भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कॉजिनिटिव बेहेवियरल थेरेपी के बारे में दी थी सलाह, तनाव से बचने को जरूरी

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भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कॉजिनिटिव बेहेवियरल थेरेपी के बारे में दी थी सलाह, तनाव से बचने को जरूरी

भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कॉजिनिटिव बेहेवियरल थेरेपी के बारे में दी थी सलाह, जो कि तनाव से बचने को जरूरी होती है। दरअसल हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जिसमें तनाव जिंदगी का एक हिस्सा बन गया है। ये न सिर्फ हमारी मानसिक सेहत को प्रभावित करता है बल्कि इससे बेचैनी और अवसाद जैसी समस्याएं भी सामनें आ रही हैं।

तनाव की वजह से लोग ऐसी चीजें खाना ज्यादा पसंद करने लगते हैं, जिनमें ट्रांसफैट, नमक और चीनी की अत्यधिक मात्रा होती है। इन चीजों से मोटापा, दिल के रोग, हाईपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियां होने की आशंका तो रहती ही है साथ ही तनाव व्यक्ति को तंबाकू, शराब व अन्य नशों के लिए भी प्रेरित करता है और नशे का आदी बना देता है।

इन कामों को करके आप रोजमर्रा के तनाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं

जब हमारा शरीर या दिमाग किसी जानी-पहचानी स्थिति के प्रति हमारी समझ के अनुसार प्रतिक्रिया देता है तो उससे तनाव उत्पन्न होता है। इसलिए तनाव से बचने के लिए या तो हालात को बदलना होगा या उसके प्रति समझ को या फिर शरीर को योग साधना से इस तरह ढालना होगा कि तनाव का आपके शरीर पर असर न पड़े।

हर स्थिति के दो पहलू होते हैं। समझ बदलने का अर्थ है कि किसी हालात को दूसरे नजरिए से देखना। यह बिल्कुल पानी के आधे भरे हुए गिलास को देखने की तरह है, उसे आधा भरा या आधा खाली भी माना जा सकता है। हो सकता है, हर हालत को बदलना संभव न हो। जैसे अगर आपकी नौकरी बेहद तनावपूर्ण है, लेकिन नौकरी छोड़ना हमेशा संभव नहीं होता।

हालात के बारे में दूसरे पहलू से सोचने को एलोपैथिक भाषा में कॉजिनिटिव बेहेवियरल थैरेपी कहा जाता है, यह शब्द अयुर्वेद से लिए गए हैं

भगवत गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इस कॉजिनिटिव बेहेवियरल थेरेपी के बारे में सलाह दी थी। काउंसलिंग के साथ ही हम शरीर को इस तरह से ढाल सकते हैं कि तनाव का हम पर असर ना हो। प्राणायाम, ध्यान और नियमित व्यायाम की कला सीख कर हम ऐसा कर सकते हैं।’

शोध में यह बात सामने आई है कि गुस्सा, द्वेष और आक्रामकता दिल के रोगों का नया खतरा बन कर उभर रहे हैं। यहां तक कि गुस्से की हालत को दोबारा याद करने से भी दिल का दौरा प्रोत्साहित होता है। शोध में यह भी पाया गया है कि अगर डॉक्टर आईसीयू में बेहोश मरीज के सामने नकारात्मक बातें करने की बजाय सकारात्मक बातें करें तो उसके नतीजे बेहतर निकलते हैं।’

सबसे बेहतर तरीका है अपने विचारों, बोलों और क्रियाओं में मौन को लाना
आध्यात्मिक दावा का अभ्यास करने का सबसे बेहतर तरीका है अपने विचारों, बोलों और क्रियाओं में मौन को लाना।
प्राकृति माहौल में शांत मन से केवल सैर करते हुए और प्राकृति की सुंदर आवाजों को सुनते हुए बिताना 20 मिनट के ध्यान के बराबर प्रभावशाली होता है।
20 मिनट के ध्यान से वही मानसिक ऊर्जा प्राप्त होती है जो सात घंटे की नींद से मिलती है।

छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर भगाएं तनाव

तनाव को दूर भगाना है तो छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर आगे बढ़े और उन लक्ष्यों को पार करते जाएं। ऐसा करने पर आपके सामने आएंगे चमत्कारिक परिणाम। मन मस्तिष्क पर छाया तनाव भी दूर होगा और अवसाद व खौफ जैसी स्थिती से बाहर निकलने का रास्ता आसानी से मिल जाएगा।

परीक्षा के दबाव में बुरी तरह से घिरा एक छात्र खुद को तनाव से पीड़ित बताकर जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञों के पास पहुंचा।काउंसिलिंग के दौरान उसमें आत्मविश्वास की कमी सामने आई। विशेषज्ञों ने उसके लिए छोटे छोटे लक्ष्य निर्धारित करके दिए। फिर उसे हफ्ते भर आने को कहा गया।

हफ्ते भर बाद डॉक्टरों के पास पहुंचा तो उसका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था। एग्जाम को लेकर उसका खौफ भी कुछ कम हो गया….ये केस तनाव प्रबंधन तकनीक का एक उदाहरण है जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय मानसिक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में की गई। अस्पताल में कुछ अरसा पहले राष्ट्रीय मानसिक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मेंटल हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत की गई थी। पिछले महीने इसमें तनाव से पीडि़तों को इससे मुक्त होने की तकनीक निशुल्क सिखाने की सुविधा शुरू हुई। औपचारिक तौर पर स्टाफ नर्सेज के लिए तनाव प्रबंधन पर कार्यशाला हुई।

हर शख्स पर काम करेगी अलग तकनीक :

राष्ट्रीय मानसिक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कार्यस्थल पर होने वाले तनाव से बचाव पर यह मुहिम शुरू हुई है। डॉ.धनंजय ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति में तनाव के कारण अलग-अलग होते हैं और सबको इससे मुक्त होने के लिए अलग-अलग तकनीक बताई जाती है।

तनाव पीड़ित होने के लक्षण:

हाथ पैर कांपना

भूख, नींद में कमी आना

किसी काम में मन नहीं लगना

स्वभाव चिड़चिड़ा होना आदि।

 

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