जानते थे कि हेमा जी जिस काम की ठान लें, उसे रोक पाना किसी के बस में नहीं। उन्‍होंने मथुरा की वेटरनरी यूूनिवर्सिटी में न सिर्फ नृत्‍य का झक्‍कास कार्यक्रम किया बल्‍कि यह भी बताया कि यमुना को प्रदूषित करने और रखने में ऐसे ही ‘विघ्न संतोषियों’ का बड़ा हाथ है।
अब जबकि हेमा जी ने इस आशय का रहस्‍योद्घाटन किया है कि वह चाहें तो एक मिनट में मुख्‍यमंत्री बन सकती हैं, तब जाकर समझ में आया कि योगी जी क्‍यों उनके नृत्‍य कार्यक्रम में वेटरनरी यूूनिवर्सिटी दौड़े-दौड़े चले आए थे।
हमें भले ही अब जाकर पता लगा हो किंतु योगी जी तो जानते होंगे न कि हेमा जी जिस ‘मिनट’ चाह लेंगी, उस ‘मिनट’ उनकी ‘मठ’ वापसी हो जाएगी इसलिए बेचारे बरसाने से पहले वेटरनरी पहुंचे।
भाई! किसी को शक हो तो हो, मैगी चाहे दो मिनट से पहले न बनती हो, लेकिन मुझे पूरा विश्‍वास है कि हेमा जी चाह लेंगी तो एक मिनट में “सीएम” (अपने यूपी की) बन ही जायेंगी।
पीएम के काम की उन्‍होंने बांसवाड़ा में तारीफ की है जिससे साफ जाहिर है कि वह पीएम के काम से खुश हैं और पीएम की कुर्सी को 2018 में तो कोई खतरा नहीं है।
2019 की राम जानें। वह हेमा जी के मूड पर निर्भर करता है कि ‘सीएम’ बनना चाहती हैं या ‘पीएम’ बनना।
कुछ लोग यह कहते भी पाये गए हैं कि 2019 में यदि हेमा जी की ‘वन मिनट’ इच्‍छा ने जोर मारा तो संभव है ‘मोदी’ जी की जगह ‘योगी’ जी और योगी जी की जगह ‘हेमा’ जी दिखाई दें। सांसदी का क्‍या है, योगी जी ने भी त्‍यागी थी यूपी की खातिर 2017 में । 2019 में हेमा जी त्‍याग देंगी। वन मिनट…मैं अभी आता हूं। मेरी ‘मैगी’ उबल रही है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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