लंदन: नीरव मोदी के पक्ष में राहुल के करीबी कांग्रेसी नेता ने दी गवाही

एकदम दाएं राहुल गांधी के साथ लाल घेरे में खड़े कांग्रेसी नेता और पूर्व जज अभय थिप्‍से
एकदम दाएं राहुल गांधी के साथ लाल घेरे में खड़े कांग्रेसी नेता और पूर्व जज अभय थिप्‍से

नई दिल्‍ली। भगोड़े हीरा कोराबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण संबंधी अदालती सुनवाई के दौरान उसके पक्ष में कांग्रेसी नेता और बंबई एवं इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अभय थिप्से द्वारा लंदन में गवाही देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
बीजेपी ने इस मामले पर कांग्रेस को घेरा है राहुल गांधी पर बड़े आरोप लगाए हैं।
दरअसल, थिप्से ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए गवाही में लंदन की अदालत को बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के नीरव पर लगाए गए आरोप भारतीय कानूनों के तहत नहीं टिक पाएंगे। बता दें कि अभय थिप्से 2018 में कांग्रेस में शामिल हुए थे।
बीजेपी ने राहुल और कांग्रेस पर बोला हमला
बीजेपी नेता और प्रवक्ता ने ट्वीट कर राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने कहा, ‘एक ओर यहां भारत में राहुल गांधी नीरव मोदी को लेकर सरकार से सवाल पूछते हैं लेकिन दूसरी तरफ राहुल के खास एवं कांग्रेसी नेता अभय थिप्से (पूर्व जज) नीरव मोदी के पक्ष में गवाह बनते हैं। आखिर क्या है जो राहुल नहीं चाहते कि नीरव भारत आए। उस रात पार्टी में राहुल और नीरव में क्या लेन-देन हुई थी?’
अभय थिप्से ने गवाही में ये कहा
चेस ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से के भाई अभय थिप्से ने कहा, ‘भारतीय कानून के मुताबिक जब तक कि किसी के साथ धोखा न हो, तब तक धोखाधड़ी नहीं होगी। धोखाधड़ी के अपराध में धोखा अनिवार्य हिस्सा है। अगर LoUs जारी होने से किसी के साथ धोखा नहीं हुआ है तो किसी कॉर्पोरेट बॉडी के साथ धोखाधड़ी का सवाल ही नहीं है। बैंक के अधिकारियों को LoUs जारी करने का जो अधिकार दिया गया है, उसे प्रॉपर्टी नहीं कहा जा सकता और उन्हें संपत्ति के साथ सुपुर्द करने के लिए भी नहीं कहा जा सकता लिहाजा यह भरोसा तोड़ने वाला अपराध नहीं हो सकता।’ बता दें कि अभय थिप्से ने ही 2015 में अभिनेता सलमान खान को जमानत दी थी।
लंदन में चल रहा है नीरव पर मुकदमा
उधर भारत सरकार ने बुधवार को नीरव मोदी के खिलाफ धोखधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यहां की एक अदालत में सबूतों के तौर पर और दस्तावेज जमा किए थे। नीरव लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में अपने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा है। डिस्ट्रिक्ट जज सैमुअल गूजी ने दस्तावेज देरी से जमा किए जाने पर चिंता जताई लेकिन आवेदन पर विचार करने के लिए सहमति जता दी। इन दस्तावेजों में अधिकतर हीरा कारोबारी की कंपनियों से जुड़े बैंक दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा, ‘संतुलित रुख अपनाते हुए मैं सबूत पेश किये जाने की अनुमति दे रहा हूं लेकिन इनका विश्लेषण करने के लिए समय देना होगा।’ इससे प्रत्यर्पण मामले में सुनवाई में और देरी हो सकती है।
सुनवाई के दौरान जज ने ये कहा
नीरव के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामले में अंतिम दलीलें अब दो भाग वाले मामले की निर्धारित दूसरी सुनवाई में दी जाएंगी जो 7 सितंबर से पांच दिन तक चलेंगी। इस सप्ताह सुनवाई शुरू में शुक्रवार को समाप्त होनी थी लेकिन अब नीरव के वकीलों द्वारा एक अंतिम गवाह पेश किए जाने के बाद यह गुरुवार को पूरी हो सकती है।
जज ने कहा, ‘इस मामले में सबूत, जो कि भारी-भरकम हैं, की प्रस्तुति स्पष्ट स्वरूप में नहीं हैं। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार दूसरी सुनवाई के लिए तैयारी करते समय इस पर सावधानी पूर्वक विचार करेगी।’
भारतीय अधिकारियों की तरफ से अदालत में पक्ष रखते हुए क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने कहा था कि जज के लिए नए सबूत देखना जरूरी नहीं है लेकिन दस्तावेज मामले को स्पष्ट करने में मदद करते हैं और नीरव मोदी के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी के आरोपों में पहले कही गई बात का समर्थन करते हैं। लेकिन नीरव के बचाव दल ने दस्तावेज देरी से जमा किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे बहुत परेशानी वाला और अत्यंत विवादास्पद कदम करार दिया।
नीरव के वकील क्लेयर मोंटगोमेरी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि हमारा मामला भारत सरकार के लिए हमारी परेशानियों की परीक्षा लेने वाला और कहीं से कुछ भी सबूत पेश करने वाला बन गया है।’बचाव पक्ष के दो गवाहों- थियेरी फ्रिच और भारत से न्यायमूर्ति अभय थिप्से ने वीडियो लिंक से अपनी गवाही दी।
-एजेंसियां

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