लोकसभा के राजनाथ सिंह और राज्‍यसभा के पीयूष गोयल नियुक्‍त हुए उपनेता

नई दिल्‍ली। बीजेपी संसदीय दल की कार्यकारिणी का गठन किया गया। लोकसभा में राजनाथ सिंह को उपनेता बनाया गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को बुधवार को राज्यसभा में सदन का उपनेता नियुक्त किया गया जबकि राज्यसभा में थावर चंद गहलोत को पार्टी का नेता नियुक्‍त किया गया है। सूत्रों ने बताया कि 2 बार राज्यसभा के सदस्य रहे गोयल केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद का स्थान लेंगे, जो लोकसभा के लिए निर्वाचित हो गए हैं। प्रहलाद जोशी चीफ व्हीप होंगे। अर्जुन मेघवाल डिप्टी चीफ व्हीप होंगे।
नरेंद्र मोदी सरकार में रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल राज्यसभा में उप नेता होंगे जबकि सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता थावरचंद गहलोत को राज्यसभा में सदन का नेता नियुक्त किया गया है। गोयल महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य हैं। वे पहले भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। पिछली सरकार में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली राज्यसभा में नेता पद पर थे। फिलहाल जेटली बीमार चल रहे हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री गहलोत अनुभवी सांसद और भाजपा के वरिष्ठ दलित नेता हैं।
राज्यसभा में सदन के नेता की नियुक्ति केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी करती है। मध्यप्रदेश से आने वाले गहलोत के पास चार दशक लंबा संसदीय अनुभव है। वह मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य के साथ-साथ लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे हैं।
भाजपा की सरकार दोबारा बनने के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सरकार की मुख्य धारा में शामिल हुए। उन्हें गृह मंत्री का पद दिया गया। पिछली सरकार में गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह को पिछले बार के मुकाबले एक पायदान नीचे का मंत्रालय दिया गया। इसके बाद कैबिनेट की आठ महत्वपूर्ण समितियों में से केवल दो में उनको शामिल किया गया। यह खबर आग की रफ्तार से फैली। चारों ओर यह चर्चा होने लगी कि राजनाथ का कद कम किया गया है।
पूर्व गृहमंत्री और वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का साथ मिला और इसी के साथ कैबिनेट की समितियों में उनका रुतबा एक बार फिर कायम हो गया। केवल दो समितियों में शामिल किए गए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का नाम शाम होते-होते छह समितियों में जोड़ा जा चुका था। हालांकि, इस दबाव के बाद भी उन्हें सबसे महत्त्वपूर्ण मानी जाने वाली अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट में जगह नहीं मिली।
-एजेंसियां

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