संस्कृति में Importance of Ayurveda पर व्याख्यान

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में पर व्याख्यान विषय पर विशेष लक्चर हिमांचल स्थित सेवा एवं शिक्षा संस्थान के निदेशक तथा माॅस्टर ट्रेनर वैद्य राजेश कपूर ने दिया। उन्होंने फाॅर्मेसी के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व स्वाथ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार एलोपैथिक मेडिसिन लगातार बेअसर हो रही हैं और संक्रामक रोगों की संख्या मानव मात्र के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। ऐसे में आयुर्वेद ही श्रेष्ठ समाधान बचता है। उन्होंने चीनी, साबुन, आयोडाॅयड नमक, देशी और विदेशी पौधों के पत्तों के मनुष्य पर पड़ने वाले तात्कालिक प्रभाव का प्रदर्शन कर सभी को हैरत में डाल दिया।

आयोडाॅयड नमक, सुगर, साबुन से तत्काल एनर्जी लाॅस का प्रयोग करके दिखाया, 
उन्होंने कहा कि आरएनडी के बाद भी हजारों एलोपैथिक दवाएं अब तक विड्रा हो चुकी हैं। हर दवा का एक न एक साइड इफेक्ट होता है। इसी के चलते अनेक गंभीर रोग पनपे हैं। उन्होंने कहा कि कैल्शियम की गोली खाने से हाॅर्ट अटैक का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। उन्होंने भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति का जिक्र करते हुए बताया कि अंग्रेजी जमाने में कर्नल क्रुक की नांक हैदर अली ने काटी थी जिसे एक भारतीय नापित ने जोड़ा। कटी नाक को देश लौटकर उसने साथियों को दिखाया और पूछा कि बताओ कहीं नाक कटने का निशान है। साथियों को कटे का निशान नहीं मिला। उसने भारतीय परंपरागत चिकित्सा की समृद्धि को उल्लखिल किया।

ऐलोपैथिक मेडिसिन के लगातार बेअसर होने व दुष्प्रभावों पर की चर्चा

वैद्य कपूर ने कहा कि पश्चिम में टुकड़ों में देखने का ट्रेन्ड है। इसी के चलते एक मनुष्य को भी कई टुकड़ों में बांट रखा है। न्यूरो, फिजियो, गायनी आदि, जबकि अयुर्वेद समग्र और संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि भारत में 1400 मेडिकल काॅलेज थे और यहां शिक्षण देने वाले एमएस के बराबर ज्ञानी हुआ करते थे। वेद्य जी ने सभागार में बच्चों की हथेली पर बारी-बारी से आयोडाॅयड नमक, साबुन, चीनी आदि रखकर तत्काल शक्ति के कम होने को प्रमाणित किया। इतना ही नहीं उन्होंने तुलसी के पत्ते से तत्काल ऊर्जा संचार व फाॅइकस से शक्ति के ह्रास को भी बच्चों के बीच उन्हीं के माध्यम से प्रदर्शित किया। उनके इस प्रदर्शन से बच्चे उनके कायल हो गए। उन्होंने अनेक अध्ययनों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि खाने का सोड़ा और सेंधा नमक खाने वाले व्यक्ति को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी कभी जीवन में नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि वैद्य कपूर गोविज्ञान, पंचगव्य, स्ट्रैस मैनेजमेंट, कैपेसिटी बिल्डिंग एण्ड पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के अलावा आॅर्गेनिक फाॅर्मिंग सरीखे विषयों पर देश भर में कई हजार लक्चर दे चुके हैं।

संस्कृति विश्वविद्यालय में Importance of Ayurveda पर प्रख्यात मास्टर ट्रेनर वैद्य राजेश कपूर ने विद्यार्थियों को बनाया दिवाना

विवि के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने वैद्यश्री के अनुभव और ज्ञान को समाज के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वह परंपरागत ज्ञान का भी ध्यान रखें। पुष्पक विमान की बातें हमारे प्राचीन साहित्य में मिलती हैं। वर्तमार हवाई जहाज इसी का प्रतिरूप है। ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि हमें आधुनिकता की दौड़ के साथ परंपरागत तौ-तरीकों, चीजों को भी जांचना-परखना चाहिए। परंपरागत ज्ञान के दम पर ही स्वामी रामदेव सरीखे लोग करोड़ों लोगों के मार्ग दर्शक बने हैं। कुलपति प्रो0 राणा सिंह ने कहा कि आयुर्वेद हमारी आगामी पीढ़ियों को नवजीवन प्रदान करेगा और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोग इस पुण्य के भागीदार बनेंगे। अंत में वैद्य श्री को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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