यमुना छठ से पूर्व व्यवस्थाओं हेतु Nodal Officer को लिखा पत्र

मथुरा। यमुना छठ आगामी 11 अप्रैल को  है और इस स्नान-पर्व पर हजारों श्रृद्धालु बड़ी श्रद्धा व आस्था के साथ मुक्ति की कामना लेकर यमुना-पूजन व स्नान हेतु मथुरा आयेंगे। इस स्‍नान पर्व पर सारी व्‍यवस्‍थायें सुचारू रूप कराने के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाकर्ता रतन कुण्ड निवासी गोपेश्‍वरनाथ चतुर्वेदी ने यमुना कार्य योजना (मथुरा-वृन्दावन) के Nodal Officer अपर जिला मजिस्ट्रेट वित्‍त/राजस्‍व से यमुना छठ (यमुना-जयंती) स्नान-पर्व से पूर्व आवश्‍यक व्यवस्थाओं हेतु ध्यानाकर्षित कराया है।

उन्‍होंने Nodal Officer को भेजे पत्र में कहा कि उक्त संदर्भ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा निर्गत दिशा-निर्देर्शों के अनुपालन में परंपरागत रूप से की जाने वाली व्यवस्थाओं को सुचारू किया जाये। वर्तमान में यमुना-जल गंदा व कीड़ेयुक्त होने के कारण अतिआवश्‍यक है कि यमुना-छठ स्नान के दृष्‍टिगत यमुनाजी में पूर्व की भांति यमुना छठ से एक सप्ताह पूर्व कोट स्केप व हरनौल स्केप से 1000 क्यूसेक अतिरिक्त शुद्ध गंगा जल छोड़े जाने की व्यवस्था सुनिश्‍चित करायी जाये, ताकि श्रृद्धालुजन स्वच्छ जल में स्नान कर सकें।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा प्रदूषणकारी औद्यौगिक इकाईयों के प्रति बरती जा रही उपेक्षा के फलस्वरूप अधिकांश ढोल,वाइब्रेटर जैसी औद्यौगिक इकाईयों का संचालन बिना अनुज्ञप्ति के हो रहा है, जिनका बिना शोधन विषैला रासायनिक उत्प्रवाह नाले-नालियों के माध्यम से सीधा यमुनाजी में पहुंच रहा है, अतः पर्व से पूर्व आकस्मिक निरीक्षण व कार्यवाही कराया जाना अति आवश्‍यक हो गया है।

यमुना कार्य योजना के अन्तर्गत टैप किये गये नालों का जल पम्प कर एसटीपी तक पहुंचाने के उद्देश्‍य से मथुरा व वृन्दावन क्षेत्र में स्थापित सीवेज पम्पिंग स्टेशंस के निरन्तर संचालित न किये जाने से नालों व सीवर का अधिकांश प्रदूषित जल सीधा यमुनाजी में ही पहुंच कर प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहा है। अतः एसपीएस निरंतर चलाने की व्यवस्था सुनिश्‍चित कराया जाये।

यमुना कार्य योजना के अन्तर्गत निर्धारित प्रतिबन्धों की निरन्तर निगरानी हेतु मा. उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित रिवर पुलिस में पर्याप्‍त पुलिसकर्मी उपलब्ध न होने से मथुरा जनपद में संपूर्ण यमुना-नदी क्षेत्र की निगरानी उचित प्रकार नहीं हो पा रही है जिसके फलस्वरूप जलीय जीवों के अवैध शिकार, पशुओं को नदी में स्नान कराने व कूड़ा आदि डाले जाने की वर्जनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा और प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है ।

श्रीकृष्‍ण-जन्मभूमि के निकट मनोहरपुरा स्थित नगर पालिका द्वारा संचालित ‘पशु-वधशाला’ से उत्सर्जित रक्त व मांसादि अपशिश्टों के नालियों के माध्यम से यमुनाजी में जा रहा है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिलाप्रशासन द्वारा पषुवधशाला को सील करा देने के बावजूद वर्तमान में भी उक्त सील्ड पशुवध-स्थल की न केवल सील तोड़कर पशुवध जारी है बल्‍कि निकटवर्ती दरेसी व नई बस्ती क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर पशुवध कर मांस का निर्यात व बिना अनुज्ञप्ति शहर भर में दुकानें संचालित कर उच्च न्यायालय की अवमानना का अपराध निरन्तर जारी है, अतः उक्त संदर्भ में शीघ्र कठोर कार्यवाही किया जाना अति आवष्यक है ।

नर्सिंग होम्स से बायोमैडीकल वेस्ट संग्रह व उसके निस्तारण की व्यवस्था मुख्य चिकित्सा अधिकारी व प्रदूषण नियंत्रण विभाग की अनदेखी के कारण पूर्णतः चरमरा गयी है ।

घाटों पर लगी अधिकांश हाई मास्क व सेमी हाई मास्क लाईट्स रखरखाव के अभाव में बन्द हैं, जिन्हें पर्व से पूर्व ही चालू कराये जाने संबंधी निर्देष निर्गत किये जाये ।

गोपेश्‍वर चतुर्वेदी ने Nodal Officer से मांग की कि मथुरा-वृन्दावन में यमुना किनारे सघन सफाई अभियान चलाने व उच्च न्यायालय के आदेशानुसार यमुना छठ-स्नान की तैयारियों को पूरा किया जाये।

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