कोलेस्ट्रॉल का कम स्तर भी हो सकता है हेमोरेजिक स्ट्रोक का कारण

कोलेस्ट्रॉल का ज्‍यादा कम स्तर हेमोरेजिक स्ट्रोक का कारण हो सकता है जबकि अब तक कोलेस्ट्रॉल को हार्ट का बड़ा कारण माना जाता है।
अभी तक यही कहा जाता रहा है कि कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम रखना चाहिए नहीं तो हार्ट संबंधी बीमारियां गिरफ्त में ले सकती हैं। यानी कोलेस्ट्रॉल के कम स्तर का सीधा संबंध दिल की सेहत से होता है लेकिन एक नयी स्टडी के अनुसार अगर कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा नीचे चला जाता है तो इससे हेमोरेजिक स्ट्रोक यानी रक्तस्रावी आघात लग सकता है। हेमोरेजिक स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। ब्लड न पहुंच पाने की वजह से मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीजन भी नहीं पहुंच पाती जिसकी वजह से दिमाग हमेशा के लिए डैमेज भी हो सकता है। यह स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में कोई रक्त कोशिका फट जाती है।
डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में ज्यादातर मौतों का मुख्य कारण हार्ट संबंधी बीमारियां हैं। सिर्फ अमेरिका ही नहीं, भारत में भी हार्ट के मरीजों की संख्या कम नहीं है। हर साल कई लोगों की हार्ट की बीमारियों के चलते मौत हो जाती है।
इस स्टडी में 96,043 ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिन्हें न तो कभी हार्ट अटैक हुआ और न ही स्ट्रोक या फिर कैंसर। स्टडी के शुरू होने से पहले सभी शामिल लोगों के एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को माप लिया गया था। इसके बाद 9 सालों को सालाना तौर पर सभी लोगों के कोलेस्ट्रॉल को मापा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 70 से 99mg/dL था, उनमें हैमरेज होने का खतरा अधिक था लेकिन जब यही स्तर 70mg/dL से नीचे चला गया तो यह खतरा और भी अधिक बढ़ गया। 50mg/dL के स्तर से कम कोलेस्ट्रॉल जिन लोगों में था, उनमें हैमरेजिक स्ट्रोक होने का खतरा 169 पर्सेंट बढ़ गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार इस स्टडी से कोलेस्ट्रॉल, हार्ट डिजीज और हैमरेज के मामलों से निपटने में काफी सहायता मिल सकती है।
पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रकाशित इस स्टडी में सामने आया कि 70mg/dL के नीचे एलडीएल या बैड कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में उन लोगों के मुकाबले हेमोरेजिक स्ट्रोक का खतरा अधिक पाया गया जिनका बेड कोलेस्ट्रॉल लेवल 100mg/dL कम लेकिन 70mg/dL से अधिक था। इस स्टडी के अनुसार कोलेस्ट्रॉल के अत्यधिक कम स्तर से हेमोरेजिक स्ट्रोक का खतरा 169 फीसदी अधिक होता है।
-एजेंसियां

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