Sanskriti University में पढ़ाया जाता है आत्मनिर्भरता का पाठ

Sanskriti University कुलाधिपति का कहना है कि नौकरी के पीछे भागने की बजाय स्वरोजगार को प्राथमिकता दें

मथुरा। किसी भी समाज और देश के विकास के लिए उसकी युवी पीढ़ी का स्वावलम्बी होना नितांत आवश्यक है। भारत युवाओं का देश है, यहां की युवा शक्ति पर दुनिया की नजर है। किसी भी देश का सामाजिक और आर्थिक विकास उसकी युवा शक्ति पर ही निर्भर करता है। यह 21वीं सदी है, जहां हर समय कुछ न कुछ बदलता रहता है, इस बदलाव से युवा अनभिज्ञ न रहें इसी बात को ध्यान में रखते हुए संस्कृति यूनिवर्सिटी ने अपनी परिकल्पना और उद्देश्य न केवल तय किए हैं बल्कि वैश्विक व्यवसाय के मानकों को अपने पाठ्यक्रम में समाहित किया है। कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि हम चाहते हैं कि यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राएं न केवल टेक्निकल एज्यूकेशन के मूल तत्वों का अध्ययन-मनन कर इंडस्ट्रियल रिक्वायरमेंट को पूरा करें बल्कि नौकरी के पीछे भागने की बजाय स्वरोजगार को प्राथमिकता दें।

शांत वातावरण, सर्वसुविधायुक्त सेमिनार हाल, सुयोग्य प्राध्यापक, आधुनिक लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, एम.एस.एम.ई. का सेण्टर आफ एक्सीलेंस, स्कूल आफ लाइफ स्किल, मनमोहक क्रीड़ांगन और प्लेसमेंट विभाग संस्कृति यूनिवर्सिटी की ऐसी खूबियां हैं जिनके चलते छात्र-छात्राओं को शिक्षा पूरी करने से पहले ही करियर संवारने का सुअवसर मिल जाता है। बदलते परिवेश में जहां हर युवा को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करना चुनौती माना जा रहा है वहीं संस्कृति यूनिवर्सिटी कौशलपरक शिक्षा के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी को स्वावलम्बी बना रही है। टेक्निकल एज्यूकेशन संस्कृति यूनिवर्सिटी का सबसे मजबूत पक्ष है। यहां खुले सेण्टर आफ एक्सीलेंस की लैबों में संचालित लेटेस्ट टेक्निकल मशीनें यंगस्टर्स के टैलेण्ट को जहां विश्व प्रतिस्पर्धी बनाती हैं वहीं भारतीय चिकित्सा पद्धति (यूनानी, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक) छात्र-छात्राओं के अंदर सेवाभाव का संचार कर उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में करियर संवारने को प्रोत्साहित करती है। यहां हर ऐसा पाठ्यक्रम संचालित है जिसमें दक्षता हासिल कर छात्र-छात्राएं अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

कौशलपरक शिक्षा की जहां तक बात है, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और मैन्यूफैक्चरिंग एण्ड आटोमेशन (एम.टैक) की शिक्षा ब्रज मण्डल में सिर्फ संस्कृति यूनिवर्सिटी में ही उपलब्ध है। रोबोटिक्स इंजीनियरिंग एज्यूकेशन में दक्षता हासिल कर यंगस्टर्स प्राइवेट इंडस्ट्रीज, ऑटोमोबाइल्स सेक्टर, इंडस्ट्रियल टूल्स, रोबोटिक टेक्नोलॉजी, कम्प्यूटर कंट्रोल्ड मशीन प्रोग्रामिंग, रोबोटिक सेल्स में अच्छे पैकेज पर जॉब हासिल कर रहे हैं। आज की इंडस्ट्रियल डिमांड को देखते हुए संस्कृति यूनिवर्सिटी में छात्र-छात्राओं को आटोकैड, एन्सिस और मैन्यूफैक्चरिंग में सीएनसी की ट्रेनिंग भी प्रदान की जा रही है।

Sanskriti University में टेक्निकल एज्यूकेशन ही नहीं हर ऐसा पाठ्यक्रम संचालित है जोकि युवा पीढ़ी को शिक्षा पूरी करने से पहले ही इस योग्य बना देता है कि वह कहीं भी किसी से भी प्रतिस्पर्धा कर सके। संस्कृति यूनिवर्सिटी में तकनीकी शिक्षा ही नहीं भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी प्रमुखता दी गई है। यहां आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम जहां युवाओं में नया हौसला पैदा कर रहे हैं वहीं जो युवा अध्यापन के क्षेत्र में करियर संवारना चाहते हैं उनके लिए यहां बीएलएड (बीटीसी), बीएड, डीएड स्पेशल आदि के पाठ्यक्रम संचालित हैं। जिन युवाओं की घूमने-फिरने और खान-पान में रुचि है, उनके लिए यहां टूरिज्म एण्ड होटल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम देश-विदेश में उड़ान भरने का मौका प्रदान करता है। संस्कृति यूनिवर्सिटी का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ ही विदेशी यूनिवर्सिटियों से अनुबंध होने के चलते छात्र-छात्राओं को कहीं भटकना नहीं पड़ता। पढ़ाई के साथ नौकरी आज की युवा पीढ़ी की पहली प्राथमिकता है, यहां का प्लेसमेंट विभाग छात्र-छात्राओं की अपेक्षाओं को पूरा करने में पूरी तरह से समर्थ है।

एक तरफ जहां उच्च शिक्षण संस्थान व्यावसायिक बन चुके हैं वहीं Sanskriti University वसुधैव कुटुम्बकम की मिसाल है। विश्वविद्यालय में न केवल सुयोग्य और अनुभवी शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाती है बल्कि छात्र-छात्राओं को समय-समय पर विशेषज्ञों के गेस्ट लेक्चर, शैक्षिक भ्रमण तथा सेमिनारों का भी लाभ मिलता रहता है। यहां विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी, वाई-फाई सुविधा जहां चौबीसों घण्टे उपलब्ध है वहीं सर्वसुविधायुक्त जिम, आधुनिक खेल मैदान, समस्त विभागों और संकायों में जीवन जीने की कला पाठ्यक्रम, शांत वातावरण छात्र-छात्राओं में नई ऊर्जा का संचार करता है। संस्कृति यूनिवर्सिटी में शिक्षा ही नहीं संस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। हम कह सकते हैं कि Sanskriti University एक शिक्षण संस्थान ही नहीं बल्कि दुनिया के बदलते परिदृश्य का आईना है।

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