संस्कृति विश्वविद्यालय में Punjabi songs के नाम रही लोहड़ी की शाम

Punjabi songs पर छात्र-छात्राओं ने बिखेरी भारतीय सांस्कृतिक छटा

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में शुक्रवार की शाम लोहड़ी उत्सव के नाम रही। इस अवसर पर पारम्परिक परिधानों में सज-धज कर छात्र-छात्राओं ने Punjabi songs और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक छटा बिखेरी वहीं तिल, गुड़, मूंगफली आदि अग्नि को अर्पित कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम का शुभारम्भ कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक, ओ.एस.डी. मीनाक्षी शर्मा, एसोसिएट डीन डा. संजीव सिंह, निदेशक इंजीनियरिंग डा. राकेश धीमान, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. धर्मेन्द्र दुबे, डा. रीना रानी आदि ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने कहा कि भारत तीज-त्योहारों का देश है। हर प्रांत में अलग-अलग रूप में अलग-अलग तरीके से विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन इन सभी त्योहारों का मूल एक ही है। यही हमारी भारतीय संस्कृति का भी मूल है जो समस्त भारतवासियों को एक सूत्र में पिरोए रखता है। सभी त्योहार लोगों को उत्साह, खुशी व भाईचारे का संदेश देते हैं। इन त्योहारों की शुद्धता, पवित्रता व मूलभावना को बनाए रखने का दायित्व हम सभी पर है। ये त्योहार हमारी भारतीय संस्कृति का गौरव हैं और हमारी पहचान भी। जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में नित नए अनुसंधान एवं प्रयोगों के माध्यम से मनुष्य बहुआयामी विकास की ओर अग्रसर हुआ है बावजूद इसके मनुष्य का सर्वांगीण विकास तब तक सम्भव नहीं है जब तक कि बौद्धिक विकास के साथ-साथ उसमें भावनात्मक विकास न हो। हमारे देश के त्योहार, हमारे पर्व मनुष्य के भावनात्मक विकास में सदैव सहभागी रहे हैं।

डा. पाठक ने कहा कि हमारे देश में विभिन्न धर्मों एवं सम्प्रदायों के लोग निवास करते हैं तथा किसी न किसी धर्म या सम्प्रदाय से सम्बद्ध त्योहारों का क्रम निरंतर चलता रहता है। ये त्योहार मनुष्य की नीरस दिनचर्या में सुख का अरुण प्रभात लेकर आते हैं। भारतीय त्योहार प्रायः ऋतु चक्र के अनुसार आयोजित किए जाते हैं। लोहड़ी में किसानों के लिए एक विशेष संदेश समाहित है। लोहड़ी शब्द लोही से बना है। जिसका अभिप्राय है वर्षा होना, फसलों का फूटना। इस तरह यह त्योहार बुनियादी तौर पर मौसम के बदलाव तथा फसलों के बढ़ने से जुड़ा है। इस समय तक किसान हाड़ कंपाने वाली सर्दी में अपने जुताई-बुवाई जैसे सारे फसली काम कर चुके होते हैं। अब सिर्फ फसलों के बढ़ने और उनके पकने का इंतजार करना होता है। इसी समय से सर्दी भी घटने लगती है। इसलिए किसान इस त्योहार के माध्यम से इस सुखद, आशाओं से भरी परिस्थितियों को सेलिब्रेट करते हैं। पंजाब कृषि प्रधान राज्य है वहां लोढ़ी किसानों, जमींदारों एवं मजदूरों की मेहनत का पर्याय है। इसीलिए वहां इसे सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है।

इस अवसर पर ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि हर त्योहार हमें मिल-जुलकर रहने का संदेश देते हैं।

संस्कृति विश्वविद्यालय परिवार शिक्षा के साथ ही भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं का भी हिमायती है। खुशी की बात है कि आप लोग हर तीज-त्योहार मनाते हुए हम सब एक हैं का संदेश देते हो।

कार्यक्रम के अंत में पारम्परिक परिधानों में सज-धज कर छात्र-छात्राओं ने Punjabi songs और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक छटा बिखेरने पर निदेशक इंजीनियरिंग डा. राकेश धीमान ने सभी छात्र-छात्राओं की प्रशंसा करते हुए आभार माना।