Gadchiroli में सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही से गई जवानों की जान

मुंबई। महाराष्‍ट्र के पूर्व खुफिया अधिकारी शिरीष इनामदार का मानना है कि महाराष्ट्र के Gadchiroli में एक मई को हुए नक्सली हमले में क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) के 15 जवानों की जान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण गई।

राज्य खुफिया विभाग में अतिरिक्त उपायुक्त रह चुके इनामदार के मुताबिक, अभी तक मिले संकेतों से यही पता चलता है कि Gadchiroli मेंं क्यूआरटी के जवान नक्सलियों के बिछाये जाल में फंस गए। उन्होंने बताया कि ऐसे कम से कम दर्जनभर खुफिया अलर्ट थे कि नक्सल प्रभावित जिलों में इस तरह के हमले हो सकते हैं लेकिन इन इलाकों में संसदीय चुनाव शांतिपूर्ण हो जाने के कारण सतर्कता पर अतिआत्मविश्वास हावी हो गया। इनामदार ने कई सवाल भी उठाए।

मसलन, जिस निजी वाहन में क्यूआरटी जवान जा रहे थे उसका वे कितने समय से इस्तेमाल कर रहे थे? क्या ऐसे कार्यो के लिए उस वाहन का चालक प्रशिक्षित था? क्या जवानों के मूवमेंट की जानकारी नक्सलियों को लीक हो गई थी? अगर हां तो कैसे? क्या रोड क्लीयरेंस पार्टी और रोड ओपनिंग पार्टी ने अपना काम किया था? क्योंकि क्यूआरटी जवानों के वाहन से पहले दो और वाहन उस जगह से गुजरे थे। सड़क की ताजा खोदाई के निशान क्यों नहीं दिखे? जबकि वीडियो में वे साफ दिख रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाए कि नक्सलियों को अभी भी फंड और हथियार कैसे मिल पा रहे हैं।

नक्सली बड़े नेताओं ने Gadchiroli के ट्राइजंक्शन को नया ठिकाना बनाया है

एंटी नक्‍सल ऑपरेशन के आला अधिकारियों ने बताया कि बस्तर में नक्सलियों को घेरने के बाद नक्सली बड़े नेताओं ने गढ़चिरौली के ट्राइजंक्शन को नया ठिकाना बनाया है। यहां बड़े नेताओं की मौजूदगी की लगातार खबर मिल रही थी। पिछले चार साल में फोर्स और स्थानीय पुलिस के लगातार चलाए जा रहे आपरेशन के बाद नक्सली बैकफुट पर थे। कोई बड़ी वारदात करने में सफलता नहीं मिल रही थी। ऐसे में लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आपरेशन किया गया।

सूत्रों की मानें तो अप्रैल के पहले सप्ताह मेें नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी की एक बैठक अबूझमाड़ के घने जंगलों के बीच गरपा इलाके में हुई। इसी बैठक में एक दर्जन से ज्यादा बड़े आपरेशन और जनअदालत लगाकर अपनी धमक दिखाने का फैसला किया गया। सूत्रों की मानें तो बस्तर के नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में पिछले एक महीने में पांच से ज्यादा गांवों में जनअदालत लगाई थी। इसकी खबरें अब छनकर जंगलों से बाहर आ रही हैं।

 

-एजेंसी

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