अहमदाबाद जेल में शिफ्ट किया जाएगा माफिया Atique Ahmed

प्रयागराज। प्रयागराज की नैनी जेल में बंद माफिया Atique Ahmed को गुजरात की अहमदाबाद जेल में शिफ्ट करने का रास्ता साफ हो गया है। गुजरात सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। शर्त यह है कि प्रदेश सरकार को पेशगी के तौर पर तीन लाख रुपये का ड्राफ्ट अहमदाबाद जेल के अधीक्षक के नाम देना होगा।
लखनऊ के व्यापारी से जेल में मारपीट करने के आरोपी अतीक अहमद पर कई अन्य गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 23 अप्रैल को अहमदाबाद जेल स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे।

इसके लिए राज्य सरकार ने गुजरात सरकार से अनुमति मांगी थी। गुजरात सरकार से गृह विभाग ने अतीक को अहमदाबाद जेल स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे लेकिन इसके लिए कुछ शर्ते लगाई हैं।

अतीक के खाने, कपड़े, बिस्तर, दवाइयां, बिजली, पानी आदि का खर्च यूपी सरकार को तिमाही वहन करना होगा। पहली बार एडवांस के रूप में तीन लाख रुपये का ड्राफ्ट अहमदाबाद जेल के अधीक्षक के नाम बनवाकर देना होगा।

यदि अतीक किसी अदालत में पेश करना होगा तो इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस दल उपलब्ध कराएगी। पुलिस की टीम जेल से अतीक को कस्टडी में लेकर जाएगी। पेशी के बाद उसे जेल प्रशासन को सुपुर्द कर दिया जाएगा।

माफिया डॉन से नेता बने अतीक अहमद को नहीं रखना चाहती हैं जेलें

अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पर 150 मुकदमे दर्ज हैं। अतीक के गिरोह को ‘अंतरराज्‍य गिरोह 227’ के रूप में लिस्‍टेड किया गया है, जिसमें 121 सदस्‍य शामिल हैं।

अपराध जगत में उनकी शुरुआत 1979 में इलाहाबाद में हत्‍या के मामले से हुई थी। उस समय अतीक की उम्र मात्र 17 साल की थी। अगले तीन दशक तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में उन्‍होंने एक गिरोह चलाया। प्रयागराज के एसपी (क्राइम) मनोज अवस्‍थी कहते हैं, ‘इलाहाबाद के खुल्‍दाबाद पुलिस स्‍टेशन में अतीक हिस्‍ट्री शीटर नंबर 39A हैं।’ पुलिस के डोजियर के मुताबिक अतीक के गैंग को ‘अंतरराज्‍य गिरोह 227’ के रूप में लिस्‍टेड किया गया है जिसमें 121 सदस्‍य शामिल हैं।

अतीक और अशरफ पर 150 मुकदमे दर्ज
इनमें अतीक का छोटा भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ शामिल है। इन दोनों कुख्‍यात भाइयों पर 150 मुकदमे दर्ज हैं। अतीक अहमद डॉन से 1989 में नेता हो गए। वर्ष 2004 तक वह छह बार चुनाव जीते। इसमें पांच बार वह इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक और एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे। अतीक ने निर्दलीय उम्‍मीदवार के रूप में राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी लेकिन बाद में उन्‍होंने समाजवादी पार्टी जॉइन कर ली। इसके बाद वह अपना दल चले गए।

-एजेंसी

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