मथुरा के सिंधी समुदाय ने घर में पूजे भगवान झूलेलाल

मथुरा। सिंधी समुदाय के इष्टदेव वरूणावतार भगवान झूलेलाल की जयंती जहां हर वर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती थी, इस बार सादगी के साथ मनाई गई। हर घर में प्रार्थना की गई, हे झूलेलाल भगवान ! सबको कोरोना वायरस से बचाओं, संक्रमित बीमारी से मुक्ति दिलाओं।

मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का गम्भीरतापूर्वक पालन करते हुए सिंधी जनरल पंचायत द्वारा धूमधाम से हर्ष और उल्लास के साथ नगर में निकलने वाली झूलेलाल शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर देने के कारण घरों में ही छोटे-छोटे रूप में चेटीचंड पर्व मनाया गया।

घर-घर में भगवान झूलेलाल की छवि के समक्ष ज्योति प्रज्जवलित कर पूजा-अर्चना की गई और आरती के बाद घर में पकवान और  मीठे चावल का प्रसाद आपस में वितरित किया गया।

एक ओर भय और आशंकाओं का दौर वहीं सिंधीजन ‘‘ आयोलाल-झूलेलाल ‘‘ की मस्ती में डूबे रहे। घर की महिलाओं और बच्चों ने सिन्धी लोकगीत व भजनों के माध्यम से झूलेलाल का गुणगान गाया। स्वयं को राष्ट्रीय धारा के साथ जोडते हुए सिंधी परिवारों ने अपनी संस्कृति और सभ्यता के साथ सिंधी बोली को बनाए रखा। पंडित मोहन लाल महाराज ने ओनलाइन ही पूजन की विधि बताई।

शहर के कदम्ब विहार सिंधी कालौनी, राधिका विहार, नरसी विहार, कृष्णा आर्चिड, तिलक नगर, डेम्पीयर नगर, जयसिंह पुरा, महोली रोड, कृष्णा नगर आदि क्षेत्रों में रहने वाले सिंधी परिवारों ने घर के सदस्यों के साथ मिलकर पूजा-आरती कर अपने इष्टदेव वरूणावतार भगवान झूलेलाल जी को याद किया और कोरोना वायरस के संक्रमण से मानवता को बचाने के लिए प्रार्थना की।

सिंधी समुदाय के सबसे बडे पर्व चेटीचण्ड झूलेलाल जयंती के अवसर पर तमाम सिंधी परिवारों ने अपने घरों में भी दीप जलाये और रोशनी की।

पंचायत के नारायण दास लखवानी,  रामचंद्र खत्री, तुलसीदास गंगवानी, जीवतराम चंदानी, बसंत मंगलानी,
गुरूमुखदास गंगवानी, किशनचंद भाटिया, गोपालदास भाटिया, डा.प्रदीप उकरानी, जितेंद्र लालवानी, झामनदास नाथानी, चंदनलाल आडवानी, सुदामा खत्री, अशोक अंदानी, सुंदरलाल खत्री, किशोर इसरानी, कन्हैयालाल भाईजी, सुरेश मेठवानी, लीलाराम लखवानी, रमेश नाथानी, भगवानदास बेबू , आत्माराम खत्री, मिर्चूमल कोतकवानी, विष्णु हेमानी, हरीश चावला, सुरेश मनसुखानी, ऐडवोकेट कन्हैयालाल खत्री, पीताम्बर रोहेरा, अनिल मंगलानी, महेश घावरी, गिरधारी नाथानी आदि ने अपने-अपने घरों में ही झूलेलाल जयंती मनाई और सभी को नवसंवत्सर चेटीचंड पर्व की शुभकामनाएं दी।

सिंधी उत्सव के मुख्य संयोजक रामचंद्र खत्री ने वरूणावतार भगवान झूलेलाल हीं एकमात्र ऐसे अवतार हुए जिन्होंने पापियों का संहार नहीं किया बल्कि उनका हदय परिवर्तन कर उन्हें प्रेम शांति साम्प्रदायिक सद्भाव, एकता व अखण्डता का संदेश दिया।

पंचायत के अध्यक्ष नारायण दास लखवानी ने कहा कि अवतरण के बाद भगवान झूलेलाल ने मात्र 13 वर्ष  तक की उम्र तक ही सिंधी समुदाय का मार्गदर्शन किया। संवत् 1007 (सन् 951ई)  को जन्में वरूणावतार झूलेलाल संवत् 1020 (सन् 964 ई) के भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी पर जल समाधि लेकर अंतर्धान हो गए। आज भी लाल साई की ज्योति जलती रहती है जो भगवान झूलेलाल की मौजूदगी का एहसास कराती है।

  • Legend News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »