22 भाषाओं में से किसी में भी अपनी बात रख सकते हैं सांसद: सुमित्रा महाजन

नई दिल्‍ली। लोकसभा अध्‍यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदस्यों को सूचित करते हुए कहा कि अब सदन के सदस्य संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से किसी में भी अपनी बात रख सकते हैं।

Lok Sabha के सदस्य अब सदन में डोगरी, कश्मीरी, कोकणी, संथाली और सिंधी भाषाओं में भी अपनी बात रख सकेंगे और उनका अनुवाद हो सकेगा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज सदन में इस संबंध में सूचना दी।

अब तक सदन में 17 भाषाओं के अनुवाद की ही व्यवस्था थी, लेकिन अब सदस्य 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में बोल सकेंगे और उनका अनुवाद भी सुना जा सकेगा। सुमित्रा महाजन ने सदस्यों को सूचित करते हुए कहा कि अब सदन के सदस्य संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से किसी में भी अपनी बात रख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सहयोग से इनके अनुवाद की व्यवस्था की गई है। जो सदस्य इन भाषाओं में बोलना चाहते हैं उन्हें 24 घंटे पहले इसकी सूचना देगी होगी ताकि राज्यसभा के सहयोग से व्यवस्था की जा सके।

इससे पहले राज्‍यसभा में भी 5 नई भाषाओं को शामिल किया गया था। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने बीते माह इस इन सुविधा के बारे में सदस्‍यों को अवगत कराया था। इस तरह उच्‍च सदन में भी सांसद 22 भाषाओं में अपनी बात रख सकते हैं। इससे पहले यह 17 भाषाओं में ही यह सुविधा हासिल थी लेकिन अब इसमें 5 नई भाषाओं को भी शामिल किया गया है।

यह ऐलान करते वक्त सभापित ने 22 में से 12 भाषाओं में खुद बोलते हुए कहा कि अब सांसद इन-इन भाषाओं में अपनी बात रख सकते हैं। नायडू ने कहा कि दूसरी भाषा में अपनी बात कहना आसान नहीं होता इसी को ध्यान में रखते हुए 5 और भाषाओं को शामिल किया गया है।
-एजेंसी

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